पटौदी रियासत

पटौदी रियासत की स्थापना फैज तलब खान ने की थी। 1803 ई. में द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध में मदद के बदले ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1804 ई. मे फैज तलब खान को 40 गाँव तथा पटौदी कस्बा ईनाम के रूप में दे दिया। इसके उपरान्त फैज तलब खान ने इस रियासत की नींव रखी
मुगलों के शासनकाल में पटौदी का क्षेत्र रेवाड़ी सरकार के अधीन एक परगना होती थी। फैज तलब खान ने 1804-1829 ई. तक शासन किया। उसने 1805 ई. में नवाब की उपाधि धारण की।

पटौदी रियासत के अन्य शासक थे

  • नवाब अकबर अली खान (1829-62 ई.)
  • नवाब मोहम्मद अली खान (1862-67 ई.)
  • नवाब मुख्यार हुसैन अली खान (1867-1878 ई.)
  • नवाब मुहम्मद मुमताज हुसैन अली खान (1878-98 ई.)
  • नवाब मुहम्मद मुजफ्फर अली खान (1898-1913 ई.)
  • नवाब मुहम्मद इब्राहिम अली खान (1913-17 ई.)
  • नवाब इफ्तिखार अली खान (1917-47 ई.)

पटौदी रियासत के अन्तिम शासक नवाब इफ्तिखार अली खान थे। वह क्रिकेट, हॉकी तथा बिलियर्डस के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिला नवाब साहब भारत तथा इंग्लैंड दोनों देशों की क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे। 1931 ई. में नवाब इफ्तिखार खान भारतीय क्रिकेट टीम के ‘ भी बने। वे 1928 ई. में आलंपिक खेलने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य भी रहे। नवाब इफ्तिखार अली खान को खेलों की दनि ‘टाइगर’ के उपनाम से भी जाना जाता था। नवाब मंसूर अली खान पटौदी उनके वारिस थे।

1940 के दशक में पटौदी रियासत में प्रजामण्डल आंदोलन जोरों से चला। तत्कालीन नवाब मुहम्मद इफ्तिखार अली खां ने जनहित के कार्यों पर ध्यान नहीं दिया। ऊपर से भारी कर और बेगार ने राज्य की जनता की कमर तोड़ दी। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जनता नवाब की ज्यादतियों और आर्थिक दोहन के विरुद्ध आवाज उठाई। पटौदी प्रजामण्डल के नेताओं में गौरीशंकर वैद्य, पं. बाबूदयाल शर्मा, ठाकर रामसिंह, नंदकिशोर आदि प्रमुख थे। नवाब ने प्रजामण्डल की मांगों को सख्ती से दबाने के प्रयास किए। गौरीशंकर वैद्य को कारावास में डालकर उसकी संपत्ति जब्त कर ली। इससे नाराज जनता ने सत्याग्रह आरंभ कर दिया। गुड़गाँव के कांग्रेस नेता गजराज सिंह भी आंदोलन में शामिल हो गए। दबाव में आकर नवाब ने प्रजामण्डल से समझौता कर लिया तथा सभी बंदियों को रिहा कर दिया। आजादी के उपरान्त पटौदी रियासत का भारतीय गणराज्य में विलय हो गया।

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