समावेशी शिक्षा की आवश्यकता

Need for inclusive education

मनोवैज्ञानिकों ने विचार दिया है कि समावेशी शिक्षा हमारे सामान्य विद्यालयों में दी जाए जिससे सभी बालकों को शिक्षा के समान अवसर मिलें। इस आवश्यकता के कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

सामान्य मानसिक विकास सम्भव बनाने हेतु (To make normal mental development possible)

विशिष्ट शिक्षा में मानसिक जटिलता मुख्य है। अपंग बालक अपने आपको दूसरे बालकों की अपेक्षा तुच्छ तथा हीन समझते हैं। समावेशी शिक्षा व्यवस्था में, अपंगों को सामान्य बालकों के साथ मानसिक रूप से प्रगति करने का अवसर प्रदान किया जाता है। प्रत्येक बालक सोचता है कि वह किसी भी प्रकार से अन्य बच्चों से कम नहीं है। इस प्रकार समावेशी शिक्षा पद्धति बालकों की सामान्य मानसिक प्रगति को अग्रसरकरती है।

सामाजिक एकीकरण को सुनिश्चित करने हेतु (To ensure social integration)

बाधित बालकों में कुछ सामाजिक गुण बहुत संगत होते हैं, जब वे सामान्य बालकों के साथ शिक्षा पाते हैं, तब एकीकरण के कारण वे सामाजिक गुणों को अन्य बालकों के साथ ग्रहण करते हैं। उनमें सामाजिक, नैतिक, प्रेम, सहानुभूति, आपसी सहयोग आदि गुणों का विकास होता है।

समानता के सिद्धान्त का अनुपालन करने हेतु (To comply with the principle of equality)

भारत में, सामान्य शिक्षा के लिए व्यापक रूप से विस्तार की संवैधानिक व्यवस्था की गई है और साथ-साथ शारीरिक रूप से बाधित बालकों के लिए शिक्षा को व्यापक रूप देना भी संविधान के अन्तर्गत दिया गया है। समावेशी शिक्षा के द्वारा ही समानता के उद्देश्य की प्राप्ति सम्भव है जिससे कोई भी छात्र अपने आप को दूसरों की अपेक्षा हीन न समझे।

फिजूलखर्ची को कम करने हेतु  (To reduce waste)

नि:सन्देह विशिष्ट शिक्षा अधिक महँगी तथा खर्चीली है। इसके अलावा विशिष्ट अध्यापक एवं शिक्षाविदों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी अधिक समय लेते हैं जबकि समावेशी शिक्षा कम खर्चीली तथा लाभदायक है। विशिष्ट शिक्षा संस्था को बनाने तथा शिक्षण कार्य प्रारम्भ करने के लिए अन्य विभिन्न स्रोतों से भी सहायता लेनी पड़ती है; जैसे प्रशिक्षित अध्यापक, विशेषज्ञ, चिकित्सक आदि।

समावेशी शिक्षा के माध्यम से एकीकरण करने हेतु (To integrate through inclusive education)

विशिष्ट शिक्षण व्यवस्था की अपेक्षा समावेशी शिक्षण व्यवस्था में सामाजिक विचार-विमर्श अधिक किए जाते हैं। अपंग तथा सामान्य बालक में सामान्य शिक्षा के अन्तर्गत एक प्राकृतिक वातावरण बनाया जाता है। अपने सहपाठियों से सीखना एवं उनको सिखाना समावेशी शिक्षा द्वारा सम्भव है।

शैक्षिक एकीकरण को सम्भव बनाने हेतु (To make educational integration possible)

शैक्षिक एकीकरण सामान्यतया समावेशी शिक्षा के वातावरण द्वारा सम्भव है। शिक्षाविदों का ऐसा विश्वास है कि विशिष्ट शिक्षा संस्था में एक बालक के प्रवेश के पश्चात् समान शैक्षिक योग्यता रखने वाला अपंग बालक उनके गुणों को ग्रहण करता है। लचीले वातावरण तथा आधुनिक पाठ्यक्रम के साथ समावेशी शिक्षा शैक्षिक एकीकरण लाती है।

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