राव तुलाराम

1857 की क्रान्ति के वीर राव तुलाराम का जन्म 9 दिसंबर, 1825 ई. को रेवाड़ी नरेश राव पूरन सिंह के घर में हुआ था। 1838 ई. में उन्होंने रेवाड़ी (मुख्यालय- रामपुरा) रियासत का शासन संभाला। राव साहब अंग्रेजों से नफरत करते थे। 1857 की क्रान्ति के दौरान राव तुलाराम ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित करते हुए ‘राजा’ की उपाधि धारण की। राव साहब के नेतृत्व में लोगों ने रेवाड़ी से अंग्रेजों के सभी चिह्न नष्ट कर दिए। बादशाह बहादुरशाह ने उनके संघर्ष का सम्मान करते हुए राव तुलाराम को रेवाड़ी-शाहजहाँपुर-भोड़ा के क्षेत्र के 421 गाँवों का शासक घोषित कर दिया। उन्होंने क्रान्तिकारियों की सहायता हेतु रेवाड़ी राज्य की ओर से 45,000 रु. की राशि, बारूद बनाने के लिए गंधक तथा 43 गाड़ी अनाज भिजवाया। वह बेहद चतुर होने के साथ-साथ वीर-योद्धा भी थे। जब उन्हें प्रतीत हुआ कि रामपुरा के कच्चे किले में अंग्रेजों से लड़ना कठिन है तो उन्होंने रेवाड़ी छोड़ दी। 16 नवंबर, 1857 को राव तुलाराम ने हिसार के क्रान्तिकारियों के नेता शहजादा आज़िम बेग तथा जनरल समद खां के साथ मिलकर नारनौल के निकट नसीबपुर में अंग्रेजों से युद्ध किया। इस युद्ध में अंग्रेजों का पलड़ा भारी रहा। राव तुलाराम यहाँ से भी बचकर निकल गए तथा राजस्थान होते हुए मध्य प्रदेश में तात्या टोपे के साथ मिलकर संघर्ष किया। इसके पश्चात् वह काबुल चले गए जहाँ 23 सितंबर, 1863 को 38 वर्ष की आयु में उनका देहान्त हो गया।

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