पंचकूला शहर

Panchkula City

पंचकूला जिले के उत्तर व पूर्व दिशा में हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में पंजाब व चण्डीगढ़ तथा दक्षिण में अंबाला जिले की सीमाएँ लगती हैं। सिरसा के अलावा पंचकूला ही हरियाणा का ऐसा जिला है जो प्रदेश के केवल एक ही जिले के साथ सीमाएँ साझा करता है।

panchkula city map
Panchkula City Haryana

पंचकूला का जिले के रूप में स्थापना एवं परिचय (Establishment and introduction of Panchkula as a district)

हरियाणा के सुदूर उत्तर में स्थित पंचकूला जिले को हम हरियाणा का ताज भी कह सकते हैं। जिले का कुल क्षेत्रफल 898 वर्ग कि.मी. है तथा यह फरीदाबाद के बाद हरियाणा का दूसरा सबसे कम क्षेत्रफल वाला जिला है। अंबाला जिले का विभाजन करके 15 अगस्त, 1995 को पंचकूला को जिला बनाया गया। इससे पूर्व यह जिला अंबाला जिले का भाग था।

पंचकूला का प्रशासनिक परिदृश्य (Panchkula administrative landscape)

हरियाणा के उत्तरी छोर पर स्थित पंचकूला शहर ‘हरियाणा की छोटी राजधानी’ कहा जा सकता है। पंचकूला में हरियाणा सरकार के अनेकों विभागों के मुख्यालय हैं। यहां पर हरियाणा पुलिस का मुख्यालय, माध्यमिक तथा उच्चतर शिक्षा निदेशालय, बिजली वितरण निगम, खाद्य आपूर्ति विभाग, सिंचाई विभाग, शहरी विकास प्राधिकारण, आवास बोर्ड, बीज वितरण निगम आदि विभागों तथा निगमों के मुख्यालय बने हुए हैं। इनके अलावा हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग तथा हरियाणा लोक सेवा आयोग भी पंचकूला में हैं। पंचकूला में केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय भी है।

पंचकूला जिले का जिला मुख्यालय पंचकूला शहर में है। प्रशासनिक दृष्टि से पंचकूला जिला अंबाला मण्डल का भाग है। पुलिस प्रशासन की दृष्टि से पंचकूला में ‘आयुक्त व्यवस्था’ (कमिश्नरी सिस्टम)’ लागू है। जिले में 2 उपमण्डल-पंचकूला तथा कालका, तीन तहसील-पंचकूला, कालका तथा रायपुर रानी (2016) हैं। रायपुर रानी को हाल ही (2016) में तहसील का दर्जा दिया गया है। जिले में 2 उपतहसील तथा चार विकास खण्ड हैं। पंचकूला जिले में कुल 253 गांव हैं।

संसदीय लोकतंत्र की दृष्टि से पंचकूला जिला अंबाला संसदीय क्षेत्र का भाग है। जिले में विधानसभा की दो सीटें-कालका तथा पंचकूला हैं। स्थानीय प्रशासन की दृष्टि से पंचकूला जिले में 253 गांव हैं जिनमें 128 ग्राम पंचायत हैं। जिले में 4 पंचायत समिति (ब्लॉक समिति) तथा 10 जिला परिषद वार्ड हैं। जिले के सभी गांवों को पक्की सड़कों तथा विद्युत आपूर्ति से जोड़ा जा चुका है। यह प्रदेश का प्रथम जिला है जहां गांवों को 24 घण्टे बिजली दी जा रही है।

पंचकूला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background of Panchkula)

यद्यपि पंचकूला जिला 15 अगस्त, 1995 को अस्तित्व में आया परन्तु, यह क्षेत्र पौराणिक काल से अस्तित्व में है। ऐसी मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान पिंजौर के क्षेत्र में समय बिताया था। इसलिए इस शहर को “पंचपुर’ कहा जाने लगा। हांसी से प्राप्त पृथ्वीराज चौहान के एक शिलालेख में भी पंचपुर का उल्लेख मिलता है। आधुनिक पिंजौर को महाभारतकालीन पंचपुर माना जाता है।

पंचकूला शब्द को संस्कृत भाषा के दो शब्दों पंच तथा कूल (किनारा) का संयुक्त रूप माना जाता है जिसका अर्थ है-पांच नहरों का स्थान। संभवतः इस शहर को यह नाम नाडा साहिब से माता मनसा देवी परिसर तक के क्षेत्र में घग्गर नदी के जल का वितरण करने वाली पांच नहरों के कारण मिला है। पिंजौर से मिले उत्तर पाषाणकालीन औजारों से इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व का पता चलता है।

पंचकूला का क्षेत्र इतिहास में मौर्य, मुप्त, कुषाण तथा यौद्धेय साम्राज्यों द्वारा शासित रहा है। पिंजौर के क्षेत्र में गुप्तकालीन सिक्के प्राप्त हुए हैं। 7वीं सदी के उत्तरार्ध तथा 8वीं सदी के प्रारंभ में इस क्षेत्र पर कन्नौज नरेश यशोवर्मन तथा कश्मीर नरेश ललितादित्य का भी अधिकार रहा। 1164 ई. के एक शिलालेख के अनुसार पृथ्वीराज चौहान के मामा-किल्हन, जो उस समय हांसी के गवर्नर थे, ने पंचपुर नरेश को हराकर इस क्षेत्र पर चौहानों की सत्ता स्थापित कर दी। परन्तु 1192 ई. पृथ्वीराज चौहान की मुहम्मद गौरी के हाथों हार के उपरान्त यह क्षेत्र शेष हरियाणा की तरह मुहम्मद गौरी के अधिकार में आ गया। इसके पश्चात् यह क्षेत्र 1526 ई. में बाबर के आने तक दिल्ली सलतनत के शासन के अधीन ही रहा।

इतिहासकार मिन्हाज-उस-सिराज द्वारा रचित ‘तदकात-ए-नासिरी’ के अनुसार नसीरूद्दीन महमूद ने सिरमौर के शासक को हराकर पिंजौर का क्षेत्र हथिया लिया तथा यहां जमकर लूटपाट की। 1398 ई. में लुटेरे तैमूर ने पिंजौर के क्षेत्र में लूटपाट की। 1526 ई. में यह क्षेत्र लोदियों से मुगलों के हाथों में आ गया। – औरंगजेब के शासन काल में उसके चचेरे भाई और सैन्य फिदाईन खान ने पिंजौर में एक सुन्दर बागीचा बनवाया जिसे ‘मुगल गार्डन’ के नाम से जाना जाता था।

18वीं सदी में इस क्षेत्र पर रूहेला शासकों का अधिकार हो गया। रूहेला शासकों को हराकर 18वीं सदी के अन्तिम दशकों के दौरान पिंजौर के क्षेत्र पर मराठों ने अधिकार जमा लिया। दूसरे आंग्ल-मराठा युद्ध के उपरान्त 1803 ई. में मराठों तथा ईस्ट-इंडिया कंपनी के बीच दिसंबर मास में सर्जी अंजन गांव की संधि हुई। इस संधि के अनुसार समस्त हरियाणा का क्षेत्र अंग्रेजों के अधीन आ गया। अंग्रेजों ने यह क्षेत्र मनीमाजरा के शासक गुरबख्श सिंह को दे दिया। उस समय यह क्षेत्र पटियाला रियासत के अधीन था। 1815 ई. में पटियाला नरेश गोपाल सिंह के शासनकाल में गुरबख्श सिंह ने वर्तमान पंचकूला के क्षेत्र में माता मनसा देवी मन्दिर का निर्माण करवाया। माता मनसा देवी शक्तिपीठ उन 51 शक्तिपीठों में से एक है जिनका वर्णन ‘तंत्र चूडामणि’ नामक ग्रन्थ में मिलता है।

1846 ई. में कालका तथा पिंजौर का क्षेत्र अंग्रेजों ने पटियाला रियासत से लेकर अपने अधिकार में ले लिया। कुछ समय उपरान्त अंग्रेजों ने यह क्षेत्र शिमला जिले में सम्मिलित कर दिया। 1899 ई. में यह क्षेत्र अंबाला जिले में शामिल कर दिया गया। 1966 में हरियाणा गठन के समय तक यह व्यवस्था बनी रही। हरियाणा गठन के समय अंबाला जिले में अंबाला, जगाधरी तथा नारायणगढ़-तीन तहसील थी। खरड़ तहसील का क्षेत्र पंजाब में चले जाने के उपरांन्त 153 गांव सहित कालका का क्षेत्र खरड़ तहसील से निकालकर अंबाला जिले की नारायणगढ़ तहसील में मिला दिया गया। 1967 में इन 153 गांवों और कालका शहर को मिलाकर कालका तहसील बनाई गई।

1989 में कालका तहसील के 77 गांव तथा नारायणगढ़ के 19 गांव को मिलाकर अंबाला जिले में पंचकूला नई तहसील बनी। 15 अगस्त, 1995 को पंचकूला जिला अस्तित्व में आया।

पंचकूला जिले का सामाजिक परिदृश्य

पंचकूला जिला हरियाणा का दूसरा सबसे कम क्षेत्रफल वाला जिला है। 2011 की जनगणना के अनुसार पंचकूला जिले की कुल जनसंख्या 5,61,293 है। जिले में पुरुषों की संख्या 2,99,679 तथा महिलाओं की संख्या 2,61,614 है। नवगठित दादरी जिले को छोड़कर पंचकूला हरियाणा का दूसरा सबसे कम जनसंख्या, सबसे कम पुरुषों की संख्या तथा सबसे कम महिला संख्या वाला जिला है। यदि दादरी जिले को जनसंख्या के अनुमानित आंकड़ों को भी शामिल कर लिया जाए तो यह जिला प्रदेश का दूसरा सबसे कम जनसंख्या वाला जिला है। जिले में पुरुष-महिला लिंगानुपात 873 है।

पंचकूला जिले की साक्षरता दर 81.9% है तथा यह जिला गुरूग्राम के बाद प्रदेश का दूसरा सर्वाधिक साक्षरता वाला जिला है। जिले में पुरुषों की साक्षरता दर 87.0 प्रतिशत तथा महिला साक्षरता दर 75.9 प्रतिशत है। महिला साक्षरता की दष्टि से पंचकूला जिला गुरूग्राम के बाद दूसरा सार्वधिक महिला साक्षरता वाला जिला है। जिले की लगभग 55.8% जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास करती है तथा लगभग 44.2 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। जिले में जनसंख्या का घनत्व 625 है।

पंचकूला जिले का भौगोलिक परिदृश्य

पंचकूला जिला शिवालिक श्रृंखला तथा यमुना-घग्गर के मैदान के बीच का क्षेत्र है। जिले के उत्तरी भाग में शिवालिक श्रृंखला का विस्तार है तथा दक्षिणी भाग एक गिरिपाद मैदान है। पंचकूला जिले का क्षेत्र यद्यपि 898 वर्ग कि.मी. है परन्तु, इस क्षेत्र को तीन मुख्य भू-आकृतिक इकाइयों में बांटा जा सकता है। ये क्षेत्र हैं-शिवालिक तथा मोरनी की पहाड़ियां, पिंजौर दून तथा घग्गर का बाढ़ का मैदान। जिले से घग्गर नदी का प्रवाह है। हरियाणा राज्य की सबसे ऊँची चोटी पंचकूला जिले में मोरनी की पहाड़ियों में ‘करोह’ नामक पहाड़ी है जिसकी ऊंचाई 1,514 मी. है। पिंजौर दून, ब्राहरी हिमालय के छोर पर 5-8 कि.मी. चौड़ी घाटी के रूप में विस्तृत है। जिले के धरातल का ढलान उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है। घग्गर का बाढ़ का मैदान दोमट मिट्टी का गिरिपाद मैदान है जिसमें कंकड़-बजरी आदि मिले होते हैं।

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की पहाड़ियों से निकलकर घग्घर नदी मोरनी की पहाड़ियों से होती हुई ‘बड़ी सैर’ नामक गांव के निकट से पंचकूला जिले में प्रवेश कर जाती है। शिवालिक की पहाड़ियों से निकलकर अनेकों छोटे-छोटे बरसाती नाले घग्गर नदी में मिल जाते हैं।

पंचकूला जिले की जलवायु तथा वर्षा

पंचकूला जिले की जलवायु उष्णकटिबंधीय प्रकार की है। यहां मार्च से जून के महीने तक गर्मी रहती है तथा नवंबर से फरवरी के बीच कड़ाके की सर्दी पड़ती है। जून के अन्तिम सप्ताह से सितंबर तक का समय यहां वर्षाकाल है। जिले में वर्षा का वार्षिक औसत 100 से.मी. है। कुल वार्षिक वर्षा की लगभग 75 प्रतिशत वर्षा जुलाई से सितंबर के बीच दक्षिण-पूर्वी मानसून के कारण होती है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण सर्दियों में भी वर्षा होती है। जिले की जलवायु यहां की वन संपदा का आधार है।

पंचकूला जिले में वन तथा औषधी

पंचकूला जिले की भौगोलिक दशा तथा जलवायु वन संपदा के अनुकूल है। पंचकूला जिले के 383.7 वर्ग कि.मी. क्षेत्र पर वन हैं। जिले में कुल वन्य क्षेत्र में से लगभग 150 वर्ग कि.मी. सघन वन क्षेत्र है जिसमें से 86.3 वर्ग कि.मी. क्षेत्र पर आरक्षित वन हैं। पंचकूला जिला हरियाणा का सर्वाधित वन्य क्षेत्र वाला जिला है। जिले के लगभग 40% क्षेत्र पर वन हैं। जिले का वन्य क्षेत्र मोरनी-पिंजौर वन मंडल में सम्मिलित है।

जिले में उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन पाए जाते हैं। पंचकूला जिले के पहाड़ी क्षेत्र में सीसम, छाल, अमलतास, सैन, बहेड़ा, ढाक, आम, आंवला, कचनार, पापडी तथा रोहिणी के साथ-साथ अनेकों प्रकार की झाड़ियां, औषधीय पौधे तथा फलदार वृक्ष मिलते हैं।

जिले के लगभग 40% क्षेत्र पर वन होने के कारण यहा कृषि योग्य भूमि कम ही है। जिले में गेहूँ, धान तथा गन्ना प्रमुख रूप से उगाए जाते हैं। पंचकूला जिले में फलों की खेती विशेष रूप से की जाती है। जिले में आम, अमरूद, जामुन, अंगूर आदि फलों का उत्पादन भी होता है। जिले के मैदानी भागों में सब्जियों का उत्पादन भी होता है। – पंचकूला जिला हरियाणा में वन्य जीव-जन्तुओं का सबसे सुरक्षित आश्रय है। कालका तथा पिंजौर के क्षेत्र में जीव-जन्तुओं के लिए राज्य सरकार द्वारा कई प्रजनन केन्द्र तथा आश्रय स्थल स्थापित किए गए हैं। 

इसके साथ-साथ प्रदेश में औषधीय पौधों के विकास तथा अनुसंधान के उद्देश्य से वर्ष 2017 में हरियाणा सरकार द्वारा योगगुरू बाबा रामदेव के पतंजलि अनुसंधान संस्थान, दिव्य योग मन्दिर ट्रस्ट, हरिद्वार के साथ मोरनी की पहाड़ियों में एक विश्व हर्बल पार्क विकसित करने के लिए समझौता किया गया है। यह विश्व औषध उद्यान लगभग 53,000 एकड़ के विशाल क्षेत्र में प्रस्तावित है। इस औषध उद्यान में विभिन्न औषधीय पौधों की लगभग 25,000 प्रजातियां उगाई जाएंगी। पूर्ण रूप से विकसित हो जाने के उपरान्त यह औषध उद्यान विश्व का सबसे बड़ा औषध उद्यान होगा।

पंचकूला जिले की परिवहन व्यवस्था

पंचकूला शहर एक नियोजित शहर है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-5 जिले में कालका से होकर सोलन और शिमला होते हुए शिपकी-ला तक जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-21 A पंचकूला जिले के पिंजौर से हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ तक जाता है। इसके साथ-साथ अंबाला-यमुनानगर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-73 अंबाला से पंचकूला और बरनाला होते हुए यमुनानगर तक जाता है।

इन राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ पंचकूला शहर नारायणगढ़, बरवाला, मोरनी, चण्डीगढ़, मल्लाह आदि शहरों के साथ जुड़ा हुआ है।

उत्तर रेलवे का अंबाला-कालका संभाग पंचकूला जिले के कालका शहर को चण्डीगढ़ के मार्ग से राजधानी दिल्ली से जोड़ता है। यह चौड़ी लाइन कालका में आकर समाप्त हो जाती है। कालका को शिमला के साथ कालका-शिमला रेलमार्ग से जोड़ा गया है। इस पहाड़ी क्षेत्र में रेल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 1898 ई. में ब्रिटिश सरकार द्वारा एक छोटी रेल लाइन बिछाई गई। 96 कि.मी. की दूरी का यह रेलमार्ग 107 सुरंगों तथा 864 पुलों से होकर गुजरता है। 8 जुलाई, 2008 को युनेस्को द्वारा कालका-शिमला रेलवे को विश्व की ऐतिहासिक धरोहर की सूची में शामिल किया गया था।

पंचकूला जिले का आर्थिक परिदृश्य

पंचकूला जिले का मोरनी, कालका तथा पिंजौर का क्षेत्र पहाड़ी क्षेत्र है। यहां की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार पर्यटन है। जिले की लगभग 55% जनता शहरी क्षेत्रों में निवास करती है। जिसका एक बहुत बड़ा भाग सेवा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों की जनता आज भी कृषि, पशु पालन, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्यपालन तथा कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़ी हुई है। – इनके साथ-साथ पिंजौर का “एच.एम.टी. उद्योग’ पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां पर ट्रैक्टर के कलपुर्जो का निमार्ण होता है। वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र का यह उपक्रम अपने अस्तित्व की अन्तिम लड़ाई लड़ रहा है।

जिले का सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कलपुर्जो के निर्माण का एक प्रमुख केन्द्र है। इसके अलावा भूपेन्द्रा सीमेंट फैक्ट्री तथा भारत इलेक्ट्रिकल्स लि. इस जिले के प्रमुख उद्योग हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी पार्क – पंचकूला

सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनियों को जिले में आमंत्रित करने तथा उन्हें एक समृद्ध आधारभूत ढांचा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेल्पमेंट कार्पोरेशन (एच.एस.आई.आई.डी.सी.) द्वारा पंचकूला शहर में एक सूचना प्रौद्योगिकी पार्क विकसित किया गया है। इस औद्योगिक क्षेत्र में कुल 28 औद्योगिक प्लॉट हैं। 74 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस सूचना प्रौद्योगिकी पार्क में कई कंपनियों द्वारा अपने औद्योगिक परिसर तथा कार्यालय स्थापित किए गए हैं। हरियाणा सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्ष 2008 में आरंभ हुई थी। इसके साथ ही सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया का एक सेंटर पंचकूला में स्थापित किया जा रहा है। यह प्रदेश में एस.टी. पी.आई. का तीसरा सेंटर होगा। इससे पूर्व दो सेंटर गुरूग्राम और फरीदाबाद में स्थापित किए जा चुके हैं।

पंचकूला जिले के शिक्षण संस्थान

पंचकूला को जिला बने हुए दो दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है। जिले मे कई सरकारी तथा निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थान बन चुके हैं। परन्तु, जिले में अभी तक कोई भी विश्वविद्यालय स्थापित नहीं हो पाया है।

हरियाणा सरकार द्वारा जीन्द, रेवाड़ी, भिवानी और गुरूग्राम जिलों के साथ-साथ पंचकूला जिले में भी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की घोषणा की गई है। यह मेडिकल कॉलेज पंचकूला शहर में 25 एकड़ क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा।

इसके अलावा पंचकूला में राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान (एन.आई.एफ.टी.) की स्थापना की गई है। हरियाणा में यह अपनी तरह का प्रथम संस्थान है।

1986 की शिक्षा नीति के अनुसार देश के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय खोले गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वित्तपोषित ये आवासीय विद्यालय पूर्णतया निशुल्क हैं। 1995 में पंचकूला जिले के मौली गांव में जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना की गई।

विमानन क्लब – पिंजौर

युवाओं को नागरिक उड्डययन के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से हरियाणा नागरिक उड्डयन संस्थान की स्थापना की गई है। इस संस्थान द्वारा पंचकूला जिले के पिंजौर में भी एक विमानन क्लब स्थापित किया गया है। इस विमानन क्लब के पास विभिन्न प्रशिक्षण सुविधाओं के साथ-साथ 3000 फीट की एक हवाई पटटी भी है। पिंजौर हवाई पट्टी को हरियाणा सरकार द्वारा 3000 फीट से बढ़ाकर 5000 फीट का किया जा रहा है।

उपरोक्त शिक्षण संस्थानों के अलावा पंचकूला में विभिन्न शैक्षणिक विभागों के मुख्यालय भी बने हुए हैं। इनमें से कुछ को यहां सूचीबद्ध किया गया है।

  •  हरियाणा होम्योपैथिक औषधी परिषद।
  • हरियाणा राज्य औषध विज्ञान परिषद्।
  • हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग।
  • हरियाणा आयुश निदेशालय
  • हरियाणा लोक सेवा आयोग।
  • हरियाणा शिक्षा निदेशालय।
  • चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय।
  • हरियाणा उच्चतर शिक्षा निदेशालय।
  • हरियाणा राज्य तकनीकी शिक्षा समीति।
  • हरियाणा विद्यालय शिक्षा परियोजना परिषद्।
  • हरियाणा राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड।
  • हरियाणा राज्य विज्ञान एवं तकनीकी परिषद्।

पंचकूला जिले के महत्वपूर्ण स्थल

पंचकूला शहर हरियाणा का एक आधुनिक तथा पूर्णतया नियोजित शहर है। पंचकूला, मोहाली और चण्डीगढ़ को मिलाकर ‘ट्राई सिटी’ कहा जाता है। पंचकूला जिले में अनेक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक, धार्मिक तथा प्रशासनिक भवनों के अलावा भारतीय सेना की चण्डी मंदिर छावनी भी है। इस छावनी में भारतीय थल सेना की पश्चिमी कमान का मुख्यालय है।

पंचकूला जिले के उत्तरी भाग में स्थित मोरनी की पहाड़ियां पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र हैं। हरियाणा राज्य की सबसे ऊंची चोटी-‘करोह’ भी मोरनी की पहाड़ियों में स्थित है। इस चोटी की ऊंचाई 1,514 मी. है।

पंचकूला जिले के कुछ महत्वपूर्ण स्थलों को यहां सूचीबद्ध किया गया है  जो इस प्रकार से हैं:

  • टिक्कर ताल – मोरनी
  • कैक्टस गार्डन – पंचकूला
  • यादवेन्द्र उद्यान – पिंजौर
  • नाहन कोठी – पंचकूला

टिक्कर ताल – मोरनी

मोरनी की पहाड़ियों में दो झील हैं जिन्हें एक चट्टान एक-दूसरे से अलग करती है। इन झीलों को ‘टिक्कर ताल’ के नाम से जाना जाता है। इन झीलों का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। टिक्कर ताल के किनारे एक प्राचीन मन्दिर भी है जिसे 12वीं सदी में बना बताया जाता है।

कैक्टस गार्डन – पंचकूला

पंचकूला का कैक्टस गार्डन (नागफनी उद्यान) एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन माना जाता है। इस उद्यान को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय नागफनी तथा रसदार पादप उद्यान एवं अनुसंधान केन्द्र के नाम से जाना जाता है। इस उद्यान में नागफनी की 3500 से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं। इस उद्यान की स्थापना का श्रेय श्री जे.एस. सरकारिया को जाता है।

यादवेन्द्र उद्यान – पिंजौर

प्राचीन पंचपुर कस्बा वर्तमान में पिंजौर के नाम से जाना जाता है। 50 एकड़ में विस्तृत इस उद्यान को मुगल बादशाह औरंगजेब के चचेरे भाई फिदाईन खान ने 17वीं सदी में बनवाया था। उस समय इसे ‘मुगल बाग’ के नाम से जाना जाता था। बाद में इस उद्यान को पटियाला रियासत के अन्तिम शासक यादवेन्द्र सिंह के नाम पर ‘यादवेन्द्र उद्यान’ के नाम से जाना जाने लगा। महाराज यादवेन्द्र सिंह ने ना केवल इस उद्यान का जीर्णोद्धार करवाया था बल्कि इस उद्यान को इसका वर्तमान स्वरूप भी प्रदान किया था।

इस उद्यान में जुलाई के महीने में विश्व प्रसिद्ध ‘आम का मेला’ लगता है। इस मेले में आम की सेंकड़ों प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाता है। इस मेले के अलावा यहां पर ‘पिंजौर बैशाखी उत्सव’ तथा पिंजौर धरोहर उत्सव’ का आयोजन भी किया जाता है।

नाहन कोठी – पंचकूला

इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण 19वीं सदी में सिरमौर रियासत के महाराज फतेह सिंह के पुत्रों-बीर सिंह तथा सुरजन सिंह द्वारा करवाया गया था। उस समय यह क्षेत्र सिरमौर रियासत के अधीन था। रियासत की राजधानी नाहन में होने के कारण इस भवन को ‘नाहन कोठी’ के नाम से जाना जाने लगा। यह इमारत ब्रिटिश शिल्पकला का सुन्दर नमूना है। इन प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों के अलावा पंचकूला में हरियाणा सरकार द्वारा दो एकड़ क्षेत्र में 5 करोड़ की लागत से एक राज्यस्तरीय संग्रहालय भी निर्माणाधीन है।

पंचकूला जिले में धार्मिक स्थल

  • माता मनसा देवी मन्दिर – पंचकूला
  • माता भीमा देवी मन्दिर – पिंजौर
  • गुरूद्वारा नाडा साहिब
  • काली माता मन्दिर – कालका

माता मनसा देवी मन्दिर – पंचकूला

इस प्रसिद्ध मन्दिर का निर्माण 1815 ई. में मनीमाजरा के सामन्त गुरबख्श सिंह द्वारा पटियाला नरेश महाराज गोपाल सिंह के शासनकाल में करवाया गया। उस समय यह क्षेत्र पटियाला रियासत के अधीन था।

1840 ई. में पटियाला नरेश महाराज करम सिंह ने मन्दिर का विस्तार करते हुए यहां पर मन्दिर के परिसर में एक और भवन का निर्माण करवाया जिसे ‘पटियाला मन्दिर’ भी कहा जाता है। माता मनसा देवी मन्दिर के प्रबंधन हेतु 1991 में हरियाणा सरकार द्वारा माता मनसा देवी मन्दिर बोर्ड का गठन किया गया। इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष हरियाणा के मुख्यमंत्री होते हैं।

माता भीमा देवी मन्दिर – पिंजौर

पिंजौर के माता भीमा देवी मन्दिर का पता 1996 में इस क्षेत्र की खुदाई के दौरान चला था। मन्दिर का निर्माण 9वीं से 11वीं सदी के दौरान हुआ बताया जाता है। सुलतान नसीरुद्दीन महमूद (इल्तुतमिश का पुत्र) ने इस क्षेत्र पर अधिकार करने के बाद यहां भयंकर लूटपाट की तथा इस मन्दिर को भी तुड़वा दिया। खजुराहो शैली में निर्मित यह मन्दिर हरियाणा सरकार के पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।

गुरूद्वारा नाडा साहिब

पंचकूला में धग्गर नदी के तट पर स्थित इस गुरूद्वारे का संबंध गुरू गोबिन्द सिंह जी से माना जाता है। 1688 ई. में भंगानी की लड़ाई के उपरान्त पोंटा साहिब से आनंदपुर साहिब लौटते समय गुरू गोबिन्द सिंह जी ने यहां ठहराव किया था। यहां के नाडू शाह लुबाना ने गुरू जी और उनके अनुयायियों की सेवी की थी। इस स्थान की पवित्रता को स्वीकार करते हुए भाई मोठा सिंह नामक एक व्यक्ति ने गुरू जी की स्मृति में एक चबूतरे का निर्माण करवाया। वर्तमान में यहां एक भव्य गुरूद्वारा बन चुका है। 1948-1956 ई. तक से इस गुरूद्वारे का प्रबंधन पेप्सू के धर्मार्थ बोर्ड के हाथों में रहा। 1956 ई. में यह गुरूद्वारा शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी के संरक्षण में आ गया।

काली माता मन्दिर – कालका

पंचकूला जिले के कालका शहर में काली माता का प्राचीन मन्दिर है। कालिका माता के नाम पर ही इस शहर को ‘कालका’ नाम मिला। ऐसी मान्यता है कि मन्दिर की स्थापना महाभारत काल में पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान की गई थी।

जिले के अन्य धार्मिक स्थलगुरू गोरखनाथ मन्दिर, सीतोमाजरी (कालका)

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