समावेशी शिक्षा की प्रक्रियाएँ

Inclusive Education Processes

समावेशी शिक्षा की चार मुख्य प्रक्रियाएँ निम्नवत् हैं

सामान्यीकरण सामान्यीकरण (Normalization normalization)

एक ऐसी प्रक्रिया है, जो प्रतिभाशाली बालकों तथा सामान्य युवकों को जहाँ तक सम्भव हो कार्य सीखने के लिए सामान्य सामाजिक वातावरण का निर्माण करती है।

संस्थारहित शिक्षा (Institutional Education)

संस्थारहित शिक्षा ऐसी प्रक्रिया है, जो अधिक से अधिक प्रतिभाशाली बालकों तथा सामान्य छात्रों की सीमाओं को समाप्त करती है अर्थात् जो शिक्षार्थी आवासीय विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करते हैं, उन्हें जनसाधारण के मध्य शिक्षा ग्रहण करने के अवसर प्रदान करती है।

शिक्षा की मुख्यधारा (Education mainstream)

शिक्षा की मुख्यधारा वह प्रक्रिया है, जिसमें प्रतिभाशाली बालक सामान्य बालकों के साथ दिन-प्रतिदिन शिक्षा के माध्यम से आपस में सम्बन्ध स्थापित करते हैं।

समावेश (Inclusion)

समावेशीकरण ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें समाज का ‘वह भाग जो शारीरिक रूप से बाधित अथवा अपंग है, सामान्य समाज से मिलता है।

समावेशी शिक्षा का उद्देश्य (The purpose of inclusive education)

मनोवैज्ञानिकों ने समावेशी शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्य बताए हैं

  • असमर्थ बालकों को सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से जोड़कर विकास की मुख्यधारा में लाना।
  • असमर्थ/अक्षम बालकों की समस्या का पता लगाकर उनके निवारण का प्रयास करना, ताकि उनका समुचित विकास हो सके। बालकों में जागरूकता एवं उत्सुकता की भावना का विकास करना ताकि वे प्रखर बन सकें।
  • सभी बालकों को शिक्षा देकर देश की प्रगति में उनकी  मानव संसाधन क्षमता का उपयोग करना।
  • शिक्षण के क्षेत्र में लोकतान्त्रिक मूल्यों को बढ़ाना।
  • बालकों को स्वावलम्बी/आत्मनिर्भर बनाना।
  • अध्ययन के दौरान सभी बालकों की भ्रान्तियों को दूर करने का प्रयास करना, ताकि उनके विकास में बाधा उत्पन्न न हो।

समावेशी शिक्षा की प्रकृति (Nature of inclusive education)

  • समावेशी शिक्षा सामान्य विद्यालयों में सामान्य बालकों के साथ प्रदान की जाती है। इस शिक्षा के द्वारा असमर्थ बालकों का शिक्षा प्राप्त करने का क्षेत्र विस्तृत होता है।
  • समावेशी शिक्षा में दोनों प्रकार के बालक सम्मिलित होते हैं अर्थात् असमर्थ और सामान्य बालक एक-साथ पढ़ते हैं, जो सुविधाएँ सामान्य बालकों को प्राप्त होती हैं वे सुविधाएँ असमर्थ बालकों को भी प्राप्त होती हैं। इसके अन्तर्गत शारीरिक या मानसिक रूप से विकलांग बालकों को कुछ विशेष सुविधाएँ प्रदान करके शिक्षा प्रदान की जाती है।
  • इसमें सामान्य एवं असमर्थ बालकों द्वारा एक-दूसरे को समझने से आपसी सूझ-बूझ का विकास होता है तथा सामान्य बालक असमर्थ बालकों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। जिससे असमर्थ बालकों की विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जा सकता है।

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