जीन पियाजे के अन्य सिद्धान्त

Other theories of Jean Piaget

जीन पियाजे के अन्य सिद्धान्त निम्नलिखित हैं

निर्माण और खोज का सिद्धान्त(Theory of construction and discovery)

  • प्रत्येक बालक अपने अनुभवों को अर्थपूर्ण बनाने के लिए क्रियाशील होता है। वह यह जानने के लिए प्रयत्नशील होता है कि उसके विचार सम्बद्धतापूर्वक मेल खाते हैं या नहीं। बच्चे उन व्यवहारों और विचारों की समय-समय पर खोज और निर्माण करते हैं, जिन व्यवहारों और विचारों का उन्होंने कभी पहले प्रत्यक्ष नहीं किया होता है।
  • पियाजे का विचार है कि ज्ञानात्मक विकास केवल नकल न होकर खोज पर आधारित है। नवीनता या खोज को उददीपक-अनुक्रिया सामान्यीकरण के आधार पर नहीं समझाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक चार साल का बालक यदि भिन्न-भिन्न आकार के प्यालों को प्रथम बार क्रमानुसार लगा देता है, तो यह उसके बौद्धिक वृद्धि की खोज और निर्माण से सम्बन्धित है।

कार्य-क्रिया का अर्जन(Acquisition of activity)

  • कार्यात्मक क्रिया का तात्पर्य उस विशिष्ट प्रकार की मानसिक दिनचर्या से है, जिसकी मुख्य विशेषता उत्क्रणशीलता है।
  • प्रत्येक कार्यात्मक-क्रिया का एक तर्कपूर्ण विपरीत प्रभाव होता है। उदाहरण के लिए, एक मिट्टी के चक्र को दो भागों में तोड़ना तथा दो टूटे हुए भागों को पुन: एक पूर्ण चक्र के रूप में जोड़ना एक कार्यात्मक-क्रिया है।
  • कार्यात्मक-क्रिया की सहायता से बच्चे मानसिक रूप से वहाँ पुन: पहुँच सकते हैं, जहाँ से उन्होंने कार्य प्रारम्भ किया था।
  • पियाजे का विचार है कि जब तक बालक किशोरावस्था तक नहीं पहुंच जाता है, तब तक वह भिन्न-भिन्न विकास अवस्थाओं में भिन्न-भिन्न वर्गों की कार्यात्मक-क्रिया का अर्जन करता रहता है। एक विकास अवस्था से दूसरी में पदार्पण (प्रारम्भ) के लिए दो तथ्य आवश्यक हैं-सात्मीकरण एवं सन्तुलन स्थापित करना।

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त का शैक्षिक महत्त्व(Educational importance of Jean Piaget’s theory of cognitive development)

  • पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक या मानसिक विकास (Cognitive Development) निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। बालकों का मानसिक विकास धीरे-धीरे एक सोपान (क्रम) के तहत होता रहता है।
  • अध्यापकों को पहले बालकों के मानसिक विकास की अवस्था का निर्धारण कर, तब उसे शिक्षित करने हेतु योजना बनानी चाहिए।
  • तार्किक चिन्तन के विकास में बाल्यावस्था महत्त्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। अत: शिक्षकों को बच्चों में तार्किक क्षमता बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।
  • वर्ग में समान रुचि के विद्यार्थियों को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर उनमें विचार-विनिमय (exchange of thoughts) के माध्यम से तार्किक बुद्धि के विकास के अवसर देने चाहिए। बच्चों को. गलती करने एवं उसे स्वयं सुधारने का पर्याप्त अवसर देना चाहिए।
  • शिक्षकों को प्रयोगात्मक शिक्षा एवं व्यावहारिक शिक्षा पर बल देना चाहिए। प्रयोगों के माध्यमों से बालकों में नवीन विचार का संचार होता है। नवीन दृष्टिकोण मौलिक अन्वेषण के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण होता है। शिक्षक को वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करते रहना चाहिए यह प्रतियोगिता नवीन सोच एवं नवीन विचारों को जन्म देती है।

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