शिक्षण विधियों के प्रकार

Types of teaching methods

शिक्षक, शिक्षण विधियों के उपयोग से छात्रों में अपेक्षित व्यवहार परिवर्तन लाता है और छात्र शिक्षकों की सहायता से | सीखने के अनुभव प्राप्त करते हैं, परन्तु अनेक शिक्षण विधियों | को छात्रों की समस्त क्षमताओं के विकास के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता।  शिक्षक एवं छात्रों की भूमिका के आधार पर शिक्षण विधियों को निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है

 

शिक्षक-नियन्त्रित अनुदेशन (Teacher controlled instruction)

यह शिक्षण की सर्वाधिक प्राचीन विधि है। इसमें शिक्षक की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होती है। शिक्षक अधिक क्रियाशील रहता है।

इस प्रकार शिक्षण विधियों को निम्नलिखित तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है

  • व्याख्यान विधि
  • पाठ-प्रदर्शन विधि
  • अनुवर्ग-शिक्षण विधि

छात्र-नियन्त्रित अनुदेशन (Student controlled instruction)

19वीं शताब्दी में मनोविज्ञान ने शिक्षा एवं शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावित किया और छात्र के विकास को प्राथमिकता दी जाने लगी। प्रकृतिवादी, दर्शन ने भी छात्र की प्रकृति के अनुसार शिक्षा की व्यवस्था को महत्त्व दिया। इस प्रकार की शिक्षा छात्र-केन्द्रित होने लगी और छात्र का स्थान मुख्य एवं शिक्षक का स्थान गौण होता गया। छात्र-नियन्त्रित अनुदेशन में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि छात्र का विकास स्वाभाविक रूप से हो, जिससे उसकी क्षमताओं तथा योग्यताओं का सम्पूर्ण विकास हो सके।

समूह-नियन्त्रित अनुदेशन (Group controlled instruction)

समूह नियन्त्रित अनुदेशन में छात्रों को विभिन्न समूहों में बाँटकर शिक्षा दी जाती है। यह एक प्रकार का छात्र-नियन्त्रित अनुदेशन ही है, अन्तर केवल इतना है कि इसमें शिक्षक छात्रों की पूरी निगरानी करते हैं। अनुकरणीय विधि, शैक्षिक यात्रा विधि, योजना विधि, ऐतिहासिक खोज विधि इत्यादि समूह नियन्त्रित विधि के उदाहरण हैं।

शिक्षक व छात्र नियन्त्रित अनुदेशन (Teacher and student controlled instruction)

शिक्षक व छात्र नियन्त्रित अनुदेशन में शिक्षक एवं छात्र दोनों की भूमिका होती है। प्रश्नोत्तर विधि, अन्वेषण विधि, सामूहिक वाद-विवाद विधि, संवेदनशील प्रशिक्षण विधि इत्यादि शिक्षक व छात्र नियन्त्रित अनुदेशन के उदाहरण हैं।

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