हरियाणा की प्रमुख झीलें

आइए जानते हैं हरियाणा की प्रमुख झीलें कौन सी हैं (Major Lakes of Haryana)

यदि आपका सवाल भी यही है कि हरियाणा की प्रमुख झीलें कौन सी है तो आज हम आपको हरियाणा की मुख्य झीलो के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं| हरियाणा एक मैदानी प्रदेश है। इसके उत्तर-पूर्व में शिवालिक श्रृंखला की पहाड़ियाँ है तो दक्षिण में अरावली का विस्तार है। यही कारण है कि हरियाणा प्रदेश प्राकृतिक रूप से एक संपन्न प्रदेश है।

हरियाणा की प्रमुख झीलों के नाम (Name of the major lakes of Haryana)

  • बड़खल झील (Barkhal Lake) – फरीदाबाद
  • दमदमा झील (Damdama Lake) – गुड़गाँव
  • सुलतानपुर झील (Sultanpur Lake) – गुड़गाँव
  • कोटला झील (Kotla Lake) – मेवात
  • भिण्डावास झील (Bhindawas Lake) – झज्जर
  • खलीलपुर झील (Khalilpur Lake) – नूंह
  • चाँदनी झील (नूंह) (Chandni Lake) – नूंह
  • कर्ण झील (Karna Lake) – करनाल
  • तिलियार झील (Tiliar Lake) – रोहतक

इनमें से कुछ प्राकृतिक हैं, तो कुछ मानव निर्मित। पर्यावरण, कृषि और पर्यटन की दृष्टि से इन झीलों का प्रदेश के लिए बड़ा महत्त्व है।

हरियाणा की झीलों का विस्तार पूर्वक वर्णन (Major lakes of Haryana are mentioned in detail)

प्रदेश के पूर्व में यमुना जैसी सदानीरा नदी का प्रवाह है तो प्राचीन काल में हरियाणा प्रदेश सरस्वती जैसी पावन नदी का पालना रहा है। प्रदेश में अनेकों छोटे-बड़ी झीलें पाई जाती हैं। जिनका विवरण विस्तार पूर्वक नीचे दिया हुआ है

बड़खल झील (Barkhal Lake)

  • अरावली की पहाड़ियों से घिरी यह झील फरीदाबाद जिले में बड़खल गाँव के निकट स्थित है।
  • दिल्ली-मथुरा राजमार्ग से मात्र 3 कि०मी० दूर स्थित इस झील की दूरी दिल्ली से मात्र 32 कि०मी० है।
  • प्राचीन समय में यह एक प्राकृतिक झील थी जो कई बार इस क्षेत्र में बाढ़ का कारण बनती थी।
  • वर्ष 1947 में एक सिंचाई परियोजना के तहत दो पहाड़ियों/टीलो को जोड़ने के लिए5 मी० लंबा और 6 मी० चौड़ा बाँध बना कर इसमें बाढ़ के पानी को रोकने की व्यवस्था की गई। इसी वर्ष एक कृत्रिम झील के रूप में इसे इसका वर्तमान स्वरूप मिला।
  • ‘बड़खल’ शब्द के विषय में गुड़गाँव के जिला गजेटियर में बड़ी दिलचस्प व्याख्या दी गई है। इसके अनुसार ‘बड़खल’ शब्द फारसी शब्द ‘बेदखल’ का अपभ्रंश है जिसका भाव है-हस्तक्षेप रहित, शान्त-सौम्य।
  • 206 एकड़ में फैली ‘बड़खल झील’ को इसी रूप में देखा जाता है। 1966 में हरियाणा प्रान्त की स्थापना के उपरान्त प्रदेश के पर्यटन विभाग ने इसे एक पर्यटन स्थल का रूप दे दिया।
  • इस झील में पर्यटन विभाग द्वारा भ्रमण तथा नौकायन की व्यवस्था की गई है। बसन्त ऋतु में इस झील पर ‘फलॉवर शो’ का आयोजन किया जाता है।
  • इस झील के निकट ही मयूर झील (Peacock lake) स्थित है। अरावली क्षेत्र में फैले अवैध खनन के करोबार ने बड़खल झील को शापित करके रख दिया है।
  • अवैध खनन से बने गड्ढ़ों और इससे फैले रेत और पत्थरों द्वारा वर्षा के जल का मार्ग अवरुद्ध हो जाने से इस झील का अस्तित्व ही खतरे में आ गया है।

दमदमा झील (Damdama Lake)

  • दमदमा झील हरियाणा की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है|
  • यह झील लगभग 3000 एकड (12.14 वर्ग कि०मी०) में विस्तृत है।
  • दमदमा झील गुड़गाँव जिले के दक्षिणी क्षेत्र में सोहना में स्थित है। अंग्रेजों ने इस झील का निर्माण वर्षा के जल का संग्रहण करने के उद्देश्य से मिट्टी और पत्थरों का बांध बना कर किया था।
  • अरावली की पहाड़ियों में स्थित इस जल संग्रहण परियोजना ने 1947 में काम करना प्रारंभ किया।
  • अमीबा के आकार में विस्तृत इस झील की कई छोटी-छोटी भुजाएँ हैं।
  • दमदमा झील के जल की औसत गहराई 20 फीट तक है परन्तु वर्षाकाल में जलस्तर बढ़कर 50 से 70 फीट तक हो जाता है।
  • इस झील के जल का स्रोत वर्षा का जल ही है। हरियाणा सरकार ने दमदमा झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया है।
  • यहाँ पर नौकायन, रॉक क्लाइंबिंग (Rock climbing) और अन्य साहसिक गतिविधियों से संबंधित सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
  • हरियाणा सरकार ने दमदमा झील पर वाटर पोलो स्पोर्टस सेन्टर बनाने की योजना को हाल ही में हरी झण्डी दी है।
  • दमदमा झील पक्षियों की लगभग 190 प्रजातियों का घर है। सर्दियों में अनेकों प्रवासी पक्षी भी दमदमा झील को अपना ठिकाना बनाते हैं।
  • सोहना गर्म पानी के झरनों के लिए प्रसिद्ध है।
  • गन्धक युक्त गर्म जल के झरने भी दमदमा झील के निकट ही स्थित हैं।
  • प्राचीन मान्यता के अनुसार पाण्डु पुत्र अर्जुन ने वनवास के समय अपनी प्यास बुझाने के लिए इन झरनों की खुदाई की थी।

सुलतानपुर झील (Sultanpur Lake)

  • यह झील गुडगाँव जिले के फर्रुखनगर प्रखण्ड में गड़गाँव फर्रुखनगर मार्ग पर गुड़गाँव से 15 कि०मी० दूर सुलतानपुर में स्थित है।
  • सुलतानपुर झील एक प्रसिद्ध पक्षी-विहार है।
  • इस पक्षी-विहार में पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • इसके साथ-साथ साइबेरिया, यूरोप और अफगानिस्तान से प्रवासी पक्षियों की 100 से ज्यादा प्रजातियाँ इस पक्षी-विहार को सर्दियों में अपना ठिकाना बनाती हैं।
  • चौहान वंश के राजपूत राजा हर्ष देव चौहान ने ‘गढ़ी हरसरु’ बसाया था। इन्ही हर्षदेव चौहान के उत्तराधिकारी सुलतान सिंह चौहान के नाम पर इस स्थान का नाम सुलतानपुर पड़ा।
  • 19वीं सदी के अन्त तक सुलतानपुर, दिल्ली और संयुक्त रियासतों के लिए नमक उत्पादन का प्रमुख केन्द्र रहा है।
  • एक पक्षी-विहार के रूप में सलतानपर की पहचान करने का श्रेय प्रसिद्ध पक्षी-विज्ञानी ‘पीटर जैक्सन’ को जाता है। पीटर जैक्सन उस समय ‘दिल्ली डवॉचिंग सोसाइटी’ (Delhi Bird watching Society) के सचिव थे। 1970 में उन्होंने तत्कालीन । प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी को सुझाव देते हुए सुलतानपुर को पक्षी-विहार बनाने के लिए पत्र लिखा।
  • 1972 में सरकार ने सुलतानपुर को पक्षी-विहार (अभयारण्य) का दर्जा दे दिया।
  • 5 जुलाई, 1991 को भारत सरकार ने आरक्षित पक्षी-विहार का दर्जा बढ़ाते हुए इसे राष्ट्रीय उद्यान (National Park) के रूप में मान्यता दे दी।
  • इस अभयारण्य का विस्तार करते हुए इसका क्षेत्रफल भी 1.21 वर्ग कि०मी० से बढ़ा कर 1.43 वर्ग कि०मी० किया गया।
  • इस झील को यमुना के जल के द्वारा पुनर्जीवित किया गया है।

कोटला झील(Kotla Lake)

  • कोटला झील मेवात में स्थित है। यह एक मानव-निर्मित झील है।
  • 108 एकड़ में फैली कोटला झील को एक सूख चुकी प्राचीन झील को पुनर्जीवित करके अस्तित्व में लाया गया है।
  • इस प्राचीन झील का विस्तार हरियाणा और राजस्थान की सीमाओं के बीच था।
  • कोटला झील अरावली की शृंखला में एक प्राकृतिक खाई में स्थित है। इसकी तलहटी पथरीली चट्टानों से बनी है।
  • आजादी से पूर्व इस झील का प्रयोग वर्षा के जल के संग्रहण के लिए किया जाता था। झील का कुल जल संग्रहण क्षेत्र लगभग 30 वर्ग मील है। उस समय यह झील आस-पास के क्षेत्र के लिए बाढ़ का कारण बनती थी जिस पर नियंत्रण के लिए झील के चारों ओर बाँध बनाए गए।
  • इस झील के पुनरोद्धार से मेवात के कोटला, अकोरा, मोहम्मदपुर, खानपुर तथा नूंह को विशेष लाभ मिल सकता है।

भिण्डावास झील एवं भिण्डावास पक्षी विहार(Bhindawas Lake and Bhindawas Bird Sanctuary)

  • यह झील झज्जर जिला मुख्यालय से 15 कि०मी० दूर भिण्डावास गाँव के निकट है।
  • यह झील एक पक्षी-विहार है जो लगभग 411.55 हेक्टेयर भूमि (1074 एकड़) में विस्तृत है।
  • भिण्डावास झील एक मानवनिर्मित जलक्षेत्र है जिसे 5 जुलाई, 1986 को हरियाणा सरकार ने एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में मान्यता दी।
  • भिण्डावास झील का निर्माण जवाहरलाल नेहरू नहर (JLNCanal) के अतिरिक्त जल के भण्डारण के लिए किया गया था। आज भी इस झील के जल के मख्य स्रोत वही नहर और वर्षा का जल है।
  • भिण्डावास पक्षी विहार में लगभग 266 प्रजातियों के 30,000 से ज्यादा पक्षी देखे जाते सकते हैं। इस झील के महत्व को स्वीकार करते हुए भारत सरकार ने 3 जून, 2009 को इस क्षेत्र को एक पक्षी-विहार के रूप में मान्यता देते हुए इसके विकास का निर्णय लिया।
  • इस झील का क्षेत्र झज्जर के चार गावों-भिण्डावास, चंदौल, ढाकला तथा सुरैती में फैला हुआ है।

खलीलपुर झील(Khalilpur Lake)

  • खलीलपुर झील, नूंह जिले की नूंह तहसील के उत्तरपूर्व में खलीलपुर गाँव के निकट स्थित है।
  • खलीलपुर झील, नूंह तहसील के इन्द्री, खलीलपुर और संबद्ध गाँवों के 607 हेक्टेयर क्षेत्र पर विस्तृत है।
  • खलीलपुर झील का जल स्रोत वर्षा का पानी है।

चाँदनी झील (नूंह) (Chandni Lake)

  • चाँदनी झील, नूंह तहसील के उत्तर-पश्चिम में खलीलपुर झील से 16 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यह एक स्थाई जलक्षेत्र है।
  • चाँदनी झील का विस्तार लगभग 400 हेक्टेयर में है।

कर्ण झील (Karna Lake)

  • कर्ण झील, करनाल से 5 कि०मी० दूर, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 1 के साथ विस्तृत है।
  • करनाल का यह खूबसूरत पर्यटन स्थल 17 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत है।
  • 1972 में हरियाणा सरकार ने इस जलक्षेत्र को एक खबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया।
  • संयोगवश कर्ण झील की दूरी दिल्ली और चण्डीगढ़ दोनों महानगरों से समान (125 कि०मी०) है।
  • प्राचीन मान्यता के अनुसार कुंतीपुत्र कर्ण नित्य इस झील में स्नान करने आता था। यह झील एक वृत्त के आकार में विस्तृत है।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार करण ने यहीं पर अपने कवच-कुंडल देवराज इंद्र को दान दिए थे कर्ण-ताल शब्द से ही करनाल शहर का नाम पड़ा

तिलियार झील (Tiliar Lake)

  • तिलियार झील रोहतक में दिल्ली फाजिल्का राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 पर स्थित है लगभग 132 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत इस झील की औसत गहराई 10 फीट के लगभग है
  • तिलियार झील पर हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा एक समृद्ध चिड़ियाघर बनाया गया है|

झीलों पर आधारित परीक्षा उपयोगी कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1. हरियाणा की सबसे बड़ी झील कौन सी है?

उत्तर – हरियाणा की सबसे बड़ी झील दमदमा झील है जो कि लगभग 3000 एकड़ में विस्तृत है|

प्रश्न 2. बड़खल झील कहां पर स्थित है?

उत्तर – बड़खल झील हरियाणा में फरीदाबाद जिले के बड़खल गांव में स्थित है|

प्रश्न 3. मयूर झील किस झील के नजदीक स्थित है?

उत्तर – मयूर झील बड़खल झील के नजदीक स्थित है|

प्रश्न 4. – कर्ण झील कहां है?

उत्तर – कर्ण करनाल जिले में स्थित है|

प्रश्न 5. कौन सी झील हरियाणा में 1947 में दो छोटे टीलो को जोड़ने से बनती है?

उत्तर – बड़खल झील 1947 में दो छोटे टीलो को जोड़ने से बनती है|

प्रश्न 6. भारत में सबसे ऊंची झील कौन सी है?

उत्तर – भारत की सबसे ऊँची झील चोलामू झील(त्सो ल्हामो झील) है जिसकी ऊँचाई 5330 मी० है। चोलामू झील(त्सो ल्हामो झील) सिक्किम में स्थित है|

प्रश्न 7. विश्व की सबसे ऊंची झील कौन सी है?

उत्तर – अधिकारिक रूप से टीटीकाका झील विश्व की सबसे ऊंची झील है| समुद्र तल से जिसकी ऊंचाई 3,812 मी॰ (12,507 फीट) है| इसके अलावा नेपाल में पर्वतारोहियों द्वारा खोजी गई कजिन सारा झील भी विश्व की सबसे ऊंची झील हो सकती है जिसकी खोज कुछ पर्वतारोहियों ने की है| इसकी ऊंचाई 5200 मीटर आंकी गई है लेकिन अभी तक इस झील की अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है|

 

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  1. Khalilpur jheel search krne pr Khalilpur, gurugram me h ye show hota h or aapki website pr mewat ka show hota h

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