वैयक्तिक विभिन्नता के प्रकार

Types of individual variation

 मनोवैज्ञानिकों ने वैयक्तिक विभिन्नताओं को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया है, जो निम्न प्रकार है

भाषा के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नताएँ(Individual differences by language)

  • अन्य कौशलों की तरह ही भाषा भी एक प्रकार का कौशल है। प्रत्येक व्यक्ति में भाषा के विकास की भिन्न-भिन्न अवस्थाएँ पाई जाती हैं। यह विकास बालक के जन्म के बाद ही प्रारम्भ हो जाता है। अनुकरण, वातावरण के साथ अनुक्रिया तथा शारीरिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति की माँग इसके विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका विकास धीरे-धीरे, परन्तु एक निश्चित क्रम में होता है।
  • कोई बालक भाषा के माध्यम से अपने विचारों को अभिव्यक्त करने में अधिक कुशल होता है, जबकि कुछ बालक इस मामले में उतने कुशल नहीं होते।

लिंग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation by gender)

  • सामान्यत: स्त्रियाँ कोमल प्रकृति की होती हैं, किन्तु अधिगम के क्षेत्रों में बालकों एवं बालिकाओं में भिन्नता नहीं होती।
  • स्त्रियों की शारीरिक संरचना पुरुषों से अलग होती है। सामान्यत: पुरुष, स्त्रियों से अधिक लम्बे होते हैं।
  • एक ही परिवेश में रहने वाले लड़कों की अपेक्षा लड़कियों में सहनशीलता का भाव अधिक पाया जाता है।

बुद्धि के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation on the basis of intelligence)

  • परीक्षणों के आधार पर ज्ञात हुआ है कि सभी व्यक्तियों की बुद्धि एकसमान नहीं होती।
  • बालकों में भी बुद्धि के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता दिखाई पड़ती है। कुछ बालक अपनी आयु की अपेक्षा अधिक बुद्धिमत्ता को प्रदर्शित करते हैं, इसके विपरीत कुछ बच्चों में सामान्य बौद्धिक क्षमता पाई जाती है।
  • बुद्धि-परीक्षण के आधार पर यह ज्ञात किया जा सकता है कि कोई बालक किसी अन्य बालक से कितना अधिक बुद्धिमान है?
  • बुद्धि-लब्धि (I.Q) के आधार पर भी वैयक्तिक विभिन्नता पाई जाती है। उदाहरणस्वरूप किसी कक्षा के सभी विद्यार्थियों की बुद्धि-लब्धि मापी जाए। अधिकतम बालकों की बुद्धि-लब्धि 90-110 के बीच (सामान्य) कुछ बालकों की बुद्धि 140 से अधिक (प्रतिभाशाली) तथा कुछ बालकों की बुद्धि 71 से कम (जड़, बुद्धि) हो सकती है।

परिवार एवं समुदाय के आधार परवैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation based on family and community)

  • मानव के व्यक्तित्व के विकास पर उसके परिवार एवं समुदाय का स्पष्ट प्रभाव पड़ता है। इसलिए समुदाय के प्रभाव को वैयक्तिक विभिन्नता में भी देखा जा सकता है।
  • अच्छे परिवार एवं समुदाय से सम्बन्ध रखने वाले बच्चों का व्यवहार सामान्यत: अच्छा होता है।
  • यदि किसी समुदाय में किसी प्रकार के अपराध करने की प्रवृत्ति हो, तो इसका कुप्रभाव उस समुदाय के बच्चों पर भी पड़ता है।
  • यद्यपि आर्थिक-सामाजिक स्तर तथा बुद्धि-लब्धि का सम्बन्ध तो है, किन्तु यह बहुत उच्च स्तर का नहीं है। इन दोनों में सह-सम्बन्ध अवश्य पाया गया है, किन्तु यह नहीं कहा जा सकता कि निम्न सामाजिक-आर्थिक समूह से आने वाले बच्चे कम बुद्धिमान एवं उच्च सामाजिक-आर्थिक समूह के बच्चे अधिक बुद्धिमान होते हैं।
  • इसके विपरीत निम्न स्तर के आर्थिक एवं सामाजिक समूह में अनेक उच्च बुद्धि-लब्धि वाले बालक पाए जाते हैं और उच्च स्तर के आर्थिक-सामाजिक समूह में निम्न बुद्धि-लब्धि वाले बालक पाए जाते हैं।

जाति से सम्बन्धित वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation related to caste)

  • समाज में जाति एवं नस्ल सम्बन्धित विभिन्नताएँ पाई जाती हैं, इन्हें दूर करने के लिए व्यक्ति को पूर्वाग्रहों, रूढ़ियों, पूर्वधारणाओं तथा नकारात्मक मनोवृत्तियों (Attitude) से हटकर सोचना चाहिए।
  • इस तरह की सोच सामाजिक एकता बनाए रखने में बाधा का कार्य करती है।

संवेग के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation on the basis of momentum)

  • संवेगात्मक विकास विभिन्न बालकों में विभिन्नता लिए हुए होता है, जबकि यह भी सत्य है कि मोटे-तौर पर संवेगात्मक विशेषताएँ बालकों में समान रूप से पाई जाती हैं।
  • कुछ बालक शान्त स्वभाव के होते हैं, जबकि कुछ बालक चिड़चिड़े स्वभाव के होते हैं। कुछ बालक सामान्यत: प्रसन्न रहते हैं, जबकि कुछ बालकों में उदास रहने की प्रवृत्ति होती है।

धार्मिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation on religious grounds)

  • धर्म एवं समाज दोनों एक दूसरे के पूरक हैं न कि अलग-अलग। धर्म व्यक्ति के नैतिक मूल्यों (Ethical Value) एवं आचरण को नियन्त्रित करता है।
  • संसार का प्रत्येक धर्म सहिष्णुता, प्रेम, बन्धुत्व, भाईचारा, मानवता का पाठ सिखाता है, लेकिन विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों में धार्मिक आधार पर वैयक्तिक विभिन्नताएँ उनके आचरण एवं व्यवहार में अलग-अलग होती हैं।
  • विभिन्न धर्मों में आस्था का स्वरूप, रहन-सहन का स्तर, खान-पान की प्रवृत्ति वस्त्र-परिधान का स्वरूप, धार्मिक कर्म-काण्ड की प्रवृत्ति “…” इत्यादि अलग-अलग होती हैं।

शारीरिक विकास के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation on the basis of physical development)

  •  शारीरिक दृष्टि से व्यक्तियों में अनेक प्रकार की विभिन्नताएँ देखने को मिलती हैं।
  • शारीरिक भिन्नता रंग, रूप, आकार, भार, कद, शारीरिक गठन, लिंग-भेद, शारीरिक परिपक्वता आदि के कारण होती है।

अभिवृत्ति के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation based on aptitude)

  • सभी बालकों की अभिवृत्ति एक समान नहीं होती।
  • सभी बालकों की रुचियाँ भी समान नहीं होती।
  • कुछ बालकों में पढ़ाई के प्रति अभिरुचि अधिक होती है, तो कुछ बालकों में अपेक्षाकृत कम।
  • बालकों की अभिवृत्ति के निर्धारण में पारिवारिक वातावरण का अधिक योगदान होता है।

व्यक्तित्व के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation on the basis of personality)

  •  प्रत्येक व्यक्ति में व्यक्तित्व के आधार पर वैयक्तिक विभिन्नता देखने को मिलती है। कुछ बालक अन्तर्मुखी होते हैं और कुछ बहिर्मुखी।
  • एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से मिलने पर उसकी योग्यता से प्रभावित हो या न हो, परन्तु उसके व्यक्तित्व से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता है।
  • टॉयलर के अनुसार, “सम्भवत: व्यक्ति, योग्यता की विभिन्नताओं के बजाय व्यक्तित्व की विभिन्नताओं से अधिक प्रभावित होता है।”

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