बाल मनोविज्ञान का क्या महत्व है?

बाल मनोविज्ञान के अन्तर्गत बालकों के व्यवहार, स्थितियों, समस्याओं तथा उन सभी कारणों का अध्ययन किया जाता है, जिनका प्रभाव बालक के व्यवहार एवं विकास पर पड़ता है। इसके अन्तर्गत बालकों के जन्म से लेकर बाल्यावस्था तक का अध्ययन किया जाता है।

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यह शिक्षकों को शिक्षण की प्रक्रिया में मदद करता है तथा बालकों के सर्वांगीण विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्रो एवं क्रो ने बाल मनोविज्ञान को इस प्रकार परिभाषित किया है, “बाल मनोविज्ञान एक वैज्ञानिक अध्ययन है, जिसमें बालक के जन्म के पूर्व काल से लेकर उसकी किशोरावस्था तक का अध्ययन किया जाता है।” थॉमसन के अनुसार, “बाल मनोविज्ञान सभी को एक नई दिशा में संकेत करता है। यदि उसे उचित रूप में समझा जा सके तथा उसका उचित समय पर उचित ढंग से विकास हो सके, तो हर बच्चा एक सफल व्यक्ति बन सकता है।”

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बाल मनोविज्ञान का महत्व

बाल मनोविज्ञान बच्चों के शारीरिक और मानसिकसे जुड़ी विभिन्न समस्याओं का विश्वसनीय समाधान प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई बालक पढ़ाई – लिखाई पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम नहीं है, या यदि बच्चा बहुत सक्रिय है, तो बाल मनोविज्ञान में झिझक, अवसाद और विस्तर गीलापन जैसी समस्याओं का भी अध्ययन किया जाता है। बाल मनोविज्ञान यह भी अध्ययन करता है कि उम्र के अनुसार मानसिक और शारीरिक विकास हो रहा है या नहीं। इसके अलावा, बचपन में भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास से जुड़े अनेको कार्यकलापों का भी अध्ययन किया जाता है।

बाल मनोविज्ञान की उपयोगिता एवं महत्व को निम्न प्रकार से समझाया जा सकता है:

  • बाल मनोविज्ञान के द्वारा बालकों के स्वभाव एवं विकास को समझने के बाद उनको शिक्षित करने की प्रक्रिया सरल हो जाती है।
  • बाल मनोविज्ञान बालकों के व्यक्तित्व-विकास को समझने में सहायक होता है। बच्चों को समय-समय पर निर्देशन (Direction) की आवश्यकता होती है। इस निर्देशन के द्वारा ही बालकों में उनकी रुचियों के अनुरूप विभिन्न कौशलों का विकास किया जा सकता है। बाल मनोविज्ञान की सहायता के बिना बाल निर्देशन सम्भव नहीं।
  • बाल मनोविज्ञान की सहायता से बालकों के व्यवहार के अध्ययन के बाद विद्यालय एवं घर के वातावरण को बच्चों के अनुकूल उपयुक्त बनाने में सहायता मिलती है।
  • बाल मनोविज्ञान बालकों के व्यवहार एवं उसके कारणों के बारे में बताता है। इसलिए बालकों की आदतों एवं व्यवहार में सुधार करने में इसकी प्रमुख भूमिका होती है। बाल मनोविज्ञान के जरिए बालक के व्यक्तित्व का अध्ययन कर उसके भविष्य के बारे में बताया जा सकता है एवं आवश्यकता पड़ने पर उसे बेहतर भविष्य के लिए सलाह दी जा सकती है।

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