हरियाणा प्रदेश का गद्य साहित्य

संस्कत भाषा संगीत तथा संस्कृति की भाषा है। यही कारण है कि संस्कत भाषा में गद्य की तलना में पद्य रचना पर आधक काम हुआ है। यह बात हरियाणा के संस्कत साहित्य पर भी लाग होती है। परन्त इसका अर्थ यह नहीं है कि हरियाणा के साहित्यकारों का गद्य क क्षत्रम योगदान कम है। हरियाणा के साहित्यकारों के गद्य के क्षेत्र में योगदान का संक्षिप्त विवरण यहां प्रस्तुत किया गया है।

हरियाणा प्रदेश के गद्य साहित्य का संस्कृत निबंध(Sanskrit essay of prose literature of haryana pradesh)

अंबाला के साहित्यकार डॉ विद्याधर धस्माना ने “निबंध सप्तकम’ नामक निबंध संग्रह की रचना की है। संस्कृत भाषा म लिाखत इस समय संग्रह में डॉ. विद्याधर धस्माना के सात निबंधों का संकलन किया गया है।

रोहतक निवासी डॉ. मदनलाल शर्मा ने “विचारवीथी’ के नाम से निबंध संग्रह की रचना की है। इस पुस्तक में प्राचान तथा नवान विषया से संबंधित कुल 16 निबंधों का संकलन किया गया है।

वैद्य शंकरलाल शर्मा ने ‘मदीया कर्मभूमि’ के नाम से निबंध संग्रह लिखा है। यह चौदह निबंधों का सारगर्भित संकलन है जिसमें लेखक ने आयुर्वेद तथा अपने शास्त्र ज्ञान का भरपूर प्रयोग किया है।

भिवानी निवासी रामदत्त शर्मा ने लगभग 30 निबंधों की रचना की है। विभिन्न विषयों पर लिखे गए ये सभी निबंध संस्कृत म लिख गए हा.

इसके अलावा प्रदेश के संस्कृत निबंधकारों में डॉ. वेद प्रकाश वेदालंकार, डॉ. राम गोपाल, डॉ. भीम सिंह वेदालंकार, डा. रघुनाम एरा तथा जयदेव आर्य प्रमुख हैं। डॉ. महेशचन्द्र शर्मा ने भी ‘श्री हर्षदेवस्थ नाटकेषु नारी’ नामक निबंध संग्रह की रचना की है।

हरियाणा प्रदेश का गद्य  जीवन चरित(Prose life report of haryana pradesh)

संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान पं. माधवाचार्य ने ‘कथाशतकम’ की रचना की है। पं. माधवाचार्य ने कथाशतकम में धन्ना भक्त, रदास, मारा आदि भक्तों के जीवन से संबंधित सौ कथाओं की सरल भाषा में गद्य रूप में रचना की है। आचार्य विद्यानिधि ने ‘श्री दयानदर्षि चारतम् क नाम से गद्य रचना की है। आचार्य विद्यानिधि जी ने इस ग्रन्थ में महर्षि दयानन्द के जीवन चरित को कलमबद्ध किया है। उनकी यह रचना व्यानद चन्द्रोदय’ के नाम से भी विदित है। – इसी श्रृंखला में पं. माधवाचार्य ने ‘कबीर चरितम्’, भिक्षाराम शास्त्री ने ‘गांधी चरितम्’ तथा पं. हजारी लाल शास्त्री ने ‘मह दयानन्द प्रशस्ति शतकम्’ की रचना की है।

हरियाणा प्रदेश का गद्य रूपक(Prose metaphor of haryana pradesh)

पं. छज्जूराम विद्यासागर ने ‘दुर्गाभ्युदय नाटकम्’ की रचना की थी। इस नाटक के कुल सात अंक हैं। सभी नाटकों की कथा पौराणिक तथा धार्मिक है। “शिव समाधिरूपम्’ प्रो. सत्यदेव द्वारा रचित एक प्रसिद्ध नाटक है। इस नाटक में कुल चार अंक तथा सोलह दृश्य हैं। यह एक साहित्यिक रचना है। इसके अलावा हर्षदर्शनम्: डॉ. बलदेव सिंह, पांचजन्यम्: डॉ विद्याधर यस्माना, वयं के स्मः डॉ. सुधीकान्त भारद्वाज, पेटिका रहस्यमः डॉ. रामदत्त शर्मा तथा पतिपरायण : डॉ. नौबतराम भारद्वाज द्वारा रचित प्रमुख रूपक (नाटक) संग्रह हैं। डॉ. मथुरादत्त पाण्डेय को “एकांकी पंचदशी’ नामक उनके संस्कृत एकांकी संग्रह के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया

 

हरियाणा के उपन्यास तथा भाषा साहित्य (Haryana’s novels and language literature)

 

 

पं. स्थानदत्त शर्मा ने हरियाणा की भाषा, पं. विद्याधर शास्त्री ने वेद विषयक साहित्य, शिवनारायण शास्त्री ने दर्शन तथा व्याकरण संबंधित साहित्य, डॉ. रामगोपाल ने वैदिक भाषा तथा व्याकरण से संबंधित साहित्य की रचना की थी।

यही नहीं हरियाणा के साहित्यकारों ने संस्कृत भाषा में उपन्यास भी लिखे हैं। इनमें धौलेड़ा निवासी वैद्य शंकर लाल का नाम प्रमखता से लिया जा सकता है। वैद्य शंकरलाल जी द्वारा लिखित उपन्यास ‘शशिप्रभा’ का प्रकाशन सन् 1985 में हुआ था।

हरियाणा के प्रसिद्ध साहित्यकार(Famous litterateur of Haryana)

 

  • राजाराम शास्त्री-पं. राजाराम शास्त्री अपने समय में अनेक शास्त्रों के अति मर्मज्ञ तथा टीकाकार के रूप में सुप्रसिद्ध विद्वान माने गये हैं। इन्होंने हिन्दी भाषा में भी अनेक पद्य लिखे।

हरियाणा के प्रसिद्ध साहित्यकार संत गरीबदास(Famous litterateur of Haryana Sant Garibdas)

गरीबदास का जन्म 1717 ई. में बैशाख पूर्णिमा के दिन करौंथा निवासी बलराम धनखड के घर में हुआ था। इनके पिता अपना गाँव छोड़कर झज्जर जिले के छुड़ानी गाँव में आकर बस गए थे। गरीबदास जी को बचपन से ही वैराग्य हो गया था। गरीबदास जी कबीरदास के अनन्य भक्त थे। भक्ति साहित्य का इनका विशाल संग्रह ‘गरीबग्रन्थ’ के नाम से प्रसिद्ध है। इसे ‘रल सागर’ भी कहते हैं। इन्होंने लगभग 24,000 दोहों की रचना की थी। संत गरीबदास को हरियाणा का निर्गणधारा का सर्वप्रथम संत कवि माना जाता है।

  • संत नितानंद-स्वामी नितानंद एक उच्च कोटि के संत थे। उन्होंने अपनी शिक्षाओं को ‘सत्य सिद्धान्त प्रकाश’ नामक ग्रन्थ में संकलित किया है। इस ग्रन्थ के अलावा उन्होंने ‘नितानंद के भजन’ नामक ग्रन्थ तथा ‘बारहखड़ी’ नामक लघु ग्रन्थ की रचना भी की थी।

हरियाणा के प्रसिद्ध साहित्यकार बाबू बालमुकुन्द गुप्त(Famous litterateur of Haryana Babu Balmukund Gupta)

बाबू बालमुकन्द गुप्त का जन्म हरियाणा के वर्तमान रेवाडी जिले के गुडियाणी गाँव में 14 नवंबर, 1865 को हुआ था। गुप्त जी की रचनाएँ लखनऊ के ‘अवध पंच’, लाहौर के ‘कोहेनर’ तथा मुरादाबाद के ‘रहबर’ आदि पत्रों में अकाल हाता था। इन्होंने उर्दू भाषा के पत्रों ‘अखबारे चनार’ तथा ‘कोहेनर’ आदि का संपादन किया। बालमकन्द गप्त ने ‘भारत मित्र’ नामक पत्र का संपादन भी किया। बाबू बालमुकुन्द गुप्त की रचनाओं में ‘गुप्त निबंधावली’, ‘हरिदास’, ‘खिलौना’, ‘खेल तमाशा’ तथा ‘सर्पाघात चिकित्सा’ आदि प्रमुख हैं। 18 सितंबर, 1907 में इनका देहान्त हआ। हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा भी ‘बाबू बालमुकुन्द गुप्त ग्रन्थावली’ का संपादन किया गया है। हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा इनकी स्मति में ‘बाबू बालमुकुंद गुप्त पुरस्कार’ आरंभ किया गया है।

  • पं. माधव प्रसाद मिश्र-इनका जन्म संवत् 1928 में गाँव कंगड जिला भिवानी में हुआ। मिश्र जी एक प्रबुद्ध पत्रकार तथा सशक्त साहित्यकार थे। इन्हें काव्य, कहानी, नाटक तथा जीवनियाँ लिखने में महारत हासिल थी। इनका संपूर्ण साहित्य माधव मिश्र ग्रन्थावली एवं माधव मिश्र नियमावली में उपलब्ध है। 16 अप्रैल, 1907 को मिश्र जी का देहावसान हो गया। पं. माधव प्रसाद मिश्र जी के सम्मान में हरियाणा साहित्य अकादमी ने हरियाणा साहित्य रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर पं. माधव प्रसाद मिश्र सम्मान किया है।

हरियाणा प्रदेश का उर्दू साहित्य(Haryana State Urdu Literature)

भाषा का संबंध किसी संप्रदाय विशेष से नहीं होता। श्री राजनाथ शर्मा हिन्दी और उर्द को अलग-अलग भाषाएँ नहीं मानते। उनके अनुसार हिन्दी

और उर्दू दो भिन्न भाषाएँ नहीं वरन् एक ही भाषा (हिन्दी) की दो भिन्न शैलियाँ हैं। हरियाणा प्रदेश तो अपने आप में ही सांप्रदायिक सौहार्द का पर्याय है। हरियाणा में उर्दू भाषा तथा इसके साहित्य का शानदार इतिहास रहा है।

प्रसिद्ध उर्दू शायर मौलाना हाली और उनके परिवार के सदस्यों ख्वाजा अहमद अब्बास, सालिका आबिद हुसैन बेगम, मुमताज मिर्जा तथा जाहिदा जैदा का प्रदेश में उर्दू साहित्य को समृद्ध करने में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। ___ ख्वाजा अहमद अब्बास का जन्म तथा पालन-पोषण पानीपत में हुआ था। इनकी रचनाओं में अबाबील, एक लड़की, मुसाफिर की डायरी, मैं कौन हूँ, पाँवों में फूल आदि प्रमुख हैं। इनकी रचनाएँ भारत ही नहीं विदेशों में भी खासी लोकप्रिय हुई। ख्वाजा साहब का पत्रकारिता तथा फिल्म जगत में भी उल्लेखनीय योगदान था। फिल्मों में योगदान के लिए अहमद अब्बास को राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

टोहाना निवासी नौबहार साबिर भी प्रदेश के प्रमुख उर्दू सहित्यकारों में गिने जाते हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ राजकुमारी, ललिता, पैयाम-ए-बेदारी, कृष्ण दर्शन, कारवां ख्यालों के, लहू तरंग आदि हैं। नौबहार साबिर को 1970-71 में हरियाणा सरकार द्वारा सम्मानित किया गया।

उर्दू शायरी में भी हरियाणवी शायरों ने अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज करवाई है। उर्दू शायर जैमिनी सरशार को देश के प्रमुख शायरों में गिना जाता है। इनकी रचनाओं में जज्बात-ए-सरशार, नगमात-ए-सरशार, निगारशात-ए-सरशार, तुसर्रात-ए-सरशार आदि प्रमुख हैं। जैमिनी सरशार को 1971-72 तथा 1973-74 में हरियाणा सरकार द्वारा सम्मानित किया गया। –

जब उर्दू शायरी की बात हो रही हो तो शिव प्रसाद जावेद का जिक्र आवश्यक हो जाता है। इनकी रचनाओं ‘शोला-ए-तिश्नगी’, ‘गज़ल-ए-राना’, ‘रूप-रस’ आदि का उर्दू साहित्य के क्षेत्र में एक ऊँचा स्थान है। 

हरियाणा के कुछ प्रमुख उर्दू साहित्यकार तथा उनकी रचनाएँ(Some of the prominent Urdu litterateurs of Haryana and their compositions)

 

        रचना                                             साहित्यकार 

  • फूल और काँटे                                            उत्तमचन्द शरद 
  • आंसू-आसू, गीत वतन के,                      विमल कुमार ‘अश्क’ 

          दुख के फूल, आइना और परछाई      

  • कतरा-कतरा                                               बलबीर सिंह राठी 
  • दास्ताने मजदूर                                            भगीरथ लाल  ‘जख्मी’
  • हर्फ-ए-आखिर                                             महेन्द्र प्रताप ‘चांद’ 
  • झोला-आवाज                                               ज्वाला प्रसाद शाही 
  • राम्जा-ब-गम्जा मनक्कश खण्डर जबीं           प्रो . आर.पी. ‘शोख 

हरियाणा के प्रमुख उर्दू साहित्यकार उत्तमचन्द शरद (Uttamchand Sharad, the leading Urdu litterateur of Haryana)

उत्तम चन्द शरद को उनकी रचनाओं के लिए हाली पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। उर्दू साहित्य में प्रताप सिंह राणा ‘गन्नौरी’ का योगदान भी अद्वितीय है। इन्होंने कालिदास की रचना ‘मेघदूत’ का उर्दू में अनुवाद किया था।

उर्द गजलों के क्षेत्र में प्रो. आर.पी. शोख का योगदान नकारा नहीं जा सकता। प्रो. शोख कुरुक्षेत्र जिले में शाहाबाद के ‘मारकण्डा नेशनल कॉलेज में अंग्रेजी के प्राध्यापक थे। उनकी गज़लें गम्जा-ब-गम्ज़ा’ तथा ‘मुनक्कश खंडहर जबीं’ नामक दो पुस्तकों में संकलित हैं। इनकी रचनाओं का देवनागरी अनुवाद उनके निधन के उपरान्त ‘जिंदगी के शीशे में’ नामक पुस्तक में प्रकाशित हुआ था।

हरियाणा के प्रमुख उर्दू साहित्यकार डॉ. सलतान अंजम(Haryana’s leading Urdu litterateur, Dr. Salatan Anjam)

हरियाणा के विख्यात उर्द संपादक, शायर तथा आलोचक थे। डॉ. सलतान लगभग 35 वर्षों तक हारयाणा सरकार का मासिक उर्द पत्रिका ‘तामिर-ए-हरियाणा’ के संपादक रहे। इन्हें हरियाणा उर्द अकादमी द्वारा ‘ख्वाजा अहमद अब्बास अवाड तथा हारयाणा वक्फ बोर्ड द्वारा ‘हाली अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था। इनकी रचनाओं में ‘डबते मंजर का सफर’, ‘ख्वाहिशें ख्वाब है (कहानिया), ‘सराबें-आरजू (गजल संग्रह)’ आदि प्रमुख हैं। इनके अलावा इन्होंने हरियाणा की हिन्दी कहानियाँ’ नामक पुस्तक भी लिखा।

हरियाणा के एक अन्य उर्दू साहित्यकार श्री कश्मीरी लाल जाकिर हैं। इन्होंने सिन्दर की राख, छठी का दूध, मुझे जान का हक मिल गया, चार मील लंबी सडक, मेरा गाँव मेरी आत्मा है, परणमासी आदि उपन्यासों की रचना की। इनके कहानी संग्रह है-चराग का ला, ‘जाकिर की तीन कहानियाँ’, ‘हम सब साक्षी हैं। श्री कश्मीरी लाल जाकिर चण्डीमढ साहित्य अकादमी के चेयरमन तथा हारयाणा उदू अकादमी के सचिव भी रहे।

हरियाणा प्रदेश में जैन साहित्य(Jain literature in Haryana region)

हरियाणा में जैन साहित्य की परंपरा सदियों परानी है। कछ इतिहासकार पष्पदंत को हरियाणा का आदि जैन कवि मानते है। आचाय चतुरसन के अनसार ये रोहतक क्षेत्र के निवासी थे। पष्पदंत द्वारा रचित चार प्रसिद्ध ग्रन्थ हैं-तिसटठिय महापरिस गुणालकार, णायकुमार चार, जसहर चरिउ तथा कोश ग्रन्थ। एरछ नगर (अग्रोहा) निवासी कवि सधारू भी इसी परंपरा के साहित्यकार रहे है। उनका रचना प्रधुम्न चरित’ जैन साहित्य में विशेष स्थान रखती है।

कवि बचराज ने ‘संतोष जयतिलक’ ‘चेतन पदगल ढाल’ तथा ‘नेमिनाथ बसन्त’ आदि की रचना की। जैन कवि मालदव न वि.स. 1612 (1669 ई.) में ‘भोज प्रबन्ध’ नामक विशाल पद्य ग्रन्थ की रचना की। उनकी अन्य रचनाओं में ‘स्थूल भद्र फागू, दवदत्त चापा। तथा ‘पुरंदर चौपाई’ प्रमुख हैं। .

जैन साहित्यकारों में रूपचन्द पाण्डेय का विशेष स्थान है। इनका जन्म करुक्षेत्र जिले के सलेमपुर नामक गांव में हुआ था। इनका प्रमुख रचनाएँ हैं-परमार्थी शतक, गीत परमार्थी, मंगल गीतं आदि। ‘परमार्थी शतक’ तथा ‘गीत परमार्थी’ आध्यात्मिक गीत है।

जैन साहित्यकार तथा उनकी रचनाएँ(Jain litterateurs and their compositions)

 

जैन साहित्यकार                                        रचनाएँ

  • बनारसीदास                                          अर्ध कथानक, नाम माला 
  • जगतराम (गोहाना निवासी)                    सम्यकल कौमुदी 
  • आनन्द घन                                            आनन्दघन बहोतरी 
  • गोवर्द्धन दास                                          शकुन विचार 
  • विजयानन्द सूरी                                      आत्मबावनी, स्तवनावली 
  • निर्दोष हिसारी                                        मृत्युंजय महावीर 
  • रूपचन्द                                                नेमिनाथ रासां 
  • राजकुमार                                             महावीर चरित 

गीतिकाव्य तथा चरितकाव्य के अलावा जैन साहित्य में नीतिपरक काव्य तथा जैन स्तोत्र भी उपलब्ध हैं।

हरियाणा प्रदेश का सूफी साहित्य(Sufi literature of Haryana state)

हरियाणा में पानीपत, अंबाला, थानेसर, कैथल, नारनौल तथा हांसी सूफी संप्रदाय के मुख्य केन्द्र रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि 12वीं सदी में बाबा फरीद हांसी आए थे। उन्होंने हांसी में शिक्षा तथा साहित्य का केन्द्र स्थापित किया। हांसी के क्षेत्र में ‘फरीदवाणी’ काफी लोकप्रिय थी। हरियाणा के प्रसिद्ध साहित्यकार राजाराम शास्त्री ने भी अपनी रचनाओं में सूफी सन्त स्वैरूशाह द्वारा रचित ‘बारहमासा’ का उल्लेख किया है।

सूफी सन्त शाह गुलाम जीलानी ‘रोहतकी’ ने हरियाणवी भाषा में चौपाइयों की रचना की थी। एक अन्य सूफी कवि शाह महम्मद रमजान ‘शहीद’ ने दर्जनों गद्य और पद्य की रचना की थी। वह ‘हादी-ए-हरियाणा’ के नाम से प्रसिद्ध थे। शाह मुहम्मद रमजान की प्रमख रचनाएँ हैं-अकायदे अजीम, आखिरगत, बुलबुले बागेनबी तथा वसीयतनामा। इनकी रचनाएँ हरियाणा में खासी लोकप्रिय रही हैं। हरियाणा में सफियों के चिश्ती संप्रदाय का विशेष प्रचलन था। सूफी काव्य में भी चिश्ती परंपरा की झलक मिलती है।

हरियाणा प्रदेश में संत साहित्य(Saint literature in haryana pradesh)

हरियाणा गीता की धरती है। श्रीमद्भगवत गीता के बारहवें अध्याय में सन्त के गुणों तथा लक्षणों का उल्लेख किया गया है। गौतम स्मति में भी संतों के गुणों की चर्चा की गई है। डॉ. सूरजभान ने ‘हरियाणा का संत साहित्य’ नामक पुस्तक में सन्तमत का अध्ययन प्रस्तत किया है। इस पुस्तक में उन्होंने संत गरीबदास के गरीब पंथ का विशेष उल्लेख किया है। गरीबदास जी की वाणी का प्रकाशन 1964 में हरिद्वार से ‘ग्रन्थ साहिब’ के रूप में हुआ। गरीबदास के शिष्य और उनके ज्येष्ठ पुत्र जैतराम की वाणी भी ग्रन्थ के रूप में उपलब्ध है।

  • घीसा पंथ-इस पंथ के प्रर्वतक घीसा साहब थे। उनके शिष्यों ने उनकी वाणी को ‘ग्रन्थ साहिब’ में संकलित किया है। घीसा साहब के शिष्यों-महन्त प्रेमदास, श्री राम किशनदास तथा महन्त अचलदास के क्रमशः एक, चौदह तथा सोलह पद उपलब्ध हैं।
  • नितानदी पथ-संत नितानंद, संत गरीबदास के समकालीन थे। इस पंथ के हरियाणा में कई केन्द्र है। श्री  सिद्धान्त प्रकाश’ नामक ग्रन्थ में नितानन्दी पंथ का व्यापक विवरण दिया है।
  • कबीर पंथ-बादली निवासी संत इन्द्राज द्वारा हरियाणा में स्वतंत्र ‘कबीर पंथ की स्थापना की गई थी। इस पंथ में हरद दास का बहुत सम्मान है। ‘हृदय प्रकाश’ के दूसरे भाग में इनकी वाणी का संकलन है। इस पंथ का समद्ध साहित्य यहाँ सूचीबद्ध किया गया है। 

 

 

  • चरणदासी पंथ-चरणदासी पंथ के प्रवर्तक श्री चरणदास की वाणी ‘भक्ति सागर ग्रन्थ’ में संकलित हैं।

इस पंथ के साहित्य में प्रमुख रचनाएँ हैं

  •  श्री रामस्वरूप कृत गुरु भक्ति प्रकाश।
  •  श्री लीला सागर कृत जोग जीत।
  • महन्त गंगा कृत श्री श्याम चरण दास चरितावली।

 

  • दादूपथ-दादूपथा साधुओं के अनेक वर्ग हैं। खालसा साधु नारायण गद्दी से संबद्ध, विरक्त दाद पंथी, दखनाधा साध, उत्तराडी साधु तथा नागा दादूपंथी। हरियाणा के दादूपंथी साधू ‘उत्तराडी’ परपंरा के अन्तर्गत आते हैं। प्रदेश के दादूपंथियों में बनवारी दास विशिष्ठ स्थान रखते हैं। इनके तीन पद और तीन आरतियाँ हैं। इस परंपरा की प्रमुख रचनाएँ हैं-श्री विचार सागर (निश्चल दास), श्री वृत्ति प्रभाकर (निश्चल दास), विचारमाला (अनाथ दास), भागवत एकादश स्कन्ध (श्री चतुरदास)।

 

  • रचनाएँ                          प्रदेश का संत साहित्य 
  • वाणी                                  दुर्गादास
  • वाणी                                  बाबा दूलन दास          
  • पंथ                                     सूरजदास
  • वाणी                                   बाबा गिरधारी दास
  • गीतानुवाद                           श्री आसादास

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