श्री बाबा मस्तनाथ

नाथ पंथ के पूर्णसिद्ध, परम श्रद्धेय श्री बाबा मस्तनाथ जी का डेरा रोहतक जिले के अस्थल बोहर में है। बाबा जी को स्वयं गोरखनाथ जी का अवतार माना जाता है। इनके जन्म के विषय में भी अनेकों जनश्रुतियाँ हैं। ऐसी मान्यता है कि कसरैटी (रोहतक) गाँव में सबला नाम के एक भगवद्भक्त निवास करते थे। उनका संबंध रहबारी (ऊँट पालने वाले) जाति से था। सबला जी नि:संतान थे। 1707 ई. में श्री सबला सपत्नीक कसरैटी गाँव के निकट जंगल से गुजर रहे थे। गहन वन में एक वट वृक्ष के निकट उन्हें एक दिव्य बालक मिला। यही दिव्य बालक कालान्तर में श्री बाबा मस्तनाथ के रूप में प्रसिद्ध हुए। वह बचपन से ही चमत्कारी बताए जाते हैं। उनके चमत्कार को देखकर श्री सबला ने उन्हें एक ‘दर्शनी योगी’ को दे दिया। यहाँ से वह मस्तनाथ कहलाए। कुछ समय बाद मस्तनाथ जी अस्थल बोहर आ गए तथा यहाँ पर 8वीं सदी के बाबा चौरंगी नाथ जी के ध्वस्त हो चुके डेरे को पुनः बसाया तथा यहाँ पर वर्षों तक तपस्या की। लगभग 100 वर्ष की आयु में बाबा जी ने समाधि ले ली।

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