हरियाणा प्रदेश के प्रमुख मेले(Major Fairs of Haryana Pradesh)

‘मेला’ शब्द ‘मेल’ की भाववाचक संज्ञा है। ‘मेला’ शब्द का अभिप्राय है-मिलने या इकट्ठे होने के समागम। मेले मौज-मस्ती, मिलन तथा धूम मचाने के संकेतक हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो मेलों और त्योहारों के रूप में समाज की आत्मा बोलती है और लोगों के हृदय की भावनाएँ मुखरित होती हैं। हरियाणा प्रदेश में लगने वाले कुछ मेलों की प्रसिद्धि पूरे देश में फैली हुई है। हरियाणा प्रदेश में कई तीर्थ स्थल, मन्दिर, मठ, गुरुद्वारे, शिवालय, मकबरे तथा मजारें बनी हुई हैं जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। सूर्यग्रहण के अवसर पर कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर में लाखों श्रद्धालु स्नान करने आते हैं।

प्रदेश में लगने वाले कुछ प्रमुख मेलों को यहाँ सूचीबद्ध किया गया है|

हरियाणा प्रदेश में सूर्य ग्रहण का मेला, कुरुक्षेत्र(Solar eclipse fair in Haryana, Kurukshetra)

कुरुक्षेत्र गीता की भूमि है। कुरुक्षेत्र के जल, थल तथा अन्तरिक्ष तीनों को ही मोक्षदाई माना जाता है। कुरुक्षेत्र स्थित ब्रह्मसरोवर एक पौराणिक तीर्थ है। ऐसी मान्यता है कि इस सरोवर का निर्माण स्वयं ब्रह्मा जी ने करवाया था। सूर्य ग्रहण, सोमवती अमावस्या तथा मकर संक्रान्ति के अवसर पर यहाँ विशाल मेला लगता है। ब्रह्म सरोवर पर लगने वाले सूर्य ग्रहण मेले को अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है। भारतीय संस्कृति के इस उत्सव में विदेशों से भी श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस अवसर पर यहाँ अनेकों धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

हरियाणा प्रदेश का अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव(International Geeta Festival of Haryana Pradesh)

कुरुक्षेत्र को हरियाणा का धार्मिक केन्द्र माना जा सकता है। कुरुक्षेत्र से 48 कोस की परिधि में लगभग 360 धार्मिक स्थल है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी स्थान पर ब्रह्माजी ने ब्रह्माण्ड की रचना की थी तथा लगभग 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसी भूमि से दुनिया को कर्म की शिक्षा मिली थी।

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पूरे विश्व में गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। हरियाणा सरकार द्वारा इस अवसर पर प्रतिवर्ष कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्मसरोवर पर ‘गीता महोत्सव’ का आयोजन किया जाता है। वर्ष 2017 से इस उत्सव का आयोजन वैश्विक स्तर पर किया जा रहा है। 2017 में 17 नवम्बर से 3 दिसम्बर तक कुरुक्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया गया। इस महोत्सव का शुभारंभ कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, हरियाणा पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन, उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला तथा सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है। इस महोत्सव का शुभारंभ महामहीम राष्ट्रपति जी द्वारा किया गया।

गीता महोत्सव में संतों के द्वारा गीता के 18,000 श्लोकों का उच्चारण किया जाता है। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र में एक कला मेले का आयोजन भी किया जाता है तथा बहुत सारे सांस्कृतिक, आर्थिक तथा आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

हरियाणा प्रदेश का अन्तर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला, सूरजकुण्ड (फरीदाबाद)[International Handicraft Fair of Haryana State, Surajkund (Faridabad)]

फरीदाबाद जिले के सूरजकुण्ड में फरवरी मास के प्रथम पखवाड़े में अन्तर्राष्ट्रीय शिल्प एवं कला मेले का आयोजन किया जाता है। 15 दिन तक चलने वाले इस मेले के प्रमुख आकर्षण यहाँ प्रदर्शित किए जाने वाले हस्तशिल्प उत्पाद हैं। यह मेला दुनिया के सबसे बड़े कला मेलों में से एक है। – इस मेले का आयोजन हरियाणा सरकार के पर्यटन विभाग तथा सूरजकुण्ड मेला प्राधिकरण द्वारा केन्द्रीय पर्यटन विभाग, कपड़ा मंत्रालय तथा सांस्कृतिक मंत्रालय के सहयोग से किया जाता है।

31वें सूरजकुण्ड कला मेले का आयोजन फरवरी 2017 में किया गया। वर्ष 2018 में 2 फरवरी से 18 फरवरी के बीच इस कला मेले के 32वें संस्करण का आयोजन किया गया। इस कला मेले में 20 से अधिक देशों ने भाग लिया तथा इस मेले का थीम राज्य उत्तर प्रदेश था।

सूरजकुण्ड कला मेले में देश-विदेश से सैंकड़ों कलाकार तथा शिल्पकार अपने हस्तशिल्प तथा कलात्मक उत्पादों का प्रदर्शन करते हैं।

वर्ष 2013 से इस मेले को अन्तर्राष्ट्रीय मेले के रूप में आयोजित किया जाता है। इस मेले में शिल्प तथा हथकरघा उत्पादों के प्रदर्शन के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

हरियाणा प्रदेश में पिंजौर का आम मेला, पिंजौर (पंचकूला) [Pinjore (Panchkula) mango fair in Haryana state]

पंचकूला जिले के पिंजौर के यादवेन्द्र उद्यान में जुलाई माह में प्रसिद्ध आम मेला लगता है। इस मेले में छात्रों, कृषि वैज्ञानिकों तथा दर्शकों  के लिए विभिन्न प्रदेशों में उगाई जाने वाली आम की सैंकड़ों प्रजातियाँ प्रदर्शित की जाती हैं। इस मेले का आयोजन हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा सन् 1992 से किया जा रहा है। यह मेला आम उत्पादकों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का विश्वस्तरीय मंच प्रदान करता है। इस आम मेले में आम उत्पादकों के लिए विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है तथा विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

हरियाणा प्रदेश में गूगा नवमी के मेले

हरियाणा प्रदेश में गूगा नवमी का त्योहार पूरी श्रद्धा से मनाया जाता है। गूगा नवमी के अवसर पर गाँवों तथा शहरों में गूगा पीर की छड़ी की शोभायात्रा निकाली जाती है तथा जगह-जगह मेले लगते हैं। भादों मास के शुक्ल पक्ष की नवमी (गूगा नवमी) के अवसर पर हिसार जिले के बाडयां ब्राह्मण तथा रोहनात गाँवों, अंबाला जिले के केसरी नामक गाँव, गुरुग्राम जिले के इस्लामपुर गाँव, फरीदाबाद जिले के बहबलपुर गाँव, महेन्द्रगढ़ के कनीना तथा नारनौल, झज्जर जिले के बादली तथा करनाल जिले के खेड़ा आदि गाँवों में गूगा नवमी के मेले लगते हैं। गूगा नवमी के अवसर पर प्रदेश में दंगल तथा कबड्डी की प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है। इन विश्व प्रसिद्ध मेलों के अलावा हरियाणा प्रदेश में समय-समय पर विभिन्न तीज-त्योहारों, उत्सवों तथा नवरात्रों के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर मेले लगते हैं, जो प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को चार चांद लगाते हैं। इनमें से कुछ को यहाँ सूचीबद्ध किया गया है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *