शिक्षा के क्षेत्र में वैयक्तिक विभिन्नता

Individual variation in the field of education

शिक्षा के क्षेत्र में भी वैयक्तिक विभिन्नताएँ महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं, जो निम्न प्रकार हैं

शिक्षा का स्वरूप(Nature of education)

मनोविज्ञान इस बात पर जोर देता है कि बालकों की रुचियों, क्षमताओं, योग्यताओं आदि में अन्तर होता है। अतः सभी बालकों के लिए समान शिक्षा का आयोजन सर्वथा अनुचित होता है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए मन्दबुद्धि, पिछड़े हुए बालक तथा शारीरिक दोष वाले बालकों के लिए अलग-अलग विद्यालयों में अलग-अलग प्रकार की शिक्षण तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है।

  • वैयक्तिक विभिन्नता का ज्ञान शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबन्धकों को कक्षा के वर्गीकरण में सहायता प्रदान करता है।
  • शिक्षार्थी वैयक्तिक भिन्नता प्रदर्शित करते हैं। अत: एक शिक्षक को सीखने के विविध अनुभवों को उपलब्ध कराना चाहिए।
  • कक्षा का आकार तय करने में भी वैयक्तिक विभिन्नता का ज्ञान विशेष सहायक होता है। यदि कक्षा के अधिकतर बालक अधिगम में कमजोर हों, तो कक्षा का आकार कम होना चाहिए।
  • वैयक्तिक विभिन्नता का सिद्धान्त व्यक्तिगत शिक्षण पर जोर डालता है। इसके अनुसार बालकों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर उसकी शिक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि उसका सर्वांगीण विकास हो सके।

पाठ्यक्रम का निर्धारण(Determine course)

  • पाठ्यक्रम के निर्धारण एवं विकास में भी वैयक्तिक विभिन्नता की प्रमुख भूमिका होती है। बालकों की आयु, कक्षा आदि को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक कक्षा के लिए अलग प्रकार की पाठ्यचर्या का निर्माण किया जाता है एवं उन्हें अलग प्रकार से लागू भी किया जाता है। उदाहरणस्वरूप बच्चों की पुस्तकें अधिक चित्रमय एवं रंगीन होती हैं, जबकि जैसे-जैसे कक्षा एवं आयु में वृद्धि होती जाती है, उनकी पुस्तकों के स्वरूप में भी अन्तर दिखाई पड़ता है। इसी प्रकार प्राथमिक कक्षा के बच्चों को खेलकूद के जरिए शिक्षा देने पर जोर दिया जाता है।
  • बालकों के निर्देशन में भी वैयक्तिक विभिन्नता की विशेष भूमिका होती है।
  • वैयक्तिक विभिन्नता का ज्ञान शिक्षकों को बालकों के शारीरिक दोषों को समझने में सहायता प्रदान करता है एवं इसे ध्यान में रखते हुए वे उन बच्चों के लिए विशेष प्रकार की शिक्षा की व्यवस्था कर पाते हैं।

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