जननायक चौधरी देवीलाल

 ‘जननायक’ चौधरी देवी लाल को लोग प्यार से ‘ताऊ’ कहकर संबोधित करते हैं। उनका जन्म 25 सितंबर, 1914 को सिरसा जिले के चौटाला गाँव में चौधरी लेखराम और शुंगा देवी के घर में हुआ था। चौधरी साहब 1929 ई. में अपनी दसवीं की पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए थे। उन्होंने 1929 ई. में कांग्रेस के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन में भाग लिया। 1930 ई. में आर्यसमाजी नेता केशवानंद जी से नमक की पुड़िया खरीदकर उन्होंने नमक कानून तोड़ा। इसका परिणाम उन्हें स्कूल से बर्खास्त होकर भुगतना पड़ा। इसके पश्चात् वह तन-मन-धन से स्वतंत्रता आंदोलन में जुड़ गए। 8 अक्तूबर, 1930 को उन्हें 1 वर्ष के लिए हिसार जेल में डाल दिया गया। 1938 ई. में ताऊ देवीलाल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य चुने गए। इसी वर्ष उनके बड़े भाई चौ. साहिबराम को कांग्रेस के टिकट पर पंजाब विधान परिषद् का सदस्य चुना गया। चौ. देवी लाल जी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान खुद को देश को समर्पित कर दिया।

अक्तूबर, 1942 में उन्हें दो वर्ष के लिए जेल में डाल दिया गया परन्तु, 1 वर्ष उपरांत ही अक्तूबर, 1943 में उन्हें जेल से रिहा भी कर दिया गया। 1944 ई. में चौ. छोटूराम ने ताऊ देवीलाल को यूनियनिस्ट पार्टी में शमिल करने के लिए चौटाला गाँव की यात्रा की परन्तु, जननायक ने कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा नहीं छोड़ी। ताऊ के संघर्ष और किसान-मुजारों के साथ उनके जुड़ाव ने उन्हें हरियाणा का ‘जननायक’ बना दिया। आजादी के बाद ‘ताऊ’ देवीलाल जी ने किसान-मुजारों के अधिकारों के लिए आन्दोलन चलाया तथा गिरफ्तारी दी। इसके उपरान्त पंजाब सरकार को मुजारा अधिनियम में संशोधन करना पड़ा। 1952 में हुए चुनावों में चौ. देवी लाल पंजाब विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए। 1956 ई. में वह पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने।

1958 ई. में वह सिरसा सीट से विधायक बने। 1971 में इन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। 1975 में आपातकाल लागू किए जाने के विरोध में ताऊ देवीलाल 19 महीने जेल में रहे। 1977 में वह जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बने तथा पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वह 28 जून, 1979 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 1980-82 तक वह लोकसभा सांसद रहे। 1982-1987 तक वह पुनः विधायक रहे। ताऊ देवीलाल ने लोकदल पार्टी की स्थापना की तथा 1987 का चुनाव इसी पार्टी के झंडे के नीचे लड़ा। किसान-मजदूरों के हित के लिए चौ. देवीलाल द्वारा चलाए गए ‘न्याययुद्ध अभियान’ का ही परिणाम था कि 1987 के चुनाव में उनकी पार्टी को हरियाणा विधान सभा में 90 में से 85 सीटों पर जीत हासिल हुई। 17 जुलाई, 1987 को उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री की शपथ ली तथा 1 दिसंबर, 1989 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।

1989 में वह सीकर (राजस्थान) तथा रोहतक लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने। उनके मार्गदर्शन में केन्द्र में जनता दल की सरकार बनी तथा ताऊ देवीलाल देश के उप-प्रधानमंत्री बने। 1998 में वह इनेलो की ओर से राज्य सभा सांसद निर्वाचित हुए। 6 अप्रैल, 2001 को यह संघर्षशील व्यक्तित्व, हरियाणा की जनता के प्रिय ‘ताऊ’ इस संसार से विदा हो गए। दिल्ली में यमुना तट पर किसान घाट के निकट उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी समाधि को ‘संघर्ष स्थल’ के नाम से जाना जाता है।

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