कुरुक्षेत्र जिले के प्रमुख शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान

Major Educational and Training Institutes of Kurukshetra District

कुरुक्षेत्र जिले में अनेको राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संसथान हैं जिनमे से कुछ को हमने यहाँ अंकित किया है

कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय – कुरूक्षेत्र (Kurukshetra University – Kurukshetra)

कुरूक्षेत्र स्थित कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय (KU) हरियाणा का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1956 में हुई थी। 400 एकड़ मे विस्तृत कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय की नींव भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद ने रखी थी। प्रारंभ में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में केवल संस्कृत शिक्षण होता था। बाद में यह बहुसंकाय विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हुआ। खिलाड़ियों के लिए प्रदेश का पहला बैलोड्रम कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में स्थापित किया गया है। मार्च 2018 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा देश के 50 विश्वविद्यालयों को पूर्ण स्वायतता प्रदान की गई है। कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय भी इनमें से एक है।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एन.आई.टी.) (National Institute of Technology (NIT))

कुरूक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एन.आई.टी.) को पूर्व में क्षेत्रीय अभियान्त्रिकी महाविद्यालय (आर. ई.सी.) के नाम से जाना जाता था। 1963 मे स्थापित इस संस्थान को 26 जून, 2002 को भारत सरकार द्वारा मानित विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया। इससे पूर्व यह संस्थान कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबंद्ध था। एन.आई.टी. कुरूक्षेत्र देश के 20 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक है। वर्ष 2007 में इस संस्थान को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा मिला।

गीता इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एण्ड टेक्नोलॉजी (Geeta Institute of Management and Technology)

निजी क्षेत्र का यह तकनीकी संस्थान 2007 में स्थापित हुआ था।

श्री कृष्णा आयुश विश्वविद्यालय-कुरूक्षेत्र (Shri Krishna Ayush University – Kurukshetra)

1 मई, 1972 को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री गुलजारी लाल नंदा द्वारा कुरूक्षेत्र में श्री कृष्ण आयुर्वेदिक महाविद्यालय की नींव रखी गई। 6 जून, 1975 को हरियाणा सरकार ने इस आयुर्वेदिक महाविद्यालय का अधिग्रहण कर लिया। इस महाविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों की सहूलियत के उद्देश्य से हरियाणा सरकार ने श्री कृष्ण आयुर्वेदिक महाविद्यालय का प्रशासनिक नियंत्रण 15 अप्रैल, 1977 से महर्षि दयानद विश्वविद्यालय को दे दिया। 1 अप्रैल, 1980 को महाविद्यालय को पुनः हरियाणा सरकार द्वारा अधिगृहीत कर लिया गया। वर्ष 2016 में हरियाणा सरकार द्वारा इस महाविद्यालय को प्रदेश के प्रथम आयुश विश्वविद्यालय के रूप में प्रोन्नत करने का निर्णय लिया गया। यह विश्वविद्यालय उत्तर भारत का एक मात्र विश्वविद्यालय है जो प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को समर्पित है।

इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग टेक्नॉलॉजी एण्ड अप्लाइड न्यूट्रीशन – कुरूक्षेत्र (Institute of Hotel Management, Catering Technology and Applied Nutrition Kurukshetra)

कुरूक्षेत्र के ज्योतिसर में स्थित यह स्वायत-शासी शिक्षण संस्थान भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय यहां से नई लाइन में लिखें तथा पर्यटन विभाग, हरियाणा सरकार द्वारा सामूहिक रूप से प्रायोजित है। इस संस्थान में प्रथम सत्र वर्ष 2008 में आरंभ हुआ। राष्ट्रीय स्तर के इन शिक्षण संस्थानों के अलावा कुरूक्षेत्र जिले में स्थित कुछ अन्य तकनीकी संस्थान हैं:

  • कुरूक्षेत्र इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एण्ड टेक्नॉलॉजी, भौर सैदां।
  • श्री कृष्ण इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नॉलॉजी, कुरूक्षेत्र।
  • टेक्नीकल एजुकेशन एण्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कुरूक्षेत्र

इन सबके अलावा जिले का जवाहर नवोदय विद्यालय, कुरूक्षेत्र जिले के निवारसी गाँव में स्थित है।

कल्पना चावला स्मारक तारामण्डल, ज्योतिसर-कुरूक्षेत्र (Kalpana Chawla Memorial Planetarium, Jyotisar-Kurukshetra)

प्रदेश में खगोल विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से हरियाणा राज्य विज्ञान एवं तकनीकी परिषद् ने राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद् के सहयोग से जिले के ज्योतिसर तीर्थ के निकट कल्पना चावला स्मारक तारामण्डल का निर्माण किया है। 6.5 करोड़ की लागत से बने 5 एकड़ में विस्तृत इस तारामण्डल को 24 जुलाई, 2007 को राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने राष्ट्र को समर्पित किया। इस तारामण्डल के लिए तकनीकी सहयोग एवं यंत्रों की व्यवस्था राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद्, कोलकाता द्वारा की गई है। तारामण्डल में बना ‘एस्ट्रो-पार्क’ छात्रों तथा खगोल विज्ञान में रूचि रखने वाले लोगों को खगोल विज्ञान संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाता है। 12 मी. के गुंबद में बने तारामण्डल में एक साथ 120 व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था है।

श्री कृष्ण संग्रहालय कुरूक्षेत्र (Shri Krishna Museum Kurukshetra)

भगवान श्री कृष्ण की शिक्षाओं और उनके दर्शन के प्रसार के लिए वर्ष 1981 बोर्ड द्वारा कुरूक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर तीर्थ के निकट श्री कृष्ण संग्रहालय की स्थापना की गई। 28 तुला, तत्कालीन राष्ट्रपति श्री आर.वेंकटरमन ने इस संग्रहालय के प्रथम खण्ड की इमारत का उद्घाटन किया। श्रा खण्ड वर्ष 1995 में बन कर तैयार हुआ। संग्रहालय के तीसरे खण्ड को तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा पाट को राष्ट्र को समर्पित किया। इस खण्ड में गीता गैलरी बनाई गई है तथा महाभारत के प्रदर्शन की व्यवस्था पटकथा श्री कृष्ण, करूक्षेत्र तथा महाभारत पर आधारित है। संग्रहालय में स्थित गीता गैलरी की स्थापना हारमा भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के साथ मिलकर की है।

हरियाणा सिंचाई अनुसंधान एवं प्रबंधन संस्थान – कुरूक्षेत्र (Haryana Irrigation Research and Management Institute – Kurukshetra)

हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग क कमवा कर्मचारियों, स्वयं सेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं तथा किसानों के प्रशिक्षण और जल प्रबंधन की विभिन्न तकनाका का के लिए वर्ष 1998 में हरियाणा सरकार ने करुक्षेत्र में इस संस्थान की स्थापना की। हरियाणा के सिंचाई एव जल सलाम के प्रधान सचिव इस संस्थान के पदेन अध्यक्ष होते हैं। इस संस्थान में समय-समय पर कार्यशालाओं तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमा का आयोजन करके बेहतर जल प्रबंधन के उपायों पर जानकारी दी जाती है।

कुरुक्षेत्र जिले की सम्पूर्ण जानकारी

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