हरियाणा प्रदेश का आधुनिक साहित्य

साहित्य मानव मन की अभिव्यक्ति है। एक तरफ जहाँ पद्य के माध्यम से मानव मन की संवेदनाओं की अभिव्यक्ति होती है तो दूसरी ओर गद्य को मानव मन के चिन्तन की अभिव्यक्ति की शैली माना जाता है। हिन्दी भाषा में गद्य शैली का विकास सामाजिक परिस्थितियों के बहाव के अनुसार ही साकार हुआ है। हरियाणा के साहित्यकारों का हरियाणा प्रदेश का गद्य साहित्य के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है।

प्रदेश के साहित्यकारों ने गद्य की विभिन्न विधाओं को अपनी प्रतिभा तथा रचनाशीलता से सींचा है।

हरियाणा प्रदेश के गद्य शैली का प्रकार -निबंध(Essay -type of prose style of haryana pradesh)

निबंध गद्य शैली का परिपक्व रूप है। निबंध के क्षेत्र में प्रदेश में डॉ. हरिश्चन्द्र वर्मा, डॉ. पुष्पा बंसल, डॉ. रूपनारायण शर्मा, जगदीश कौशिक, डॉ. ब्रजवाल गोस्वामी, डॉ. जयभगवान गोयल, डॉ. शशिभूषण सिंहल, डॉ. कृष्ण मधोक तथा डॉ. योगेश्वर देव जैसे साहित्यकार हुए हैं जिन्होंने अपनी लेखनी से निरंतर इस विधा की सेवा की है।

बाबू बालमुकुन्द गुप्त को प्रदेश ही नहीं देश के निबंधकारों में बड़े सम्मान से याद किया जाता है। गुप्त जी मलत: उर्द पत्रकार थे परन्त व्याख्यान वाचस्पति दीनदयाल शर्मा जी की प्रेरणा से हिन्दी लेखन से जुड़ गए। इन्होंने ‘भारत मित्र’ नामक पत्र के माध्यम से गाली धार्मिक तथा सामाजिक समस्याओं पर अनेक व्यंग्य लेखों को जनता तक पहुंचाया। “शिव शंभु का चिट्ठा’ इनकी कालजयी रचना मानी जाती है।

भिवानी जिले के कंगड ग्राम में जन्मे पं. माधव प्रसाद मिश्र जी प्रदेश के प्रमुख साहित्यकार रहे हैं। इनके संपूर्ण साहित्य को ‘माधव मिश्र नियमावली’ तथा ‘माधव मिश्र ग्रन्थावली’ में संकलित किया गया है। प्रदेश के अन्य निबंधाकार

  • विश्वंभर नाथ कौशिक-विश्वंभर नाथ जी ने ‘दिव्यचक्षु’ के नाम से हास्य-व्यंग्यपूर्ण निबंधों की रचना की थी।
  • भदंत आनंद कौसल्यायन-भदन्त आनन्द जी ने जो भूल न सका’ नामक निबंध संग्रह के माध्यम से अपने निबंधों को तक पहुँचाया था।
  • जयनाथ नलिन-नलिन जी प्रदेश के प्रमुख निबंधकारों में शुमार किए जाते हैं। इन्होंने ‘प्रस्ताव प्रभा’, ‘चिन्तन और कला’ तथा ‘मझधार के यार’ नामक निबंध संग्रह लिखे थे।

हरियाणा प्रदेश के गद्य शैली का प्रकार-उपन्यास(Prose style type novel of haryana pradesh)

उपन्यास मानव जीवन की यथार्थ व्याख्या का एक सशक्त माध्यम है। प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार विशंबरनाथ कौशिक का जन्म अंबाला में हुआ था। बाद में उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया। 1929 में इनके दो उपन्यास ‘माँ’ तथा ‘भिखारिणी’ प्रकाशित ह।

श्री मोहन चोपडा को हरियाणा का प्रथम सफल उपन्यासकार माना जाता है। उन्होंने ‘बाहे’, ‘नीड़ के आगे’, ‘एक छाया और मैं” ‘ट्टा हुआ आदमी’ ‘सबह के पहले’ तथा ‘ये नये लोग’ आदि कुल छ: उपन्यासों की रचना करके इस विधा को एक नया आधार प्रदान किया। राकेश वत्स ने जीवित चट्टानें’, ‘सागर और कल्पना’, ‘मर्यादा’, ‘फिर लौटते हुए’ तथा ‘जंगल के आसपास’ सहित कुल दस उपन्यासों की रचना की है।

एक अन्य उपन्यासकार स्वदेश दीपक ने दो उपन्यास- ‘नंबर 57 स्क्वाइन’ तथा ‘माया पोत’ लिखे। इनका उपन्यास नबर 7 स्क्वाड्रन’ भारत-पाक युद्ध की कहानी पर आधारित है।

हरियाणा प्रदेश के प्रसिद्ध उपन्यासकार और उनकी रचनाएँ(Famous novelist of Haryana state and his compositions)

  • रचनाए                                                                                                       उपन्यासकार
  •   मुझे भूल जाना, बसन्त फिर आयेगा, टूटते बंधन, सीप का मोती,                 हेमराज ‘निर्गम’

  जाल और मुक्ति, लाल बहादुर, प्रतीक्षा तथा तराशे हुए पत्थर

  • अपने पराए, जानी अनजानी राहें।                                                              शशिभूषण सिंहल
  • शेष-अशेष, अब नहीं, अपराजेय, मैंने नहीं लिखा महाभारत                        शुगन चन्द ‘मुक्तेश
  • लाल धूप, अपने-अपने अंधेरे, सिंधु पुत्र                                                       अमृतलाल मदान
  • अंधा सफर                                                                                                कृष्ण मदहोश
  •  टूटे सपने                                                                                                  सुभाष  रस्तोगी
  • चौधरी साहब                                                                                             भीष्म पितामह
  • गाँव की ओर                                                                                              मधुकान्त
  • साये अपने-अपने                                                                                      राजकुमार निजात
  • माटी का मोल, बूढी सुहागिन                                                                    जयनारायण कौशिक
  • अमानत एक शहीद की                                                                            कृष्ण बाछल
  • वन और पगडंडियाँ                                                                                  उर्मि कृष्ण

हरियाणा प्रदेश के मुख्य कथाकार एवं उनकी रचनाएँ(Chief narrator of Haryana state and his compositions)

हिन्दी कहानी के क्षेत्र में हरियाणा के कथाकारों का योगदान उल्लेखनीय है। श्री हरिकृष्ण देवसरे ने पं. माधव प्रसाद मिश्र जी द्वारा लिखित कहानी ‘मन की चंचलता’ को हरियाणा में हिन्दी की प्रथम कहानी स्वीकार किया है। परन्तु, श्री मुरारी गोयल पं. माधव प्रसाद मिश्र की हिन्दी कहानी ‘लड़की की बहादुरी’ को हिन्दी की प्रथम कहानी के रूप में सम्मान देते हैं। ‘आख्यायिका सप्तक’ मिश्र जी की कहानियों का कथा-संग्रह है।

श्री विशंभरनाथ कौशिक ने लगभग 200 कहानियाँ लिखीं। इनके द्वारा रचित कहानियों में रक्षा बंधन, ताई, गल्प मन्दिर, साध की होली, चित्रशाला, पैरिस की नर्तकी तथा प्रतिशोध आदि प्रमुख हैं। 2 साहित्यकार मोहन चोपड़ा ने 100 से अधिक कहानियों की रचना की थी। इनके प्रमुख कथा-संग्रह हैं-आधा कटा हुआ सूर्य, पीले पत्ते, शाम और अकेला आदमी तथा बन्द दरवाजा आदि।

आजादी के बाद के कथाकारों में श्री जयनाथ ‘नलिन’ प्रमुख थे। इनके प्रतिष्ठित कथा संग्रह हैं-झुरमुट, सिक्के, असली-नकली तथा जवानी का नशा आदि।

प्रदेश के कुछ प्रसिद्ध कहानीकार एवं उनके कहानी संग्रह

  •     कथाकार                                             कथा संग्रह
  • शशिभूषण सिंहल                                      यह जग वे सपने
  • राकेश वत्स                                               पहर एक रोज का, अन्तिम प्रजापति, अभियुक्त, इन हालात में
  • स्वदेश दीपक                                            अश्वारोही, मातम, तमाशा, मसखरे कभी नहीं रोते
  • राजेन्द्र मोहन भटनागर गंदी                      बस्ती, चाणक्य की हार, गौरैया, पलाश के फूल आदि
  • डॉ. के.पी. सिंह                                         समांतर

हरियाणा प्रदेश की काव्य साधना(Poetry in the state of Haryana)

हरियाणा में महाकाव्य, खण्डकाव्य, समकालीन कविता तथा गजल सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। प्रदेश में कई ऐसे प्रतिभाशाली कवि हुए हैं जिन्होंने एक ही समय विभिन्न शैलियों में साहित्य सृजन किया है।

  • महाकाव्य तथा प्रबंध काव्य-भिवानी के निवासी कवि तुलसीदास की 50 से अधिक कृतियाँ उपलब्ध हैं। इनकी काव्य-कृतियों में ‘पुरुषोत्तम महाकाव्य’, ‘भक्त भारती’, ‘मतवाली मीरा’ तथा ‘श्याम सतसई’ आदि प्रमुख हैं। श्री रत्न चन्द्र शर्मा ने पाँच महाकाव्यों-निषाद राज, अग्नि परीक्षा, अश्वत्थामा, रामराज्य तथा वनगमन की रचना की है। इनके अलावा ‘राज्य कवि’ उदयभानु हंस ने ‘सन्त सिपाही’ तथा ‘हरियाणा गौरव गाथा’ नामक प्रबंध काव्यों की रचना की थी।

हरियाणा प्रदेश के महत्त्वपूर्ण कवि और उनके महाकाव्य(Important poets of Haryana state and their epic)

  •           कवि                                                      महाकाव्य
  • पुरुषोत्तम दास ‘निर्मल’                                    विधुरा, महाभारत रत्न, वेणु गोपाल, पद्मेश
  • जयनाथ नलिन                                                 देवयानी
  • ब्रह्मदत्त वाग्गिम                                                मेड़तानी मीरा
  • शगुनचन्द ‘मुक्तेश’                                           युगान्तर
  •  निरंजन सिंह ‘योगमणि’                                   शिवचरित
  •  धर्मचन्द विद्यालंकार                                        सूरजमल शौर्य गाथा

हरियाणा प्रदेश के महत्त्वपूर्ण कवि और उनके खण्डकाव्य(Important poets of Haryana and their epic poems)

  •           कवि                                                        खण्डकाव्य
  • खुशीराम वशिष्ठ                                                    रण निमंत्रण
  • चरण लाल ‘नीरस’                                                 बांग्लोदय
  • धर्मचन्द्र विद्यालंकार                                              गोकुल गौरव नाहर सिंह कीर्ति गाथा
  •  भगवान दास ‘निर्मोही’                                          इन्दिरांजलि
  •  राम निवास ‘मानव’                                              इन्द्रकील, अंगुलिमाल
  • डॉ. लीलाधर ‘वियोगी’                                          बेतवा की लहरें, प्रथम दिवस आषाढ़ का, पीड़ा की पगडंडियाँ

 

हरियाणा प्रदेश के साहित्यकार एवं उनकी प्रमुख गज़ल रचनाएँ(Writers of Haryana state and their major ghazal compositions)

देश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में हरियाणा में गज़ल का विकास तीव्र गति से हुआ। परंपरागत गजलों को हिन्दी की प्रकृति तथा हरियाणा की संस्कृति के अनुसार ढालने में श्री विमल कृष्ण ‘अश्क’, बी.डी. कालिया ‘हमदम’, प्रो. आर.पी. शोख, महेन्द्र प्रताप ‘चांद’ तथा कुन्दन गुड़गांवी आदि शायरों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।

1982 में हरियाणा साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित विजय कुमार सिंहल के गज़ल संग्रह ‘धूप हमारे हिस्से की’ हरियाणा का प्रथम गज़ल संग्रह माना जाता है।

प्रदेश के कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण गजलकारों तथा उनकी कृतियों को यहाँ सूचीबद्ध किया गया है।

  •      गजलकार                                                गज़ल संग्रह
  • राणा गन्नौरी                                                      रोशनी की लकीर
  • विजय कुमार सिंहल                                        धूप हमारे हिस्से की, बर्फ से ढका ज्वालामुखी, सात समुन्दर प्यासे, धुंध से गुजरते हुए
  • ज्ञान प्रकाश ‘विवेक’                                        धूप के हस्ताक्षर, आँखों पर आसमान, इन मुश्किल दिनों में
  • सुरेन्द्र वर्मा                                                      आइनों में तलाश चेहरे, आज के दशरथ, आइने बोलते हैं
  • माधव कौशिक                                              आइनों के शहर में, किरण सुबह की, सपने खुली निगाहों के,

हाथ सलामत रहने दो,आसमान सपनों का

हरियाणा प्रदेश के समकालीन काव्य एवं आधुनिक कवि(Contemporary Poetry and Modern Poets of Haryana Pradesh)

हरियाणा के कवियों ने सभी काव्यांदोलनों से खुद को अलग रखकर काव्य रचना की है। 20वीं सदी के आठवें दशक के बाद के कवियों को समकालीन कवियों की श्रेणी में रखा जा सकता है। साहित्य जगत में हरियाणा का नाम रोशन करने वाले कुछ महत्त्वपूर्ण समकालीन कवियों की चर्चा यहाँ की गई है।

  • जयनाथ ‘नलिन’-रचनाकार जयनाथ ‘नलिन’ की प्रमुख रचनाएँ हैं-यामिनी, धरती के बोल, इस पार के बंधन आदि। ‘देवयानी’ इनके द्वारा रचित नाट्य-काव्य है।
  • पदम सिंह शर्मा ‘कमलेश’-इनके प्रमुख कविता संग्रह है-तू युवक है, दूब के आंसू, धरती पर उतरी तथा एक युग बीत गया।
  • खंडेलवाल ” तरुण’-खंडेलवाल जी की प्रमुख कृतियाँ हैं-प्रथम किरण, हिमाचल, धूपदीप, आंधी और चांदनी तथा अग्नि संगीत आदि।
  • खशी राम वशिष्ठ-कवि खुशी राम वशिष्ठ, प्रबंध तथा मुक्तक दोनों धाराओं के यशस्वी कवि हैं। इनके हैं-प्रेमोपहार, आंसू, फूल और अंगारे, बुद्धचरित, मीराबाई तथा गुरु गोविन्द सिंह आदि।
  • राजकवि श्री उदयभानु ‘हंस’ -राजकवि श्री उदयभानु ‘हंस’ जी की ख्याति ‘रुबाई सम्राट’ के रूप में है। उदयभानु हंस की प्रमुख रचनाएँ हैं-हिन्दी रुबाइयाँ, हंस मुक्तावली, धड़कन, सरगम, अमृत क्लश तथा वन्दे मातरम्।
  • डॉ. भगवानदास ‘निर्मोही’-भगवानदास ‘निर्मोही’ की कविताओं का क्षेत्र बडा ही व्यापक है। इनका प्रमुख रचनाए ह-निमाहा’, ‘चांद उतर धरती पर आओ’, ‘रोती मस्कानें’, ‘तेरा दर्पण-मेरी आँखें’ तथा ‘सपने और धड़कन आदा
  • डॉ. हरिश्चन्द्र वर्मा-कवि तथा शिक्षक के रूप में विख्यात डॉ. हरिश्चन्द्र वर्मा जी की प्रमुख काव्य रचनाए ह- नई पाढ़ा नए स्वर’, ‘संकल्पों के स्वर’, सूरज नहीं बुझेगा’, छक्के पर छक्का आदि।
  • पुष्या मानकोटिया-पुष्पा मानकोटिया जी ने अपनी लेखनी नारी के संघर्ष और भावनाओं को समर्पित की है। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं-बटोर रही हूँ बिसरी यादें, सुबह की तलाश, शब्दों का इंतजार तथा तुम्हारे पहनाए पख।
  • राकेश वत्स-साहित्यकार तथा कवि राकेश वत्स जी वाम-चेतना के कवि हैं। इनके दो प्रमुख काव्य-संग्रह हैं- “मुझे यकीन है’, ‘ज़रा और कविता’।
  • डॉ. चन्द्र त्रिखा-डॉ. चन्द्र त्रिखा राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पत्रकार, कवि तथा गजलकार हैं। इनकी प्रमुख काव्य कृतियाँ हैं-पाषाण युग, शब्दों का जंगल, काली नदी के उस पार तथा दोस्त।

हरियाणा प्रदेश के आधुनिक कवि देवी शंकर प्रभाकर(Modern Poet of Haryana Pradesh Devi Shankar Prabhakar)

देवी शंकर प्रभाकर-हरियाणवी लोक साहित्य तथा सांस्कृतिक इतिहास के क्षेत्र में देवी शंकर प्रभाकर जी का अद्वितीय योगदान है। इनके हरियाणवी कविता संग्रह ‘जगमग जगरा’ में संकलित 50 कविताओं में हरियाणा के ग्रामीण परिवेश का बड़ा ही सुन्दर चित्रण किया गया है। ‘स्वाधीनता संग्राम और हरियाणा-एक अध्ययन’ इनकी बहुचर्चित रचना है। प्रसिद्ध हरियाणवी फिल्म ‘चन्द्रावल’ हरियाणवी संस्कृति को प्रभाकर जी की अनुपम भेंट है। इस फिल्म की पटकथा देवी शंकर प्रभाकर ने ही लिखा था। इनके अलावा हरियाणा के कवियों में श्री राधेश्याम शुक्ल, डॉ. दिनेश दधीचि, डॉ. प्रदीप स्नेही, दिनेश रघुवंशी, सुरेन्द्र वमो, घमंडी लाल अग्रवाल, डॉ. सुभाष रस्तोगी, रामकुमार आगेय, ज्ञान प्रकाश ‘विवेक’, रामनिवास ‘मानव’, अरूण कुमार ‘जैमिनी’, सुरेन्द्र शर्मा
तथा डॉ. राजेन्द्र गौतम का प्रमुख योगदान है।

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