अधिगम अशक्तता

Learning disability

कुछ छात्र पढ़ने, लिखने, मौखिक अभिव्यक्ति, शब्दों की वर्तनी करने, गणित एवं तर्कशक्ति को समझने आदि में अशक्त अथवा कमजोर होते हैं। इस प्रकार की अशक्तता को ही अधिगम अशक्तता कहा जाता है।

 कुछ प्रमुख अधिगम अशक्तताएँ निम्नलिखित हैं

अफेज्या (Afejya)

भाषा एवं सम्प्रेषण अधिगम अशक्तता को ‘अफेज्या’ कहा जाता है। इससे पीड़ित छात्र मौखिक रूप से सीखने एवं अपने विचारों को अभिव्यक्ति प्रदान करने में कठिनाई का अनुभव करते हैं। सामान्यतया मस्तिष्क में किसी प्रकार की क्षति से यह विकार उत्पन्न होता है। मस्तिष्क में क्षति के कारण बातचीत करने में आंशिक या पूर्णत: अक्षमता को डिस्फेजिया (Dysphasia) कहा जाता है।

अलेक्सिया (Alexia)

मस्तिष्क में किसी प्रकार की क्षति के कारण पढ़ने में अक्षमता को ‘अलेक्सिया’ कहा जाता है । इसे शब्द अन्धता या पाठ्य अन्धता या विजुअल अफेज्या भी कहा जाता है। यह (अर्जित) अक्वायर्ड डिस्लेक्सिया (Acquired Dyslexia) है। अलेक्सिया के कारण अफेज्या एवं डिस्माफिया जैसी अधिगम अशक्तता होना भी सम्भव है, किन्तु प्रत्येक स्थिति में यह आवश्यक नहीं।

 डिस्लेक्सिया (Dyslexia)

डिस्लेक्सिया एक व्यापक शब्द है, जिसका सम्बन्ध पठन विकार (Reading disorder) से है। इस अधिगम अशक्तता में बालक को पढ़ने में कठिनाई होती है, क्योंकि वह कई शब्दों के कुछ अक्षरों जैसे एवं में विभेद नहीं कर पाते डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चे ‘saw’ और ‘was’, ‘nuclear’ और ‘unclear’ में अन्तर नहीं कर पाते। अप्रेक्सिया अप्रेक्सिया ऐसा शारीरिक विकार है, जिसके कारण व्यक्ति माँसपेशियों के संचालन से सम्बद्ध सूक्ष्म गतिक कौशल जैसेलिखने, चलने, टहलने, बोलने में निपुण नहीं हो पाता। यह मस्तिष्क के सेरेब्रम (मस्तिष्क का ऊपरी एवं अगला भाग) में क्षति के कारण होता है। अप्रेक्सिया का ही एक प्रकार डिस्प्रेक्सिया (Dyspraxia)है, जिसमें व्यक्ति मस्तिष्क में क्षति के कारण सूक्ष्म गतिक कौशलों (Micro Dynamic Skills) में निपुण नहीं हो पाता। वह हाथ एवं आँखों के बीच समन्वय एवं सन्तुलन स्थापित नहीं कर पाता। डिस्प्रेक्सिया तन्त्रिका तन्त्र (Nerve) सम्बन्धी विकार है, जिसे सेन्सरी इन्टेग्रेशन डिस्ऑर्डर कहा जाता है।

डिस्ग्राफिया (Dysgraphia)

डिस्याफिया लिखने सम्बन्धी अशक्तता को कहा जाता है। इसमें या तो बच्चा ठीक से लिख नहीं पाता अथवा उसकी लिखावट ठीक नहीं हो पाती। सामान्यत: इसका कारण हाथ, हथेली या अंगुलियों से सम्बन्धित समस्या होती है। इसके अतिरिक्त मस्तिष्क सम्बन्धी कुछ समस्याओं के कारण भी यह अधिगम अशक्तता सम्भव है।

डिस्कैल्कुलिया (Discalculia)

यह ऐसी अधिगम अशक्तता है, जिसमें बच्चे गणित (अंकगणित) को समझने में कठिनाई का अनुभव करते हैं। इसे न्यूमलेक्सिया (Numlexia) भी कहा जाता है। डिस्कैल्कुलिया कई प्रकार के होते हैं- ग्राफिकल डिस्कैल्कुलिया, लैक्सिकल डिस्कैल्कुलिया, वर्बल डिस्कैल्कुलिया, प्रैक्टोग्नोस्टिक डिस्कैल्कुलिया, ऑडियोग्नॉटिक डिस्कैल्कुलिया।

डिस्थीमिया (Dysthymia)

डिस्थीमिया गम्भीर तनाव की अवस्था को कहा जाता है। इस मनोविकार का प्रतिकूल प्रभाव बालक के अधिगम पर पड़ता है। डिस्थीमिया की अवस्था में व्यक्ति की मन:स्थिति (चित्तवृत्ति) हमेशा निम्न रहती है।

डिस्मोरफिया (Dismorphia)

डिस्मोरफिया एक ऐसा मनोविकार (Mental Disorder) है, जिसमें व्यक्ति को यह भ्रम हो जाता है कि उसके शरीर के कुछ अंग बहुत छोटे या अपूर्ण हैं। वह अपने शरीर के विभिन्न अंगों की तुलना दूसरे लोगों से करने लगता है, इसका प्रतिकूल प्रभाव उसके अधिगम पर पड़ता है।

अधिगम अशक्तता वाले छात्रों की पहचान (Identification of students with learning disabilities)

अधिगम अशक्तता वाले छात्रों की पहचान अत्यन्त सरल है। इस प्रकार के छात्रों में निम्नलिखित प्रकार की समस्याएँ देखी जाती हैं

  • छात्र उचित प्रकार से पढ़ नहीं पाता, यद्यपि उसके मौखिक उत्तर बुद्धिमत्तापूर्ण होते हैं।
  • छात्र उचित प्रकार से पढ़ तो पाता है, किन्तु मौखिक अभिव्यक्ति में वह कठिनाई का अनुभव करता है। “
  • कुछ छात्र वर्तनी (spelling) में त्रुटियाँ करते हैं। वे शब्दों के अक्षरों को सही क्रम में नहीं लिखते या शब्दों के कई अक्षरों को लिखते समय छोड़ देते हैं। इस प्रकार के छात्र संख्याओं को लिखने में भी गलतियाँ करते हैं; जैसे-12 को 21 एवं 89 को 98 लिखना आदि। मन व्याकुल रहना, समय-सारणी (Time-Table) के अनुसार कार्य न कर पाना, आदि इनकी समस्याएँ होती हैं।
  • सदैव उदास रहना, गृहकार्य (Homework) को विलम्ब से करना, कक्षा में देरी से आना।
  • चतूर प्रतीत होने एवं कोई भी शारीरिक दोष न होने के बावजूद पढ़ाई में कमजोर होना एवं परीक्षा का निष्पादन (Performance) ठीक से नहीं कर पाना।
  • कभी-कभी इतना अधिक उत्तेजित हो जाना कि वह किसी भी कार्य को पूरा कर पाने में असमर्थ होता है।
  • पढ़ते समय शब्दों या पंक्तियों (Queque) को छोड़ देना।

अधिगम अशक्तता वाले बालकों की शिक्षा (Education of children with learning disabilities)

  •  इन बालकों के परिवार के वातावरण को सुधारकर इनके प्रति सकारात्मक व्यवहार अपनाने के लिए सभी को प्रेरित किए जाने की आवश्यकता होती है।
  • इनके सुधार के लिए विद्यालय के वातावरण एवं शिक्षकों का इनके प्रति व्यवहार भी सुधारा जाना चाहिए। इन बालकों का उपचार मनोवैज्ञानिक विधियों द्वारा किया जा सकता है।

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