पंडित नेकी राम शर्मा

प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी पं. नेकी राम शर्मा जी का जन्म सन् 1877 में वर्तमान भिवानी जिले के केलंगा गाँव में हुआ था। इनकी शिक्षा-दीक्षा बनारस से हुई थी। युवावस्था में ही पं. नेकी राम शर्मा स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पडे थे। लोकमान्य तिलक के विचारों से प्रभावित होकर वह ‘स्वराज संघ’ से जुड़ गए थे। पंडित जी हरियाणा के ‘होमरूल आन्दोलन’ की रीढ की हड्डी थे। 1917 के कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इन्होंने हरियाणा का प्रतिनिधित्व किया। पं. नेकीराम जी असहयोग आंदोलन के दौरान 6 माह तक जेल में भी रहे। 1922 ई. से 1930 तक इन्होंने घर-घर जाकर स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रचार किया। 1923 ई. में ‘स्वराज पार्टी’ के गठन के साथ ही वह स्वराज आन्दोलन से जुड़ गए। इन्होंने भिवानी से ‘सन्देश’ नामक एक पत्र का प्रकाशन भी किया जिसके माध्यम से पंडित जी ने बाल विवाह, छुआछूत आदि कुरीतियों के विरुद्ध अभियान चलाया। ‘हिन्द केसरी’ लाला लाजपतराय के निकट सहयोगी होने के कारण पं. नेकी राम शर्मा को ‘हरियाणा केसरी’ भी कहा जाता था। जून 1956 में इनका स्वर्गवास हो गया।

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