शेरशाह सूरी

अफगान शासक शेरशाह सूरी का हरियाणा से गहरा संबंध था। इसका दादा इब्राहिम सरी पेशावर के निकट के किसी गाँव का रहने वाला था। पेशावर से वह हिसार के जागीरदार के यहाँ सेवादार हो गया। उसकी सेवा से प्रसन्न होकर हिसार के जागीरदार ने इब्राहिम सूरी को नारनौल के परगने में एक छोटी-सी जागीर दे दी। 1486 ई. में इब्राहिम सूरी के पुत्र हसन के घर में नारनौल में शेरशाह का जन्म हुआ। उसका बचपन का नाम फरीद था। वह एक काबिल व्यक्ति था। अपनी असाधारण प्रतिभा के बल पर शेरशाह सूरी बिहार का शासक बन गया। 1540 ई. में उसने हुमायूँ को हराकर दिल्ली तथा हरियाणा के क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। अपने 5 वर्ष के शासनकाल में शेरशाह ने जनहित के अनेक कार्य किए। उसने भूमि-प्रबंधन तथा कर व्यवस्था में सुधार के लिए विशेष प्रयास किए। 1545 ई. में कालिंजर के स्थान पर वह मृत्यु को प्राप्त हुआ। शेरशाह सूरी ने नारनौल में अपने दादा इब्राहिम सूरी का भव्य मकबरा बनवाया था।

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