हरियाणा प्रदेश की मिट्टी के प्रकार

Types of Soil in Haryana (Haryana ki Mitti – हरियाणा की मिटटी )

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इस कृषि प्रधान राज्य का अधिकांश भाग मैदानी है। राज्य के इस मैदानी भाग का निर्माण यमुना, सरस्वती, घग्घर आदि नदियों द्वारा लाई गई भूरे-पीले रंग की जलोढ़ मृदा से हुआ है। हरियाणा के दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र में पवनों द्वारा राजस्थान से बहाकर लाई गई हल्के भूरे रंग की बालू युक्त रेतीली मृदा मिलती है। शिवालिक से लेकर अरावली तक राज्य का भूतल विविधताओं से भरा है।

कृषि वैज्ञानिक डा० जसबीर सिंह के अनुसार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में निम्नलिखित छः (6) प्रकार की मिट्टी मृदाएँ पाई जाती है।

शिवालिक, पर्वतपादीय तथा चट्टानी तल की मृदा (Shivalik, Mountainous and Rocky Soil)

हरियाणा के उत्तर पूर्वी भाग में शिवालिक की पहाड़ियों का विस्तार है तो दक्षिणी भाग में अरावली की पहाड़ियों की उपस्थिति है। शिवालिक तथा पर्वतपादीय मृदाएँ राज्य के पंचकुला, अम्बाला तथा यमुनानगर जिलों में मिलती हैं।

  • शिवालिक की मृदाएँ (Shivalik Soils)

    इन मृदाओं में बलुआ पत्थर, बजरी, चीका तथा बालू की प्रधानता होती है। ये मृदा पंचकुला की कालका तथा अंबाला की नारायणगढ़ तहसील में पाई जाती है।

  • पर्वतपादीय मृदा (Mountainous Soil)

    शिवालिक तथा घग्घर-यमुना मैदान के मध्य स्थित गिरीपाद मैदान में ये मृदा मिलती है। बालू, बजरी एवं रेतयुक्त यह मृदा कम उपजाऊ है। पंचकुला की कालका तथा अम्बाला की नारायणगढ़ तहसील में इस मृदा को ‘घर’ कहते हैं तथा यमुनानगर जिले की जगाधरी तहसील में इसे ‘कन्धी’ कहते हैं।

  • चट्टानी तल की मृदा (Rocky Soil)

    हरियाणा के दक्षिणी भाग में अरावली की तलहटी में पथरीली और रेतीली मृदा मिलती है जो बहुत ही कम उपजाऊ है। इस प्रकार की मृदा भिवानी, दादरी, गुरूग्राम, फरीदाबाद तथा पलवल जिलों के कुछ सीमित क्षेत्रों में मिलती है।

सामान्यतः भारी मृदा (Moderately Heavy Soils)

यमुना नदी के साथ-साथ के क्षेत्रों में यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों के पूर्वी भाग में इस प्रकार की मृदा मिलती है। सिल्टयुक्त इस मृदा को ‘नवीन खादर’ भी कहते हैं। सिल्ट की अधिकता के कारण यह मृदा भारी होती है तथा सूखने पर कठोर हो जाती है। इस मिट्टी में जलधारण की क्षमता कम होती है।

भारी तथा बहुत भारी मृदा (Heavy and Very Heavy Soils)

यह मृदा हरियाणा में बरसाती नदियों के किनारों पर पाई जाती है। चिकायुक्त सिल्ट की अधिकता होने के कारण इस मिट्टी में जलधारण क्षमता कम होती है। बरसात में यह मृदा चिपचिपी हो जाती है तथा सूखने के पश्चात् कड़ी हो जाती है। इस मिट्टी को स्थानीय भाषा में ‘डाकर’ (Daker) कहा जाता है। थानेसर तथा फतेहाबाद के घग्घर के साथ लगते क्षेत्र तथा यमुनानगर के जगाधरी में ‘डाकर’ मिट्टी मिलती है

मध्यम मृदा (Medium Soil)

यह मृदा अपेक्षाकृत उपजाऊ है। इस प्रकार की मृदा हरियाणा प्रदेश के गुड़गाँव (गुरुग्राम) जिले के कुछ भागों, अंबाला जिले के कुछ भागों, जीन्द, कैथल, सोनीपत, कुरुक्षेत्र तथा फरीदाबाद के क्षेत्रों में मिलती है। इसमे तीन प्रकार की मृदाएँ सम्मिलित हैं:

  • मोटी दोमट मृदा (Corse loam soil)

    मोटे कणों की दोमट मिट्टी मेवात जिले के नूंह तथा पश्चिमी फिरोजपुर झिरका में मिलती है।

  • हल्की दोमट मृदा (Light loam soil)

    हल्की दोमट मिटटी मुख्यतः उत्तरी हरियाणा में अंबाला के दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्रों तथा नारायणगढ़ तहसील के दक्षिणी भागों में पाई जाती है। इसके साथ यह मृदा दक्षिण-पूर्वी हरियाणा में गुड़गाँव के उत्तरी भागों मेवात में नूह के उत्तर-पश्चिमी भागों में तथा मध्य रेवाडी के कुछ क्षेत्रों पाई जाती है।

  • दोमट मृदा (Loam Soil)

    दोमट मिट्टी उपजाऊ होने के साथ-साथ सुप्रवाहित भी है। मध्य हरियाणा में यमुना-घग्घर मैदान के बहुत बड़े भाग पर दोमट मिटटी पाई जाती है। यह मिटटी जीन्द, कैथल, रोहतक सीमा, तथा करनाल जिलों में मिलती है। गुड़गाँव (गुरुग्राम) तथा फरीदाबाद जिलों के कुछ क्षेत्रों में भी दोमट मिट्टी मिलती है। यह मृदा गेहूं, चावल, कपास तथा गन्ने की फसलों के लिए बहुत उपयोगी है।

हल्की मृदा (Light soil)

यह नरम मृदा है जिसमें जल रिसाव अधिक होता है। सिल्ट, मृत्तिका तथा बालू की उपस्थिति के अनुपात के अनुसार इस मिट्टी को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है

  • अपेक्षाकृत बलुई दोमट मृदा (Relatively sandy loam soil)

    इस मिट्टी में सिल्ट तथा मृत्तिका की तुलना में बालू की अधिकता होती है। बलुई दोमट मिटटी को स्थानीय भाषा में ‘रौसली (Rausli)’ भी कहते हैं। यह मिट्टी दक्षिण-पश्चिमी हरियाणा के हिसार, भिवानी, रेवाड़ी तथा गुडगाँव (गरुग्राम) और झज्जर जिलों के कुछ भागों में पाई जाती है। बालुकायुक्त दोमट मिट्टी तथा दोमट मिट्टी के क्षेत्र के मध्य एक पट्टी के रूप में विस्तृत यह मिट्टी बाजरा, ज्वार तथा दलहन जैसी शुष्क कृषि के लिए उपयोगी है। आजकल ‘टपकन सिंचाई’ (Drip irrigation) की तकनीक आ जाने से इसकी उर्वरा शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है

  • बलुई दोमट मिट्टी (Sandy loam soil)

    इस मिट्टी में बालू, मृत्तिका तथा सिल्ट लगभग बराबर मात्रा में मिलते है मिटटी हरियाणा के पश्चिमी क्षेत्र में घग्घर नदी के उत्तर में सिरसा जिलें की डबवाली तथा सिरसा तहसील में मिलती है।

 

अत्यंत हल्की मृदा (Very light soil)

यह बालू और चूना युक्त दोमट मृदा है जो सिरसा जिले के दक्षिणी भाग, फतेहाबाद, हिसार भिवानी तथा महेन्द्रगढ़ जिलों में पाई जाती है। यह शुष्क प्रदेश की मृदा है जिसमें मृदा कण असंगठित होते हैं। इस कम उपजाऊ मृदा में वनस्पति कणों का अभाव रहता है। इस मृदा के क्षेत्रों में बालू के स्तूपों की प्रधानता रहती है और वायु अपरदन एक सामान्य प्रक्रिया है। इस मृदा में मोटे अनाज और दालों की कृषि ही वर्षाकाल में हो पाती थी। सरकारी प्रयासों से इस क्षेत्र में अब ‘ड्राई लैंड फार्मिंग” को बढ़ावा दिया जा रहा है।

हरियाणा की मृदा पर आधारित महत्वपूर्ण तथ्य

  • कृषि वैज्ञानिक डा० जसबीर सिंह के अनुसार राज्य में छः (6) प्रकार की मृदाएँ मिलती हैं।
  • शिवालिक की मृदाएँ पंचकुला जिले की कालका तहसील और अंबाला जिले की नारायणगढ़ तहसील में मिलती हैं।
  • इस मृदा में बलुआ पत्थर, बजरी, चीका तथा बालू की प्रधानता होती है।
  • पंचकुला की कालका तथा अंबाला की नारायण गढ़ तहसील में पर्वतपादीय (गिरिपादीय) मृदा मिलती है। इन दोनों क्षेत्रों में इसे ‘घर’ कहते हैं।
  • यमुनानगर की जगाधरी तहसील में भी कुछ क्षेत्र में इस प्रकार की मृदा मिलती है जिसे स्थानीय भाषा में ‘कन्धी ‘ कहते हैं।
  • यमुना नदी के साथ लगते यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों के पूर्वी क्षेत्रों में ‘सामान्यतः भारी मृदा’ मिलती है। इस मृदा को ‘नवीन खादर’ भी कहते हैं।
  • इस मृदा में सिल्ट की अधिकता के कारण यह मृदा भारी होती है तथा इसमें जलधारण की क्षमता कम होती है। स्थानीय भाषा में इसे ‘खादर’ मृदा भी कहा जाता है।
  • बहुत भारी मृदा में चीकायुक्त सिल्ट की मात्रा अधिक होती है। स्थानीय भाषा में इसे ‘डाकर’ भी कहते हैं।
  • ‘मध्यम मृदा ‘ प्रदेश में गुड़गाँव (गुरुग्राम) जिले के कुछ भागों, अंबाला जिले के कुछ क्षेत्रों जीन्द कैथल, सोनीपत, कुरुक्षेत्र तथा फरीदाबाद जिलों में मिलती है।
  • मोटे कणों की दोमट मिट्टी मेवात जिले के नूंह तथा पश्चिमी फिरोजपुर झिरका में मिलती है।
  • ‘यमुना-घग्घर’ के मैदान के बहुत बड़े भाग पर दोमट मिट्टी पाई जाती है।
  • दोमट मिट्टी गेहूँ, चावल, कपास तथा गन्ने की फसलों के लिए उपयोगी है।

प्रश्न 1. हरियाणा के किस जिले में दलदली मिट्टी पाई जाती है?

उत्तर – हरियाणा के सिरसा जिले में दलदली मिट्टी पाई जाती है।

प्रश्न 2. हरियाणा का दिल किसे कहते हैं?

उत्तर – जींद जिले को हरियाणा के दिल के रूप में जाना जाता है।

 

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