शहजादा मुहम्मद आजिम बेग

शहजादा आजिम बेग का संबंध शाही घराने से था। 1857 की क्रान्ति के समय वह भटू के सहायक कस्टम अधिकारी थे। हिसार में क्रान्तिकारियों का पथ प्रदर्शन शहजादा बेग ने ही किया था। वह एक वीर तथा ऊँचे चरित्र का व्यक्ति था। 17 जुलाई, 1857 को अंग्रेज जनरल वान कोर्टलैंड ने हिसार में खूब तबाही मचाई। उसने शहजादा आजिम बेग का घर जला दिया तथा उनकी बेगम को बंदी बना लिया। परन्तु, इससे मुहम्मद आजिम बेग तिल भर भी विचलित नहीं हुआ। सैनिकों को इकट्ठा करके उसने हांसी में अंग्रेजों को मात दी। परन्तु वान कोर्टलैंड ने शीघ्र ही पुनः हांसी पर आक्रमण किया और बेग को हरा दिया। शहजादा आजिम बेग ने फिर भी साहस नहीं छोड़ा। उसने क्रान्तिकारियों को संगठित करके जमालपुर के स्थान पर पुनः युद्ध किया। परन्तु, जब यहाँ भी क्रान्तिकारियों को हार का सामना करना पड़ा तो उन्होंने हिसार छोड़ दिया। 16 नवंबर, 1857 को उन्होंने राव तुलाराम तथा जनरल समद खां के साथ मिलकर नारनौल के निकट नसीबपुर में युद्ध किया जहाँ उनके पुत्र ने अपनी शहादत दी।

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