राय बहादुर मुरलीधर

राय बहादुर लाला मुरलीधर का जन्म 1848 ई. में पलवल में हुआ था। एल.एल.बी. की उपाधि लेने के उपरान्त उन्होंने अंबाला में वकालत आरंभ कर दी। वह अंबाला में आर्य समाज के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। लाला मुरलीधर जी के प्रयत्नों से 1886 ई. में अंबाला में कांग्रेस की शाखा स्थापित हुई। यह शाखा उत्तर-पश्चिमी भारत में कांग्रेस की प्रथम शाखा थी। हरियाणा में कांग्रेस की नींव रखने में रायबहादुर मुरलीधर का अद्वितीय योगदान था। बंग-भंग आन्दोलन को सफल बनाने के लिए राय साहब ने जमीन-आसमान एक कर दिया था। उन्होंने स्वदेशी आन्दोलन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए खूब प्रयत्न किए। 22 अक्तूबर, 1920 को बाबू मुरलीधर की अध्यक्षता में ‘अंबाला डिविजनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस’ का आयोजन किया गया जिसे माँधी जी ने संबोधित किया था। अहसयोग आन्दोलन के दौरान लाला मुरलीधर ने अपना ‘रायबहादुर’ का खिताब अंग्रेजों को लौटा दिया। 15 फरवरी, 1921 को गाँधी जी ने पुनः भिवानी में एक जनसभा को संबोधित किया। इस सभा की अध्यक्षता भी लाला मुरलीधर ने की थी। असहयोग आंदोलन के दौरान लाला मुरलीधर की गतिविधियों से नाराज होकर अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 3 अप्रैल, 1922 को उनका देहान्त हो गया। वह ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ पंजाब’ के नाम से प्रसिद्ध थे।

राय बहादुर लाला मुरलीधर द्वारा विशेष योगदान व उपलब्धियां

  • लाला मुरलीधर जिन्हे “ग्रैण्ड ओल्ड मैन ऑफ पंजाब” (Grand Old Man of Punjab) के नाम से भी जाना जाता है |
  • आर्य समाज की स्थापना में सहयोग |
  • उत्तर-पश्चिमी भारत में 1886 ई. में अंबाला में कांग्रेस की प्रथम शाखा स्थापना में प्रमुख योगदान |
  • बंग-भंग आन्दोलन, अहसयोग आन्दोलन तथा स्वदेशी आन्दोलन में विशेष भूमिका |
  • अंबाला डिविजनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस का आयोजन |
  • “सर ” व “राय बहादुर ” की उपलब्धियां जिसे बाद में (13 अप्रैल 1919 को जलियावाला बाग हत्याकांड के कारण) अंग्रेजी सरकार को वापिस वापिस लौटाया |
  • गाँधी जी द्वारा चलाये गए सभी आंदोलन में विशेष योगदान |

 

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