शिक्षण सहायक सामग्री

Teaching aids

अध्यापन-अधिगम की प्रक्रिया को सरल, प्रभावकारी एवं रुचिकर बनाने वाले उपकरणों को शिक्षण सहायक सामग्री कहा जाता है। इन्द्रियों के प्रयोग के आधार पर शिक्षण सहायक सामग्री को मोटे तौर पर तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है

  • श्रव्य सामग्री
  •  दृश्य सामग्री एवं
  • दृश्य-श्रव्य सामग्री। |

दृश्य सहायक सामग्री (Visual aids)

दृश्य सहायक सामग्री का तात्पर्य उन साधनों से है जिनमें केवल देखने वाली इन्द्रियों (आँखों) का प्रयोग होता है। इसके अन्तर्गत पुस्तक, चित्र, मानचित्र, ग्राफ, चार्ट, पोस्टर, श्यामपट्ट, बुलेटिन बोर्ड, संग्रहालय, स्लाइड इत्यादि आते हैं।

वास्तविक पदार्थ (RealSubstance)

वास्तविक पदार्थों का तात्पर्य उन वस्तुओं से है, जिन्हें बालक देखकर, छूकर अनुभव कर सकता है। ये बालकों की इन्द्रियों को प्रेरणा देते हैं तथा उन्हें निरीक्षण एवं परीक्षण के अवसर प्रदान करके उनकी अवलोकन शक्ति का विकास करते हैं।

नमूने (Samples)

नमूने वास्तविक पदार्थों अथवा मूल वस्तुओं के छोटे रूप होते हैं। इनका प्रयोग उस समय किया जाता है, जब वास्तविक पदार्थ या तो उपलब्ध न हों अथवा इतने बड़े हों कि उन्हें कक्षा में दिखाना सम्भव न हो। उदाहरण के तौर पर रेल, हवाई जहाज इत्यादि के नमूनों का प्रयोग इनके बारे में बताने के लिए किया जाता है।

चित्र (Picture)

चित्र बच्चों को सीखाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चित्र के माध्यम से सिखाई गई बातें अधिक समय तक याद रहती हैं। चित्रों को आसानी से कक्षा में दिखाया जा सकता है।

मानचित्र (Map)

मानचित्र का प्रयोग प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं तथा भौगोलिक तथ्यों अथवा स्थानों के अध्ययन करने के लिए अति आवश्यक है। मानचित्रों के प्रयोग के समय शिक्षकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इनके ऊपर इनका नाम, शीर्षक, दिशा तथा संकेत आदि अवश्य लिखा हो।

रेखाचित्र (Sketch)

वास्तविक पदार्थ, नमूने एवं मानचित्र (Map) तीनों के अभाव की स्थिति में किसी वस्तु या स्थान के बारे में अध्यापन क लिए उसके रेखाचित्र का प्रयोग किया जाता है।

ग्राफ (The graph)

ग्राफ के प्रयोग से बालकों को भूगोल, इतिहास, गणित तथा विज्ञान आदि अनेक विषयों का ज्ञान सरलतापूर्वक दिया जा सकता है। भूगोल विषय के ‘अध्यापन में जलवायु, उपज तथा जनसंख्या आदि का ज्ञान कराने के लिए ग्राफ की विशेष सहायता ली जाती है। इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग गणित तथा विज्ञान शिक्षण में भी किया जाता है।

चार्ट (Chart)

चार्टी के प्रयोग से शिक्षक को शिक्षण का उद्देश्य प्राप्त करने में सहायता मिलती है। चार्टी का प्रयोग भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र, नागरिकशास्त्र तथा गणित एवं विज्ञान आदि सभी विषयों में सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

बुलेटिन-बोर्ड (Bulletin board)

बुलेटिन-बोर्ड आधुनिक शिक्षा प्रणाली का एक उपयोगी उपकरण है। इस पर देश की राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक समस्याओं के सम्बन्ध में चित्र, ग्राफ, आकृति तथा लेख एवं आवश्यक सूचनाओं को प्रदर्शित करके बालकों की जिज्ञासा को इस प्रकार से उत्तेजित जाता है कि उनके ज्ञान में निरन्तर वृद्धि होती रहे।

फ्लेनेल बोर्ड (Flannel board)

फ्लेनेल बोर्ड बनाने के लिए प्लाईवुड अथवा हार्ड-बोर्ड के टुकड़े पर फ्लेनेल के कपड़े को खींचकर बाँध दिया जाता है। इसके बाद इस पर विभिन्न विषयों से सम्बन्धित चित्र, मानचित्र, रेखाचित्र तथा ग्राफ आदि को प्रदर्शित किया जाता है।

संग्रहालय (The museum)

संग्रहालय भी शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। इसमें सभी वस्तुओं को एकत्रित करके रखा जाता है। इन वस्तुओं की सहायता से पाठ रोचक तथा सजीव बन जाता है। संग्रहालय में एकत्रित वस्तुओं का प्रयोग भूगोल, इतिहास, गणित तथा विज्ञान आदि विषयों के शिक्षण में सरलता से किया जा सकता है।

ब्लैकबोर्ड (Blackboard)

कक्षा अध्यापन में दृश्य साधन के रूप में ब्लैकबोर्ड (श्यामपट्ट) का ही प्रयोग सर्वाधिक होता है। इसका उचित एवं विधिपूर्वक उपयोग पाठ को प्रभावशाली बनाने में बहुत सहायक होता है।

चित्र-विस्तारक यन्त्र (Picture expander)

(एपिडियास्कोप) चित्र-विस्तारक यन्त्र पाठ को अधिक स्पष्ट और रोचक बनाने के लिए एक प्रभावशाली यन्त्र है। यह मैजिक लैनटर्न से भी अधिक प्रभावशाली यन्त्र है, क्योंकि मैजिक लैनटर्न में चित्रों या पाठ को प्रदर्शित करने के लिए पहले उसके स्लाइड बनाने की आवश्यकता होती है, जबकि . एपिडियास्कोप में छोटे-छोटे चित्रों, मानचित्रों, पोस्टरों तथा पुस्तक के पृष्ठों को कमरे में अन्धेरा करके चित्रपट अथवा पर्दे पर बिना स्लाइडे बनाए हुए ही बड़ा करके दिखाया जा सकता है।

स्लाइडें, फिल्म पट्टियाँ तथा प्रोजेक्टर (Slides, Film Straps and Projectors)

स्लाइडों एवं स्लाइडों की फिल्म पट्टियों का प्रयोग शिक्षण में सहायक साम्रगी के तौर पर किया जाता है। इसके लिए प्रोजेक्टर की सहायता ली जाती है। प्रोजेक्टर एपिडियास्कोप से बेहतर साबित होते हैं क्योंकि एपिडियास्कोप द्वारा बालकों को चित्र या पाठ एक-एक कर दिखाया जा सकता है, जबकि प्रोजेक्टर द्वारा चित्रों की स्लाइडों अथवा फिल्म पट्टियों को एक क्रम में दिखाया जा सकता है।

श्रव्य सहायक सामग्री (Audio aids)

श्रव्य सामग्री से तात्पर्य उन साधनों से है, जिनमें केवल श्रव्य इन्द्रियों (कानों) द्वारा प्रयोग किया जा सकता है। श्रव्य सामग्री के अन्तर्गत रेडियो, टेलीफोन, ग्रामोफोन, टेलीकॉन्फ्रेंसिंग, टेप-रिकॉर्डर इत्यादि आते हैं।

रेडियो (radio)

रेडियो द्वारा दूरस्थ बालकों को भी एक साथ नवीनतम घटनाओं एवं सूचनाओं की जानकारी प्राप्त होती है। रेडियो पर विभिन्न कक्षा के विभिन्न विषयों के अध्यापन सम्बन्धी प्रोग्राम भी सुनाए जाते हैं।

टेप-रिकॉर्डर (Tape recorder)

शैक्षिक उपकरण के रूप में टेप-रिकॉर्डर एक प्रचलित उपकरण है। इसकी सहायता से महापुरुषों के प्रवचन, नेताओं के भाषण तथा प्रसिद्ध साहित्यकारों की कविताओं, कहानियों तथा प्रसिद्ध कलाकारों के संगीत का आनन्द उठाया जा सकता है। इससे बालकों को बोलने की गति तथा स्वर, प्रभाव सम्बन्धी सभी त्रुटियों एवं उच्चारणों को सुधारने में आश्चर्यजनक सहायता मिलती है।

दृश्य-श्रव्य सहायक सामग्री (Audio-visual aids)

दृश्य-श्रव्य सामग्री का तात्पर्य शिक्षण के उन साधनों से है जिनके प्रयोग से बालकों की देखने और सुनने वाली ज्ञानेन्द्रियाँ सक्रिय हो जाती हैं और वे पाठ के सूक्ष्म से सूक्ष्म तथा कठिन-से-कठिन भावों को सरलतापूर्वक समझ जाते हैं। दृश्य-श्रव्य सामग्री का अर्थ उन समस्त सामग्री से है जो कक्षा में अथवा अन्य शिक्षण परिस्थितियों में लिखित अथवा बोली हुई पाठ्य-सामग्री को समझाने में सहायता देती है। इसके अन्तर्गत सिनेमा, वृत्तचित्र, दूरदर्शन, नाटक इत्यादि आते हैं।

चल-चित्र (Movies)

चल-चित्र अथवा सिनेमा के अनेक लाभ हैं, इसके द्वारा प्राप्त किया हुआ ज्ञान अन्य उपकरणों की अपेक्षा अधिक स्थायी होता है, क्योंकि इसमें देखने तथा सुनने की दो इन्द्रियाँ सक्रिय रहती हैं। इसके द्वारा बालकों को विभिन्न देशों, स्थानों अथवा घटनाओं का ज्ञान सरलतापूर्वक कराया जा सकता है। इससे बालकों की कल्पनाशक्ति का विकास होता है।

टेलीविजन (Television)

चल-चित्र से होने वाले सभी लाभ टेलीविजन से भी प्राप्त होते हैं, किन्तु सिनेमा की अपेक्षा इसका दायरा अत्यन्त विस्तृत होता है। आजकल टेलीविजन पर कई मनोरंजक कार्यक्रमों के अतिरिक्त कई प्रकार के शैक्षिक कार्यक्रमों का भी प्रसारण किया जाता है, जिससे बच्चों के ज्ञान में वृद्धि होती है। इग्नू एवं यूजीसी के अतिरिक्त कुछ विश्वविद्यालयों द्वारा भी उपग्रहों की मदद से विभिन्न प्रकार के शैक्षिक कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है।

कम्प्यूटर (Computer)

कम्प्यूटर एक ऐसा आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसका प्रयोग जीवन के विविध क्षेत्रों में किया जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका व्यापक उपयोग होने लगा है।

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