राव बालकिशन

हुमायुं के शासनकाल में गढ़ी बोलनी (रेवाड़ी के निकट) एक प्रमुख सैन्य ठिकाना था। औरंगजेब के शासनकाल में रेवाड़ी के अहीर सरदार राव नंदराम ने रेवाड़ी रियासत की ताकत को और बढ़ा दिया। राव नंदराम की मृत्यु के उपरान्त उनके ज्येष्ठ पुत्र राव बालकिशन ने रेवाड़ी की बागडोर संभाली। राव बालकिशन को बादशाह औरंगजेब से दो हजारी मनसब प्राप्त थी। बादशाह बहादुरशाह के शासनकाल में उनके सम्मान में और वृद्धि हुई। 1739 ई. में जब नादिरशाह ने आक्रमण किया तो बादशाह मुहम्मदशाह ने नादिरशाह के साथ करनाल में युद्ध किया। करनाल के युद्ध में मुहम्मदशाह की ओर लड़ते हुए राव बालकिशन ने अपने 5000 सैनिकों के साथ कुर्बानी दी। राव बालकिशन की वीरता की प्रशंसा खुद नादिरशाह ने भी की थी।

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