बाल केन्द्रित शिक्षा के उद्देश्य

बाल-केन्द्रित शिक्षा के उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • बाल-केन्द्रित शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बालक का चहुंमुखी विकास करना है।
  • बाल केन्द्रित शिक्षा के अन्तर्गत हस्तपरक गतिविधियों पर बल दिया जाता है।
  • भारतीय शिक्षाविद् गिजू भाई की बाल-केन्द्रित शिक्षा के क्षेत्र में विशेष एवं उल्लेखनीय भूमिका रही है। बाल-केन्द्रित शिक्षा के बारे में समझाने एवं इसे क्रियान्वित रूप देने के लिए उन्होंने इससे सम्बन्धित कई प्रकार की पुस्तकों की रचना की तथा कुछ पत्रिकाओं का भी प्रकाशन किया।
  • उनका साहित्य बाल-मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र एवं किशोर-साहित्य से सम्बन्धित है। इन्होंने भारत में मॉण्टेसरी शिक्षा विकसित करने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। 1920 में इन्होंने बच्चों के लिए एक पूर्व प्राथमिक (Pre primary) स्कूल खोला जिसका नाम इन्होंने ‘बाल मंदिर’ रखा।
  • जॉन डी.वी. ने बाल-केन्द्रित शिक्षा का समर्थन किया है। जॉन डी.वी. द्वारा समर्थित ‘लैब विद्यालय’ प्रगतिशील विद्यालय का उदाहरण है।
  • जॉन डी.वी. के अनुसार, “शिक्षा एक त्रिध्रुवीय प्रणाली है, जिसके अन्तर्गत शिक्षक, बालक एवं पाठ्यक्रम आते हैं।”
  • आज की शिक्षा पद्धति बाल-केन्द्रित है। इसमें प्रत्येक बालक की ओर अलग से ध्यान दिया जाता है पिछड़े हुए और मन्दबुद्धि तथा प्रतिभाशाली बालकों के लिए शिक्षा का विशेष पाठ्यक्रम देने का प्रयास किया जाता है।
  • बालकों की प्रवृत्ति, रुचियों एवं क्षमताओं के बारे में शिक्षक को जानकारी रखनी चाहिए।
  • व्यावहारिक मनोविज्ञान ने व्यक्तियों की परस्पर विभिन्नताओं पर प्रकाश डाला है, जिससे यह सम्भव हो सका है कि शिक्षक हर एक विद्यार्थी की विशेषताओं पर ध्यान दें और उसके लिए प्रबन्ध करें।

आज के शिक्षक को केवल शिक्षा एवं शिक्षा पद्धति के बारे में नहीं, बल्कि शिक्षार्थी के बारे में भी जानना होता है, क्योंकि आधुनिक शिक्षा विषय-प्रधान या अध्यापक-प्रधान न होकर बाल-केन्द्रित है। इसमें इस बात को महत्त्व नहीं दिया गया है कि शिक्षक कितना ज्ञानी, आकर्षक और गुणयुक्त है, बल्कि इस बात का महत्त्व है कि वह बालक के व्यक्तित्व का कहाँ तक विकास कर पाता है।

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