महाराजा सूरजमल

1707 . में औरंगजेब की मृत्यु के बाद की राजनैतिक परिस्थितियों का लाभ उठाकर उत्तर भारत में कुछ ऐसे शक्तिशाली राज्यों का उदय हुआ जिन्होंने तत्कालीन सामाजिकराजनैतिक वातावरण को एक नई दिशा दी। इन्हीं राज्यों में से भरतपुर रियासत भी एक थी। महाराज सूरजमल के पिता बदन सिंह के समय रियासत की राजधानी डीग (राजस्थान) थी परन्तु, 1755 . में शासन संभालने के उपरान्त महाराज सूरजमल ने भरतपुर (राजस्थान) को अपनी राजधानी बना लिया। इस नगरी की स्थापना 1743 . में सूरजमल जी ने ही की थी। महाराजा सूरजमल जी का जन्म 1707 . में हुआ था। वह एक शूरवीर, बुद्धिमान तथा सफल सेनानायक थे। उनकी बुद्धिमत्ता के कारण ही उन्हेंजाटों का प्लूटोकी संज्ञा दी जाती है। वह इतने चतुर शासक थे कि पानीपत के तीसरे युद्ध से पूर्व उन्होंने मराठों को अब्दाली के साथ सीधे युद्ध से परहेज करने की सलाह दी थी। यद्यपि, उनका जन्म तथा जीवन भरतपुर (राजस्थान) के क्षेत्र में हआ था। परन्तु, एक समय भरतपुर रियासत के अधीन हरियाणा के गोहाना, महम, तोशाम, भिवानी, लोहारू, कलानौर, रोहतक, दादरी, झज्जर, छुछकवास, नाहड गुडगाँव, पटौदी, सोहना, बल्लभगढ़, पलवल, नूंह, पुन्हाना तथा पलवल का विशाल क्षेत्र सम्मिलित था। उनके पुत्र जवाहर सिंह ने पिता के मार्गदर्शन में हरियाणा के अनेकों क्षेत्रों में विजय प्राप्त की। 25 दिसंबर, 1764 को हिंडन नदी के तट पर उनकी छलपूर्वक हत्या कर दी गई।

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