मध्य प्रदेश

  • क्षेत्रफल – 3,08,245 वर्ग किलोमीटर
  • राजधानी – भोपाल
  • जिले -50
  • जनसंख्या – 7,25,97,565 (सन् 2011की जनगणना के अनुसार)
  • भाषा – हिन्दी
  • साक्षरता – 70.63 प्रतिशत

मध्य प्रदेश की भू-आकृति (Landscape of Madhya Pradesh)

नर्मदा और ताप्ती की घाटियों को छोड़कर सारा मध्य प्रदेश एक पठारी मैदान है। इसके बीच में विन्ध्याचल और सतपुड़ा की शृंखलाएँ हैं। इस राज्य की प्रमुख नदियाँ हैं-चम्बल, बेतवा, नर्मदा, ताप्ती, महानदी, सोन, पयस्वनी और इन्द्रावती। मध्य प्रदेश में जनजातियों की संख्या सबसे अधिक है। यह इसकी विशेषता है। 23 जिले ऐसे हैं, जिनमें जनजातियों की संख्या का बाहुल्य है। इनमें से प्रमुख जनजातियाँ-गोंड, मिलाला बारेला, भील, ओराव, कोरकू और कोल हैं।

मध्य प्रदेश का इतिहास (History of Madhya Pradesh)

मध्य प्रदेश का इतिहास – राज्य के पुनर्गठन के अन्तर्गत 1956 में वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य का गठन हुआ। इसमें भूतपूर्व मध्य प्रदेश के 17 हिन्दी भाषी जिले, भूतपूर्व मध्य भारत राज्य, भूतपूर्व विन्ध्य प्रदेश, भोपाल रियासत और कोटा जिले की सिरोंज तहसील सम्मिलित हैं।

मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था (Economy of Madhya Pradesh)

मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था मूलतः कृषि पर आधारित है। मध्य प्रदेश के पुरे भूक्षेत्र का 52.06 प्रतिशत भाग कृषि के अधीन है। इस राज्य की प्रमुख खाद्यान्न फसलें-ज्वार, गेहूं, चावल, कोदौं, कुटको, सवाँ, चना आदि हैं।

मध्य प्रदेश की वाणिज्यिक फसलें (Commercial crops of Madhya Pradesh)

वाणिज्यिक फसलें – तिलहन, कपास, गन्ना और सोयाबीन आदि फसलें हैं। लोहा, मैंगनीज, कोयला, चूना, पत्थर और टिन जैसे प्राकृतिक संसाधनों में मध्यप्रदेश बहुत समृद्ध है।

मध्य प्रदेश के प्रमुख उद्योग (Key industries of Madhya Pradesh)

प्रमुख उद्योग – भोपाल में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स, होशंगाबाद में सिक्योरिटी पेपर मिल, देवास में बैंक नोट प्रेस, नेपानगर में अखबारी कागज का कारखाना, नीमच में अल्कायड कारखाना है। प्रदेश में सीमेन्ट के कारखाने, वाहन कारखाना, आर्डिनेन्स कारखाना, कारतूस कारखाना तथा 27 कपड़े के कारखाने हैं। भोपाल स्थित भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स कारखाना भारत में बिजली उपकरण बनाने वाला सबसे पहला और अपने ढंग का एशिया का सबसे बड़ा कारखाना है।

मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक एवं पर्यटन केन्द्र (Cultural and Tourism Center of Madhya Pradesh)

मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक एवं पर्यटन केन्द्र – मध्य प्रदेश में वास्तुकला के अनेक नमूने हैं, जिनके पत्थरों पर अतीत का इतिहास आज भी सजीव है। भोपाल के समीप ‘भीम बैटका’ पुरातत्व की दृष्टि से विश्व धरोहर मानी गई है। खजराहो के विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वीय मंदिर, उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, साँची के प्राचीन बौद्धस्तूप, ग्वालियर का भव्य दुर्ग एवं गुजरी महल, मांडू दुर्ग इसके उदाहरण हैं। प्रकृति ने मध्य प्रदेश को सुंदर स्थल बनाने में बहुत उदारता बरती है।

नर्मदा व सोन का उद्गम स्थल अमरकंटक प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों की आराधना स्थली रही है, वर्तमान में यह सैलानियों का आकर्षण केन्द्र है। इसी प्रकार जबलपुर के निकट संगमरमर की चट्टानें भी प्राकृतिक छटा का अद्भुत नमूना हैं। समीप ही कान्हा राष्ट्रीय अभयारण्य है। बांधवगढ़, पंचमढ़ी एवं रामवन (सतना) दर्शनीय स्थल हैं। इस प्रदेश में भोपाल का ताल भी अपनी विशालता के लिए प्रसिद्ध है।

चित्रकूट का नाम लेते ही भगवान् राम का वनवास याद आ जाता है। यहाँ के घाट पर संत कवि तुलसीदास को अपने इष्टदेव के साक्षात् दर्शन हुए थे। वहाँ का कण-कण अब भी राममय है। चित्रकूट का कुछ भाग उत्तर प्रदेश में भी है।

मध्य प्रदेश ने इतिहास के बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं। यहाँ की वीरांगनाओं ने नारी को श्रद्धा एवं पूजा का स्थान प्राप्त कराया। मालवा की रानी अहिल्याबाई का नर्मदा के किनारे बना महेश्वर का किला, रानी दुर्गावती का गढ़मंडला का दुर्ग, ग्वालियर के दुर्ग के समीप महारानी लक्ष्मीबाई के समाधि स्थल पर बनी भव्य मूर्ति देशवासियों को आमंत्रित करती है कि वे उन पर अपने श्रद्धा सुमन चढ़ाकर देशभक्ति की प्रेरणा लें।

मध्य प्रदेश ने सम्राट विक्रमादित्य, कविश्रेष्ठ कालिदास, बाणभट्ट, वराहमिहिर, राजाभोज, स्वामी हरिदास के शिष्य संगीत सम्राट तानसेन को जन्म दिया। इनके जन्मस्थल आधुनिक तीर्थस्थल बन चुके हैं।

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