हरियाणा में पहने जाने वाले पारंपरिक आभूषण

हरियाणा पारंपरिक रूप से एक समृद्ध क्षेत्र रहा है। मध्यकालीन लूट के बावजूद प्रदेश के आर्थिक हालात अपेक्षाकृत अच्छे रहे हैं। मध्य तथा उत्तरी हरियाणा का क्षेत्र एक समतल उपजाऊ मैदान है। आर्थिक हालात अच्छे होने के कारण लोक जीवन की दशा भी अच्छी थी। खान-पान और वेशभूषा के साथ-साथ गहने-आभूषण भी लोक जीवन में अहम् स्थान रखते थे।

प्रदेश की संस्कृति में गहने-आभूषण बड़े चाव से पहने जाते हैं। पुरुषों में पारंपरिक रूप से गोफ, कठला, मुरकी, जंजीरा आदि आभूषण लोकप्रिय थे तो महिलाएँ सिर से लेकर पैरों तक गहनों से लदी होती थीं। प्रदेश में बच्चे के जन्म से लेकर मनुष्य के जीवन के विभिन्न अवसरों पर गहने तथा आभूषण भेंट किए जाने की परंपरा रही है। प्रदेश में महिलाएँ गहनों को बड़े चाव से पहनती हैं।

प्रदेश के पुरुषों तथा महिलाओं द्वारा परंपरागत रूप से पहने जाने वाले गहने तथा आभूषणों को यहाँ सूचीबद्ध किया गया है।

महिलाओं द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषण

चेहरे तथा सिर पर धारण किए जाने वाले आभूषण

 

  • बूजनी-कानों में पहना जाने वाला स्वर्णाभूषण।
  • कर्णफूल-कानों के स्वर्णाभूषण।
  • बाली-कानों में पहने जाने वाले छल्ले के आकार के आभूषण
  • झूमके-कानों में पहने जाने वाले स्वर्णाभूषण
  • डांडे-कान छिदवाकर पहनी जाने वाली चांदी की पतली छड़
  • कोक्का-नाक में पहने जाने वाली सोने की छड़ जिसके बाहरी सिरे पर छोटा सा लटू बना होता है।
  • लोंग-नाक में कोक्के की तरह पहना जाने वाला आभूषण
  • पुरली-नाक में पहना जाने वाला स्वर्णाभूषण। इसकी आकृति लोंग की तरह की होती है परन्तु, आकार लोंग से बड़ा होता है।
  • नाथ (नथ)-नाक में बाईं ओर छेद करके पहना जाने वाला आभूषण। यह आकार में बड़े छल्ले की तरह होती है।
  • नथली-नाथ का छोटा रूप नथली होता है।
  • पुरली-नाक में पहना जाने वाला एक छिद्रदार आभूषण। पुरली आकार में लोंग से बड़ी होती है।
  • फूल/शीशफूल-सिर के ऊपर बाँधा जाने वाला सोने या चांदी का आभूषण। इसमें गोलाकार टीकड़े भी लगे होते हैं।
  • बोरला-सोने या चांदी से बना रत्न जड़ित आभूषण जो महिलाओं की मांग से होकर माथे पर लटकता रहता है।
  • टीक्का-माथे पर पहना जाने वाला एक स्वर्णाभूषण
  • बेस्सर-माथे पर बांधा जाने वाला एक स्वर्णाभूषण
  • सिंगार पट्टी-सोने या चांदी से बना आभूषण। इसे महिलाएँ सिर पर बाँधती हैं।

 

 महिलाओं द्वारा गले में पहने जाने वाले आभूषण

 

  • हंसला-महिलाओं द्वारा गले में पहना जाने वाला सोने या चांदी का आभूषण।
  • हंसली-महिलाओं द्वारा गले में पहना जाने वाला स्वर्णाभूषण। इसे हंसली की हड्डी (गले के नीचे चन्द्राकार हड्डी) के समानान्तर पहना जाता है।
  • गलश्री-महिलाओं द्वारा गले में पहना जाने वाला स्वर्णाभूषण। सोने के मोटे मनकों को तीन या पाँच पंक्तियों में कपड़े की पट्टी पर सजाया होता है।
  • कण्ठी-सोने के मनकों से बनी गले की माला। सोने के मनकों के बीच-बीच में काँच के मनके लगे होते हैं। कण्ठी के बीच में  पीपल के पत्ते के आकार का एक टीकड़ा भी लगा होता है।
  • झालरा-गिन्नियों या चांदी के सिक्कों को डोर में गूंथकर बनाया गया हार।
  • मटरमाला/मोहन माला-मटर के दाने के आकार के सोने के मनकों से बनी माला।
  • जंजीरा-सोने या चांदी की जंजीर।
  • रानीहार/चन्दनहार-सोने या चांदी से बना हार जिसमें कई लड़ियाँ तथा बीच-बीच में कई टिकड़े जड़े होते हैं।
  • पतरी-पान के पत्ते या शहतूत के पत्ते के आकार की एक छोटी सी पत्ती जिसे डोरे में पिरोकर गले में पहना जाता है।
  • कठला-गले में पहना जाने वाला स्वर्णाभूषण। सामान्यतः सूती/रेशमी धागों की डोर में स्वर्ण के बने मनके तथा बड़े-बड़े मोती पिरोए जाते हैं।

महिलाओं द्वारा हाथ तथा कलाइयों में पहने जाने वाले आभूषण (Jewelry worn by women in hands and wrists in Haryana)

  • हथफूल-सोने या चांदी से बना आभूषण जिसके मध्य में फूल के आकार की पत्ती के चारों ओर सोने या चांदी की लड़ियाँ लगी होती हैं। इसे महिलाएँ हाथ में पहनती हैं।
  • बाजूबंध-महिलाओं द्वारा हाथ या बाजू पर बांधा जाता है। बाजूबंद को बाजूबांक भी कहा जाता है।
  • टाड-बाजू में पहना जाने वाला आभूषण जिसमें चांदी की बनी एक पट्टी पर धुंघरू लटका दिए जाते हैं। टाडिया-बाजू पर पहनी जाने वाली सोने की टाड।
  • पछली-कलाई पर पहना जाने वाला आभूषण जिस पर सोने के चोंचदार घुघरू लगे होते हैं।
  • काँगणी-हल्का कंगन जिसे दुल्हन को पहनाया जाता है। यह कलाई पर पहना जाता है। आरसी-यह एक प्रकार की आइना जड़ित अंगूठी होती है।
  • कंगन-महिलाओं के लिए कलाई का आभूषण। इसकी मोटाई का घेरा चौड़ा होता है।
  • कड़ला-बच्चों की कलाई पर पहनाया जाने वाला सोने या चांदी से बना छोटा कड़ा जिस पर छोटे-छोटे घुघरू लगे होते हैं।

 

महिलाओं द्वारा हाथों या कलाइयों में पहने जाने वाले कुछ अन्य आभूषण हैं पौहची, गजरा, छन्न, अंगूठी आदि।

 

महिलाओं द्वारा पाँव में पहने जाने वाले पारंपरिक आभूषण (Traditional jewelery worn by women in feet in Haryana)

महिलाओं द्वारा दामण के नीचे चांदी से बने भारी-भारी आभूषण धारण किए जाते थे। इन आभूषणों में से कुछ को यहाँ सूचीबद्ध किया जा रहा है।

  • छैलकड़े-पैरों में टखने से ऊपर पहने जाने वाले चांदी के आभूषण। इनका आकार हाथों में पहने जाने वाले कड़ों से काफी मोटा होता है।
  • कड़ी-पैरों में छलकड़ों से ऊपर चांदी की कड़ी पहनी जाती है। ये मोटे वलय के आकार के होते हैं जिनका व्यास 1 इंच के लगभग होता है।
  • झांझण/झांझण चूड़ी-झांझण का आकार छैलकड़े जैसा ही होता है परन्तु इन्हें अन्दर से खोखला बनाकर बीच में धुंघरू डाल दिए जाते हैं। इन्हें पहनकर जब स्त्रियाँ चलती हैं तो ‘झन-झन’ की ध्वनि उत्पन्न होती है। कड़ी से ऊपर पैरों में झांझन पहनी जाती हैं
  • नेवरी/न्योरी-स्त्रियां घुटने से नीचे झांझण से ऊपर चांदी से बनी न्योरी/नेवरी पहनती हैं। वलय के आकार के इन आभूषणों में घुघरू जड़े होते हैं।
  • पाली-पैरों में नेवरी से ऊपर पाली पहनी जाती है। चांदी से बने ये मोटे कड़े नेवरी के ऊपर टिके रहते हैं। टखने से लेकर ऊपर घुटनों की ओर महिलाएँ उपरोक्त पाँचों चांदी के आभूषणों को-छैलकड़े, कड़ी, झांझण, नेवरी तथा पाली के क्रम में पहनती हैं।
  • रमझोल-चांदी के बने इन आभूषणों को पैरों में टखने से नीचे पाजेब की तरह पहना जाता है। इनमें घुघरू लगे होते हैं जो चलते समय संगीत की मधुर ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
  • पाजेब-स्त्रियों द्वारा टखने से नीचे पहनी जाती है। चांदी से बनी जंजीरों के ढांचे से छोटे-छोटे घुघरू जुड़े होते हैं। महिलाएँ जब चलती हैं तो पाजेब से मधुर झंकार निकलती है।
  • बिछए तथा चटकी-पैरों की उंगलियों में पहने गए बिछुए किसी स्त्री के विवाहित होने की पहचान होते हैं। बिछुए चांदी के बने छल्ले के आकार के होते हैं। उपरोक्त आभषणों के अलावा प्रदेश की स्त्रियाँ परंपरागत रूप से पैरों में बांकड़ी, फूल पत्ती, गजरियां तथा तात्ती आदि चांदी के आभूषण भी पहनती हैं।

 

स्त्रियों के कमर के आभूषण

  • नाड़ा-चांदी का लहरदार जेवर, यह घाघरे के नाड़े से बांधा जाता है।
  • तागड़ी-स्त्रियों द्वारा पहना जाने वाला कमर का जेवर।

पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले आभूषण

 

  • कठला-पुरुषों द्वारा गले में पहना जाने वाला वलयाकार स्वर्णाभूषण।
  • मुरकी-सोने से बनी छल्ली की आकृति के आभूषण जो कानों में पहने जाते हैं।
  • जंजीरा-पुरुषों तथा स्त्रियों द्वारा गले में पहनी जाने वाली सोने की चेन
  • गोफ-पुरुषों द्वारा गले में पहना जाने वाला स्वर्णाभूषण।

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