स्वामी नितानंद

स्वामी नितानंद जी का बचपन का नाम नंद लाल था। इनका जन्म नारनौल में श्री दुर्गा दत्त और सरस्वती देवी के घर हुआ था। आरंभ में वह भरतपुर रियासत के अधीन वृंदावन में तहसीलदार नियुक्त हुए। परन्तु, 1763 ई. में वह नौकरी तथा घर-बार छोडकर निकल गए। तत्पश्चात्, उन्होंने रेवाड़ी के जंगलों में स्वामी गुमानी राम जी के साथ कई वर्षों तक प्रवास किया। स्वामी गमानी राम जी ने उन्हें दीक्षा दी तथा ‘नितानंद’ नाम दिया। इसके पश्चात् स्वामी नितानंद जी ने बहु-झोलरी में सेठ हिम्मत राम के यहाँ प्रवास किया। एक वर्ष पश्चात् वह सेठ हिम्मत राम जी की प्रेरणा से झज्जर जिले के जटेला ग्राम के निकट वन में प्रवास करने लगे तथा घोर साधना की। इसी स्थान पर वर्तमान में ‘तपोभूमि जटेला धाम’ है। स्वामी ध्यानदास जी इनके प्रथम अनुयायी थे। स्वामी नितानंद जी की ‘शब्दवाणी’ भक्ति परंपरा में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। स्वामी जी की वाणियों को उनके अनुयायियों ने ‘सत्य सिद्धान्त प्रकाश शब्द वाणी संग्रह’ नामक ग्रन्थ में संकलित किया है।

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