रेवाड़ी शहर

Rewari City

हरियाणा प्रान्त की दक्षिणी सीमा पर स्थित रेवाड़ी जिला इस प्रदेश का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जिला है। महाभारतकाल में इस क्षेत्र में राजा रेवत शासन करते थे। उनकी पुत्री का नाम रेवती था जिसे वह प्यार से ‘रेवा’ कहते थे। ऐसी मान्यता है कि महाभारत काल में राजा रेवत ने यह शहर बसाया तथा अपनी पुत्री रेवती के नाम पर इसका नामकरण ‘रेवा-वाड़ी’ कर दिया। बाद में राजा रेवत ने रेवती का विवाह कृष्ण के बड़े भ्राता बलराम से कर दिया तथा रेवा वाड़ी’ का क्षेत्र उन्हें दहेज के रूप में दे दिया।

rewari district city map image

रेवाड़ी जिले की स्थापना एवं परिचय

1857 के स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी राव तुलाराम की कर्मभूमि तथा जन्मभूमि रहा रेवाड़ी जिला देश के इतिहास में एक अहम स्थान रखता है। 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के उपरान्त 1861 ई. में गुड़गाँव जिले को पुनर्गठित करके इसे पाँच तहसीलों में बाँटा गया। इनमें से रेवाड़ी भी एक था। 1861 से लेकर 1947 तक गुड़गाँव जिले की संरचना में अनेक परिवर्तन आते रहे परन्तु रेवाड़ी का क्षेत्र इसी जिले का भाग बना रहा। आजादी से पूर्व बावल का क्षेत्र नाभा रियासत के अधीन था। _1948 में महेन्द्रगढ़, दादरी तथा बावल का क्षेत्र मिलाकर महेन्द्रगढ़ के रूप में एक नया जिला अस्तित्व में आया। वर्ष 1956 में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 61 गाँवों को छोड़कर शेष रेवाड़ी तहसील को गुड़गाँव से पृथक करके महेन्द्रगढ़ जिले में मिला दिया गया।

1 नवंबर, 1989 को महेन्द्रगढ़ जिले से रेवाड़ी तथा बावल का क्षेत्र और तत्कालीन रोहतक जिले से कोसली का क्षेत्र अलग करके रेवाड़ी के रूप में एक नया जिला बनाया गया। जिले का जिला मुख्यालय रेवाड़ी शहर में है।

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