प्रतिभाशाली बालक का अर्थ

The Meaning of a Genius Boy

प्रतिभाशाली बालक वे होते हैं, जो सामान्य बालकों की अपेक्षा बुद्धि, मौलिक चिन्तन, कार्य करने की कला, सृजनात्मकता, विषय-वस्तु को समझने की क्षमता, जोखिम लेने की क्षमता इत्यादि में श्रेष्ठ होते हैं। इनकी पहचान बुद्धि परीक्षण, उपलब्धि परीक्षण तथा अन्य परीक्षण के माध्यम से की जा सकती है। अध्यापक को अध्यापन के दौरान इन बालकों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है ताकि इनका विकास अपनी गति से हो सके। सृजनात्मकता किसी व्यक्ति के सोचने की अभिनव कला को दर्शाती है। सृजनात्मक बालक अपनी सोच में स्वतन्त्र होते हैं। इन बालकों की बुद्धि-लब्धि 120 से ऊपर होती है। अध्यापक को चाहिए कि वह विद्यार्थियों के समक्ष विभिन्न समस्याओं को रखकर उनमें सृजनात्मकता का विकास करे।

प्रतिभाशाली बालक विशेष प्रकार का ध्यान चाहते हैं, क्योंकि इन बालकों की बुद्धि अधिक होती है। ये बालक सामान्य बालकों से इतने अलग होते हैं कि इनके लिए विशेष प्रकार की शिक्षा, प्रशिक्षण और समायोजन की आवश्यकता होती है, अन्यथा ये दूसरे बालकों के साथ और कक्षा में उचित प्रकार से समायोजित नहीं हो पाते। कई बार इनकी ओर ध्यान न देने से ये दूसरी दिशा की ओर विचलित (Divert) होने लगते हैं। प्राय: उच्च बद्धि लब्धि (IQ) वाले विद्यार्थियों को ही प्रतिभाशाली माना जाता है। अतः प्रतिभावान बालक शब्द का अभिप्राय बालक की उच्च बुद्धि लब्धि से लिया जाता है।

टरमन के अनुसार, “प्रतिभावान बालक शारीरिक विकास, शैक्षणिक उपलब्धि, बुद्धि और व्यक्तित्व में वरिष्ठ होते हैं।” प्रतिभावान बालकों की परिभाषा में केवल उच्च बुद्धि लब्धि वाले बालक ही सम्मिलित नहीं किए जाते, बल्कि वे सभी बालक सम्मिलित होते हैं जो दूसरे बालकों से किसी भी क्षेत्र में अति वरिष्ठ होते हैं:

जैसे–कलावर्ग, साहित्य, काव्य रचना आदि।

कॉलसनिक के अनसार, “वह प्रत्येक बालक जो अपनी आयु-स्तर के बालकों में किसी योग्यता में अधिक हो और जो हमारे समाज के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण नई देन. दे।

पॉल विटटी के अनसार, “प्रखर बुद्धि बालक वह है जो किसी कार्य को करने के प्रयास में निरन्तर उच्च स्तर बनाए रखता है।”

प्रतिभाशाली बालकों की पहचान (Identification of talented children)

प्रत्येक कक्षा या स्कूल में प्रतिभाशाली बालक होते हैं, लेकिन इनका पता लगाना और चयन करना आसान कार्य नहीं है। इसके लिए अध्यापक को विभिन्न प्रविधियों का प्रयोग करना पड़ता है। अत: इन प्रविधियों का ज्ञान अध्यापक के लिए आवश्यक है, अन्यथा विद्यार्थी की प्रतिभा दबकर रह जाएगी।

इनकी पहचान या चयन के लिए अध्यापक निम्नलिखित प्रविधियों का प्रयोग कर सकते हैं

बुद्धि परीक्षण (Intelligence test)

प्रतिभाशाली बालकों की पहचान के लिए अध्यापक विभिन्न प्रकार के बुद्धि परीक्षणों या परीक्षाओं का प्रयोग कर सकता है। ये बुद्धि परीक्षाएँ अध्यापक व्यक्तिगत तौर पर या समूहों में प्रयोग कर सकता है। इन परीक्षणों के लिए अध्यापकों का प्रशिक्षण अति आवश्यक है।

उपलब्धि परीक्षाएँ (Achievement exams)

बुद्धि परीक्षाओं के अतिरिक्त बालकों को उपलब्धि परीक्षाओं के द्वारा भी प्रतिभाशाली बालकों की श्रेणी के लिए पहचाना जा सकता है। इस प्रकार की परीक्षाओं में विद्यार्थियों की उपलब्धियों का ज्ञान भली-भाँति हो जाता है। उच्च स्तर की उपलब्धि बालकों के प्रतिभावान होने की आशा जाग्रत करती है।

 अभिरुचि परीक्षाएँ (Aptitude tests)

अभिरुचि से विद्यार्थियों की भविष्य की सफलता के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है, क्योंकि अभिरुचियाँ किसी एक विशेष योग्यता से सम्बन्धित होती हैं। बुद्धि परीक्षाओं की तरह अभिरुचि परीक्षाएँ भी होती हैं। इन परीक्षणों के लिए भी अध्यापक का प्रशिक्षण अति आवश्यक है।

सम्बन्धित व्यक्तियों से सूचनाएँ (Information from related people)

प्रतिभाशाली बालकों के व्यक्तित्व के बारे में अध्यापक अन्य व्यक्तियों से भी सूचनाएँ एकत्रित कर सकता है। बुद्धि आदि के अतिरिक्त यदि अध्यापक अन्य गतिविधियों में बालकों की प्रतिभा का अनुमान लगाना चाहता है, तो वह प्रतियोगिताएँ आदि करवा कर उनकी अन्य योग्यताओं में वरिष्ठता का अनुमान लगाकर प्रतिभाशाली बालक की खोज कर सकता है।

सम्बन्धित व्यक्तियों से अध्यापक विद्यार्थियों की रुचियों का ज्ञान भी प्राप्त कर सकता है और उनकी रुचियों के अनुसार अपने शिक्षण कार्य में आवश्यक परिवर्तन एवं सुधार ला सकता है।

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