समस्या-समाधान की तार्किक विधि

Logical method of problem solving

स्किनर के अनुसार, समस्या समाधान की वैज्ञानिक विधि में अग्रलिखित छ: सोपानों का अनुसरण किया जाता है

  • समस्या को समझना-  इस सोपान में बालक यह समझने का प्रयास करता है कि समस्या क्या है, उसके समाधान में क्या कठिनाइयाँ हैं या हो सकती हैं और उनका समाधान किस प्रकार किया जा सकता है?
  • जानकारी का संग्रह-  इस सोपान में बालक समस्या से सम्बन्धित जानकारी का संग्रह करता है। हो सकता है कि उससे पहले कोई और बालक उस समस्या को हल कर चुका हो। अत: वह अपने समय की बचत करने के लिए उस बालक द्वारा संग्रह किए गए तथ्यों की जानकारी प्राप्त करता है।
  • सम्भावित समाधानों का निर्माण-  इस सोपान में बालक संग्रह की गई जानकारी की सहायता से समस्या का समाधान करने के लिए कुछ विधियों को निर्धारित करता है। वह जितना अधिक बुद्धिमान होता है, उतनी ही अधिक उत्तम ये विधियाँ होती हैं। इस सोपान में सृजनात्मक चिन्तन प्राय: सक्रिय रहता है।
  • सम्भावित समाधानों का मूल्यांकन-  इस सोपान में बालक निर्धारित की जाने वाली विधियों का मूल्यांकन करता है। दूसरे शब्दों में, वह प्रत्येक विधि के प्रयोग के परिणामों पर विचार करता है। इस कार्य में उसकी सफलता आंशिक रूप से उसकी बुद्धि और आंशिक रूप से संग्रह की गई जानकारी के आधार पर निर्धारित की जाने वाली विधियों पर निर्भर रहती है।
  • सम्भावित समाधानों का परीक्षण –  इस सोपान में बच्चा उक्त विधियों का प्रयोगशाला में या उसके बाहर परीक्षण करता है।
  • निष्कर्षों का निर्णय-  इस सोपान में बालक अपने परीक्षणों के आधार पर विधियों के सम्बन्ध में अपने निष्कर्षों का निर्माण करता है। फलस्वरूप, वह यह अनुमान लगा लेता है कि समस्या का समाधान करने के लिए उनमें से कौन-सी विधि सर्वोत्तम है।

समस्या समाधान के विभिन्न चरण (Different stages of problem resolution)

इस विधि के द्वारा कराए गए शिक्षण में सामान्यतया निम्न पाँच पदों का अनुसरण किया जाता है

  • अन्त: व्यवहार का वर्णन करना जो समस्या समाधान का प्रारूप प्रस्तुत करता है।
  • छात्रों के प्रारम्भिक व्यवहार को ज्ञात करना
  • सभी प्रासंगिक सम्प्रत्ययों का प्रत्यास्मरण करवाना।
  • समस्या समाधान के लिए चिन्तन को शाब्दिक निर्देश देना।
  • समस्या समाधान का मूल्यांकन समस्या

समस्या समाधान की विशेषताएँ (Problem resolution features)

समस्या समाधान की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • यह पद्धति छात्रों की चिन्तन, मनन एवं विश्लेषण-शक्ति का पर्याप्त विकास करती है।
  • यह पद्धति दृष्टिकोण की व्यापकता, सहनशीलता, उत्तरदायित्वशीलता जैसे महान् नागरिक गुणों का विकास करती है।
  • यह पद्धति हमें समस्या का समाधान करना सिखाती है। प्रत्येक जीवन समस्याओं से पूर्ण होता है। यह पद्धति छात्रों को जीवन की समस्याओं को हल करने योग्य बनाती है।
  • इस पद्धति से व्यक्तिगत शिक्षण तथा कक्षा शिक्षण दोनों ही सम्भव हैं।
  • समस्या पद्धति में प्रस्तुत की गई समस्या छात्रों के लिए एक चुनौती होती है।
  • अपनी शारीरिक एवं मानसिक अवस्था के कारण किशोर छात्र शीघ्र ही इस चुनौती का सामना करने को तैयार हो जाते हैं।
  • इसमें छात्र समस्या का समाधान बड़ी तत्परता एवं संलग्नता से करते हैं।
  • यह पद्धति व्यक्तिगत विभिन्नताओं पर आधारित होने से मनोवैज्ञानिक है।
  • यह पद्धति छात्रों को विभिन्न नागरिक समस्याओं को समझने तथा उनका समाधान करने योग्य बनाती है।
  • छात्र समस्या को अपने जीवन से जोड़कर देखते हैं। फलत: समस्या एवं उसके समाधान में छात्र की अधिक रुचि हो जाती है। इस पद्धति में छात्र अत्यधिक सक्रिय रहते हैं। फलत: अनुशासनहीनता की समस्या का प्रश्न नहीं उठता है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *