तमिलनाडु राज्य

तमिलनाडु राज्य की भौगोलिक जानकारी (Geographical information of the state of Tamil Nadu)

तमिलनाडु हिन्दु महासागर एवं गंगा सागर (बंगाल की खाड़ी) के समुद्र तट पर विस्तृत प्रदेश है। इसमें 31 जिले हैं।

  • क्षेत्रफल – 130060 वर्ग किलोमीटर
  • जनसंख्या – 72,147,030 (सन् 2011की जनगणना के अनुसार)
  • राजधानी – चेन्नई
  • साक्षरता – 80.33 प्रतिशत
  • प्रमुख पर्वत – नीलगिरि एवं मलयगिरि
  • प्रमुख नदियाँ- कावेरी, ताम्रपर्णी, पेन्नार
  • स्थापना – 1 नवम्बर 1956 तथा 14 जनवरी 1969 को मद्रास राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु कर दिया गया।

तमिलनाडु राज्य के प्रमुख नगर एवं तीर्थस्थान (Major cities and pilgrimage centers in the state of Tamil Nadu)

  1. चेन्नई
  2. रामेश्वरम्
  3. मदुरई
  4. महाबलीपुरम्
  5. पक्षीतीर्थ
  6. श्रीरंगम्
  7. कुंभकोणम्
  8. तंजावूर
  9. कन्याकुमारी
  10. पुदुच्चेरी

चेन्नई

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नम्मा यहाँ की अधिष्ठात्री देवी है, प्रमुख बंदरगाह, महर्षि अगस्त्य की कर्मभूमि।

रामेश्वरम्

भगवान् श्रीराम के द्वारा स्थापित शिवलिंग (ज्योतिर्लिंग), गंगोत्री का गंगाजल यहाँ समर्पित किया जाता है, यहाँ से बाल ले जाकर गंगा को समर्पित की जाती है। प्रत्येक हिन्दू अपने जीवन में एक बार पवित्र रामेश्वरम् दर्शनाभिलाषी रहता है। यह हिन्दुओं के चार धामों में से एक धाम है।

मदुरई

मदुरई – पांड्य राजाओं की राजधानी है। यहाँ मीनाक्षी मंदिर है। योजनाबद्ध बसाया हुआ यह प्राचीन नगर शिक्षा एवं व्यापार का केन्द्र है।

महाबलीपुरम्

महाबलीपुरम् – तमिलनाडु प्रदेश का प्रसिद्ध नगर है। इसका प्राचीन नाम मामल्लपुरम् है। यह एक ऐसा पर्यटन केन्द्र है, जिसमें पल्लव शैली की मूर्तिकला का बाहुल्य है। इनमें महाभारत कालीन कथाओं का अंकन है।

पक्षीतीर्थ

पक्षीतीर्थ – तमिलनाडु के तिरुक्कलुकुरम में स्थित है। यहाँ बाज पक्षी का युगल प्रतिदिन भगवान शिवजी का प्रसाद ग्रहण करने हेतु मध्याह्न में आता है।

श्रीरंगम्

श्रीरंगम् – कावेरी तट पर एक शहर जहाँ भगवान् विष्णु का एक विशाल मंदिर है, जिसमें श्री विष्णु भगवान शयन स्थिति में हैं।

कुंभकोणम्

कुंभकोणम् – धार्मिक तीर्थ स्थल जहाँ 12 वर्ष में एक बार महामखम् नाम से विख्यात धार्मिक मेला लगता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग प्रयागराज में आयोजित कुम्भ की तरह भाग लेते हैं।

तंजावूर

तंजावूर – एक प्राचीन मंदिर है, जिसके उच्च शिखर के ऊपर वाले कलश की छाया कभी भी भूमि पर नहीं पड़ती। यहाँ एक विशाल पुस्तकालय भी है, जिसमें हमारे पूर्वजों द्वारा संचित ज्ञान-विज्ञान के दुर्लभ ग्रन्थ तथा पाण्डुलिपियाँ उपलब्ध हैं।

कन्याकुमारी

कन्याकुमारी – तीन समुद्रों का मिलन, देवी कन्याकुमारी का मंदिर, पार्वती की तपस्थली तथा विवेकानन्द शिला-स्मारक के कारण प्रसिद्ध स्थल।

पुदुच्चेरी

पुदुच्चेरी – केन्द्र शासित प्रदेश, योगिराज अरविन्द की साधना-स्थली तथा शिक्षा-केन्द्र।

तमिलनाडु राज्य का साहित्य (Literature of the state of Tamil Nadu)

तमिल भाषा में भी अनेक प्राचीन ग्रन्थों का निर्माण हुआ। आइए, तमिल साहित्य की कुछ जानकारी प्राप्त करें

  • ‘तोलकप्पियम्’ तमिल व्याकरण ग्रन्थ अति सुविख्यात है। इसके रचयिता “तोलकप्पियन” महर्षि अगस्त्य के शिष्य थे।
  • पंचमहाकाव्यों में शिलप्पाधिकारम् मणिमेखले में बौद्ध मत के तत्त्व और जीवन चिन्तामणि, कुंडलकेशी व वलयापति में जैन मत के तत्त्व प्रतिपादित हैं।
  • तमिल लिपियाँ- वट्ट एलत्तु गोल अक्षरों में लिखी जाने वाली, वे? एकत्तु-ग्रन्थम् लिपि – संस्कृत लिखने हेतु।
  • महाकवि कम्ब ने रामायण की रचना की जिसमें छ: काण्ड हैं और जिसका उत्तरकाण्ड ओटुक्कूत्तन ने पूर्ण किया।
  • सुब्रह्मण्यम भारती राष्ट्रीय कवि थे, जिनका ‘पांचाली शपथम्’ राष्ट्रीय गीत अक्षय निधि है।
  •  तिरुवल्लुवर ने तमिल वेद तिरुक्कुरल की रचना की

तमिलनाडु के महान व्यक्ति (Great people of Tamil Nadu)

  • डा. चन्द्रशेखर व्यंकट रामन
  • गणिताचार्य श्रीनिवास रामानुजम्
  • रामानुजाचार्य
  • चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

डा. चन्द्रशेखर व्यंकट रामन (Dr. Chandrashekhar Venkat Raman)

डा. चन्द्रशेखर व्यंकट रामन- जन्म 7 नवम्बर, 1888 तिरुच्चिरापल्ली. स्वर्गवास 21 नवम्बर, 1970 बेंगलुरु। 12 वर्ष की आयु में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। 1909 में प्रकाश विवर्तन’ पर शोध पत्र। 1924 में लन्दन रायल सोसायटी के सदस्य। 16 मार्च, 1928 को प्रतिपादित ‘रामन प्रभाव’ की सहायता से दस वर्षों में 2000 से अधिक पदार्थों की संरचना ज्ञात की। लेसर का आविष्कार भी इस कारण हुआ। 1930 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया। 1943 में बंगलौर में रमन रिसर्च इन्स्टीट्यूट की स्थापना की, जहाँ वे आजीवन अनुसंधान करते रहे। इन्होंने चुम्बकत्व सम्बन्धी और संगीत वाद्य यंत्रों के क्षेत्र में अनेक अनुसंधान किये। उनका संदेश था- अनुसंधान कार्यों में उपकरणों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण स्वतंत्र विचार और कठिन परिश्रम है।

गणिताचार्य श्रीनिवास रामानुजम् (Ganitacharya Srinivasa Ramanujam)

गणिताचार्य श्रीनिवास रामानुजम् – विश्वविख्यात गणितज्ञ, लन्दन रायल सोसायटी के सदस्य। इन्हें ट्रिनिटी फेलोशिप मिली। दसवीं उत्तीर्ण करने के अनन्तर कोई विश्वविद्यालयीय परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना गणित की सर्वोच्च उपाधियाँ डी मैथ, रैंगलर मैथेमेटिक्स, ट्राइपौस अर्जित की। ऐसी तीनों उपाधियाँ प्राप्त करने वाले ये प्रथम विद्वान हैं। ये संख्या सिद्धांत के जन्मदाता हैं।

रामानुजाचार्य (Ramanujacharya)

रामानुजाचार्य – वैष्णव सम्प्रदाय के आचार्य एवं विशिष्ट अद्वैतवाद के प्रतिपादक तथा महामंत्र को सार्वजनिक बनाने वाल|

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (Chakravarti Rajagopalachari)

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी – साहित्यकार, राजनीतिज्ञ एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम और अन्तिम भारतीय गवर्नर जनरल।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan)

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् – विश्वविख्यात दार्शनिक, शिक्षाशास्त्री एवं भारत के द्वितीय राष्ट्रपति। इनका जन्मदिन 5 सितम्बर ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *