मानसिक रूप से पिछडे बालकों की समस्याएँ

Problem of mentally backward children

मानसिक रूप से पिछड़े बालकों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनके स्कूल अथवा समाज में समायोजन के लिए इनकी समस्याओं पर ध्यान देने की अति आवश्यकता होती है।

 इनकी मुख्य समस्याएँ निम्नलिखित हैं

समायोजन सम्बन्धी समस्याएँ (Adjustment issues)

जैसा कि पहले बताया जा चुका है ऐसे बालक सामान्य बालकों के बीच स्वयं को असमायोजित (Maladjusted) महसूस करते हैं। समाज, स्कूल तथा समुदाय में इनका समायोजन कठिन होता है।

परिवार में समायोजन (Family adjustment)

माता-पिता इस बात को स्वीकार कर ने से कतराते हैं कि उनका बच्चा मन्द बुद्धि है। स्कूल में उसे असफलता का सामना करना पड़ता है। उधर माता-पिता ऊँची-ऊँची आशाएँ बाँधे रहते हैं। लेकिन बालकों की असफलता के कारण उनकी आशाएँ मिट जाती हैं और वे सारा क्रोध बालकों पर निकालते हैं। उन्हें बुरा-भला कहते हैं। घर पर दूसरे सदस्यों की निगाह में भी मन्दबुद्धि बच्चा गिर-सा जाता है।

स्कूल में समायोजन की समस्या (School adjustment problem)

स्कूलों और कक्षाओं में भी शिक्षक का व्यवहार ऐसे बालकों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण नहीं रहता। साधारण बालकों की तरह वे सामान्य शिक्षण-विधियों से कुछ भी सीख नहीं पाते। सामान्य बालकों से पिछड़ेपन पर शिक्षक उन्हें डॉटते हैं और दण्ड देते हैं। स्कूल की अन्य गतिविधियों में भाग लेने के लिए उन्हें प्रेरित नहीं किया जाता। परिणामस्वरूप ऐसे बालकों के मन में स्कूल के प्रति और शिक्षक के प्रति घृणा उत्पन्न हो जाती

समाज में समायोजन (Adjustment in society)

मन्दबुद्धि बालकों से समाज के अन्य वर्ग के लोग और बालक मेल-जोल बढ़ाना पसन्द नहीं करते। उसका परिणाम यह होता है कि मन्दबुद्धि बालकों में हीनता की भावना उत्पन्न हो जाती है और समाज में वे स्वयं को समायोजित नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप ऐसे बालकों का सामाजिक विकास सामान्य बालकों अनुरूप नहीं हो पाता।

 संवेगात्मक समस्याएँ (Emotional problems)

घर, स्कूल और समाज में उचित वातावरण न मिलने के कारण ऐसे बालकों को संवेगात्मक प्रशिक्षण नहीं मिल पाता। संवेगात्मक रूप से ये अपरिपक्व और अविकसित रह जाते हैं। उदाहरणार्थ, छोटी-छोटी बात पर डर जाना या रो पड़ना। संवेगात्मक अस्थिरता के कारण उनका कहीं भी समायोजन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है।

शारीरिक और मानसिक विकास की समस्या (Problems of physical and mental development)

इन बालकों का शारीरिक और मानसिक विकास सामान्य बालकों की तरह नहीं हो पाता जिससे दिनचर्या सम्बन्धी कई क्रियाओं में इनका समायोजन नहीं हो पाता, जैसे ठीक प्रकार से न बैठ पाना, कम सुनना, आँखों में दोष आ जाना आदि।

मानसिक रूप से विकलांग (Mentally challenged)

बालकों की शिक्षा मानसिक रूप से विकलांग बालकों में संवेगात्मक परिपक्वता का अभाव होता है। इन बालकों में हीन भावनाएँ (Negative Feeling) उत्पन्न हो जाती हैं और ये अधिकतर क्रियाओं में भाग नहीं ले पाते।

इन्हें अपनी इच्छाओं को दबाना पड़ता है, लेकिन कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि इस प्रकार के कुछ बालक मानसिक रूप से तेज भी होते हैं।

  • मानसिक रूप से अपंग बालकों को समायोजन सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ता है; जैसे-परिवार में समायोजन सम्बन्धी समस्या, स्कूल में समायोजन की समस्या, समाज में समायोजन की समस्या।
  • इस प्रकार के बालक अपनी असफलताओं से निराश होने लगता है और वह कुण्ठित रहने लगता है।
  • समायोजन की समस्या के अतिरिक्त ऐसे बच्चों को संवेगात्मक समस्याओं और शारीरिक तथा मानसिक विकास की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
  • शिक्षक द्वारा ऐसे बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। और मानसिक रूप से पिछड़े बालकों के माता-पिता को शिक्षित करना भी आवश्यक है।

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