सर छोटू राम

‘रहबर-ए-आजम’ सर छोटू राम-‘रहबर-ए-आजम’ चौ. छोटूराम जी का जन्म 24 नवंबर, 1881 को गढ़ी सांपला (जिला रोहतक) में चौधरी सुखीराम जी के घर में हुआ था। इनका बचपन का नाम रूप रिछपाल था। परन्तु, परिवार में सबसे छोटे होने के कारण इन्हें ‘छोटू’ कहा जाने लगा। स्कूल में भी इनका नाम ‘छोटूराम’ ही रखा गया। इनका परिवार बेहद साधारण किसान परिवार था। चौ. छोटूराम जी ने किसान-मजदूर की समस्याओं को बचपन में स्वयं झेला था। रहबर-ए-आजम सर छोटू राम 1911 ई. में आगरा से कानून की पढ़ाई पूरी करके वकालत के पेशे से जुड़ गए। वकालत के दौरान भी चौधरी साहब हमेशा दीन-दरिद्र के हित के लिए खड़े रहते थे। 1912 ई. में इन्होंने ‘जाट सभा’ का गठन किया। चौधरी साहब की वैदिक धर्म तथा आर्य समाज में गहरी आस्था थी। इस वक्त तक आते-आते उनके मन में छिपा महामानव जागृत हो चुका था। ‘दीनबन्धु’ चौ. छोटूराम शिक्षा का महत्त्व समझते थे। यही कारण था कि उनके प्रयासों से ग्रामीण युवकों की शिक्षा के लिए अनेक शिक्षण संस्थानों की स्थापना हुई। चौ. छोटूराम जी के पावन प्रयासों से 7 सितंबर, 1913 को रोहतक में जाट स्कूल की स्थापना हुई।

1915 ई. में चौधरी छोटूराम जी ने रोहतक से ‘जाट गजट’ नाम से एक समाचार-पत्र का प्रकाशन आरंभ किया। यह हरियाणा का सबसे प्राचीन अखबार है जो आज भी छपता है। इस पत्र के माध्यम से उनके क्रान्तिकारी विचार जन-जन तक पहुँचते थे। 1916 ई. में रोहतक में कांग्रेस कमेटी का गठन होने के साथ ही वह रोहतक कांग्रेस कमेटी के प्रधान बने। 1920 ई. में कांग्रेस की रणनीति से असहमति जताते हुए असहयोग आंदोलन के दौरान चौधरी छोटू राम जी ने कांग्रेस छोड़ दी। वह आजादी की लड़ाई को वैधानिक तरीकों से लड़े जाने के पक्षधर थे। 1934 ई. में चौधरी साहब ने राजस्थान के सीकर शहर में किराया कानून के विरुद्ध एक विशाल रैली का आयोजन किया।

पंजाब में मोन्टफोर्ड सुधार लागू को जाने के पश्चात् सर फजले हुसैन ने खेतिहर किसानों का एक राजनैतिक दल ‘जमींदारा पार्टी’ के नाम से खड़ा किया। चौधरी साहब ने सिकन्दर हयात खान के साथ मिलकर ‘यूनियनिस्ट पार्टी’ का गठन किया तथा सर फजले हुसैन के साथ गठबंधन कर लिया। यूनियनिस्ट पार्टी का किसान-मजदूर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जबरदस्त प्रभाव था। 1923 ई. के केन्द्रीय विधान परिषद् तथा पंजाब विधान हुए विधान परिषद चुनावों में उनकी पार्टी को जबरदस्त सफलता मिली। भारत सरकार अधिनियम, 1935 के प्रावधानों के अनुसार 1937 ई. में संपन्न हुए विधान परिषद् चुनावों में यूनियनिस्ट पार्टी को पंजाब में 175 सीटों 99 सीटें मिली। 1937 में सिकन्दर हयात खान पंजाब प्रान्त के प्रथम प्रधानमंत्री बने तथा चौधरी छोटू राम ने इस सरकार में विकास एवं राजस्व मंत्री का दायित्व संभाला। उनके प्रयासों से अनेकों जन-कल्याणकारी कानून बने। जिनमें प्रमुख हैं –

  • साहूकार पंजीकरण अधिनियम, 19381
  • गिरवी जमीनों की मुफ्त वापसी अधिनियम, 1938
  • कृषि उत्पाद मण्डी अधिनियम, 1938
  • कर्जा माफी अधिनियम, 1934
  • व्यवसाय श्रमिक अधिनियम, 1940

इनके अलावा भाखड़ा बाँध का प्रस्ताव भी चौधरी साहब द्वारा ही दिया गया था। 9 जून, 1945 को यह युगपुरुष ब्रह्मलीन हो गए। वर्ष 2013 में चौधरी छोटू राम जी के पैतृक गांव गढ़ी-सांपला में हरियाणा सरकार द्वारा उनका स्मारक तथा एक संग्रहालय बनाया गया। 9 अक्तूबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा यहां पर चौधरी साहब की एक 64 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया गया।

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