वैयक्तिक विभिन्नता के कारण

Reason for personal variation

मनोवैज्ञानिकों ने वैयक्तिक विभिन्नताओं के निम्नलिखित कारण बताए हैं

वंशानुक्रम के कारण वैयक्तिक विभिन्नता (Individual variation due to inheritance)

व्यक्तिगत विभिन्नताओं का एक महत्त्वपूर्ण कारण वंशानुक्रम को माना जाता है। इसके कारण व्यक्ति का मानसिक विकास (बुद्धि, चिन्तन, दृष्टिकोण, व्यवहार, संकीर्ण सोच) एवं शारीरिक विकास (लम्बाई, शरीर का रंग) में अन्तर पाया जाता है।

वातावरण या परिवेश के कारण वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation due to environment or surroundings)

वातावरण के कारकों के द्वारा भी बालकों में अन्तर पाया जाता है। कहा जाता है, जिस प्रकार का पारिवारिक या सामाजिक वातावरण होगा, बालकों के व्यक्तित्व का विकास भी वैसा ही होगा। वातावरण के माध्यम से ही बालकों का सामाजिक, मानसिक, सांस्कृतिक, प्रगतिशील सोच इत्यादि विकसित होती है। वंशानुक्रम एवं वातावरण दोनों वैयक्तिक विभिन्नताओं को प्रभावित करते हैं। बालक पर सभी प्रकार के वातावरणों का सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव पड़ता है चाहे वह सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक वातावरण क्यों न हो।

आयु एवं बुद्धि के कारण वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation due to age and intelligence)

बालक की आयु में वृद्धि होने के साथ-साथ उसका शारीरिक, मानसिक तथा संवेगात्मक विकास भी होता रहता है। इसी विकास के कारण उनमें व्यक्तिगत विभिन्नता आती रहती है। इसीलिए विभिन्न आयु के बालकों में अन्तर दिखाई देता है। इसी प्रकार बुद्धि के कारण भी बालकों में अन्तर होता है। कुछ बालक तीव्र बुद्धि के होते हैं, कुछ सामान्य बुद्धि के और कुछ मन्द बुद्धि के अर्थात् सभी बालक समान बुद्धि के नहीं होते हैं। आयु में वृद्धि से बालक की रुचि तथा बुद्धि के अन्तर से बालक की शैक्षिक प्रगति में अन्तर देखने को मिलता है। उदाहरणस्वरूप-किसी की बुद्धि-लब्धि 71 से कम तो किसी की 140 से अधिक।

परिपक्वता के कारण वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation due to maturity)

परिपक्वता एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति किसी कार्य के करने में स्वयं को सक्षम पाता है। सीखने का आधार भी परिपक्वता ही है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, “एक बालक तब तक नहीं सीख सकता जब तक वह सीखने के लिए तैयार न हो अथवा परिपक्व न हो।” लेकिन बालक जन्म के समय पूर्ण परिपक्व नहीं होता। परिपक्वता किशोरावस्था में आती है। यह परिपक्वता कुछ बालकों में जल्दी आ जाती है तथा कुछ में देर में आती है।

लैंगिक विभिन्नताएँ के कारण वैयक्तिक विभिन्नता(Individual variation due to gender differences)

लैंगिक विभिन्नता के कारण भी व्यक्तिगत विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। लड़कियों का शारीरिक व मानसिक विकास लड़कों की अपेक्षा पहले होता है। शारीरिक संरचना के आधार पर भी लड़के एवं लड़कियों में अन्तर पाया जाता है।

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