हरियाणा प्रदेश में पत्रकारिता का इतिहास

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। आज के बहुमुखी जीवन में पत्रकारिता का महत्व किसी से छुपा नहीं है। समय के साथ-साथ समाचार-पत्र तथा पत्रिकाएँ हमारी सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, साहित्यिक तथा आर्थिक चेतना के ध्वजवाहक बन गए हैं। हरियाणा के पत्रकारों ने प्रदेश ही नहीं, बल्कि प्रदेश से बाहर भी अपनी प्रतिभा के झंडे गाड़े हैं।

श्री जियालाल जैन ने 14 नवंबर, 1884 को ‘जैन प्रकाश’ नामक समाचार-पत्र का श्री गणेश करके हरियाणा में पत्रकारिता की शुरुआत की थी। गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर से प्रकाशित होने वाला यह समाचार-पत्र हिन्दी तथा उर्दू भाषाओं में प्रकाशित होता था। जियालाल जैन के संपादकत्व में दो अन्य समाचार पत्र ‘जैन साप्ताहिक’ (1884) तथा 1886 में ‘जियालाल प्रकाश’ भी प्रकाशित हए। इन्होंने 1888 में फर्रुखनगर से ही ‘जैन प्रकाश हिन्दुस्तान’ नामक मासिक पत्र भी निकाला जो बाद में साप्ताहिक-पत्र हो गया।

  • 1889 ई. में श्री कन्हैया लाल सिंह द्वारा संपादित ‘जाट समाचार’ नामक मासिक समाचार-पत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ। – 19वीं सदी के आरंभ में राष्ट्रीय आन्दोलन ने जोर पकड़ा। राष्ट्रीय नवजागरण तथा आर्य समाज के प्रभाव में 1907 में मनदत्त शर्मा ने हिसार से ‘ज्ञानोदय’ नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन आरंभ किया। 1918 ई. में भीमसेन विद्यालंकार के संपादकत्व में अंबाला छावनी में ‘आर्य’ नामक समाचार पत्र निकाला जाने लगा। इसी वर्ष पं. नेकीराम शर्मा के संपादकत्व में भिवानी से ‘संदेश’ नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ।
  • 1923 ई. में पं. श्रीराम शर्मा ने रोहतक से ‘हरियाणा तिलक’ नामक साप्ताहिक-पत्र निकाला। भिवानी से मदन शर्मा ‘माधव’ के संपादकत्व में ‘सावधान’ नामक साप्ताहिक पत्र, गुड़गांव से ‘ज्योति मार्तण्ड’ नामक मासिक-पत्र तथा जगाधरी से उमादत्त शर्मा के संपादकत्व में ‘बाह्मण समाचार’ नामक पत्र का प्रकाशन किया जाने लगा।
  • 1928 ई. में पं. नानू राम शर्मा के संपादकत्व में मासिक पत्र ‘मेड़ प्रभाकर’ तथा रेवाड़ी से पं. प्रहलाद दत्त शर्मा के संपादकत्व में ‘ज्योतिष समाचार’ नामक मासिक-पत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ।
  • 1930 ई. में कीर्ति प्रसाद जैन के संपादकत्व में ‘आत्मानंद’ नामक मासिक पत्र निकाला गया। इनके अलावा 1936 में हिसार से ‘ग्राम सेवक’, 1943 में कुरुक्षेत्र से ‘धर्मक्षेत्र’, सफीदों से मासिक-पत्र ‘काया कल्प’ तथा अंबाला से ‘विश्व व्यापी सनातन धर्म’ नामक मासिक-पत्र का प्रकाशन किया जाने लगा। 1948 ई. में ब्रह्मानंद ने हिसार से ‘ज्ञानोदय’ नामक साप्ताहिक समाचार-पत्र निकाला। 1949 में भीमसेन विद्यालंकार के संपादकत्व में ‘हिन्दी सन्देश’ का प्रकाशन आरंभ हुआ।

आजादी के बाद हरियाणा में पत्रकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए। आजादी की हवा में अभिव्यक्ति की आजादी ने इस क्षेत्र को एक नई दिशा दी। लगभग सभी छोटे-बड़े नगरों से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन आरंभ हुआ।

हरियाणा प्रदेश के कुछ प्रसिद्ध दैनिक समाचार-पत्र(Some famous daily Newspaper of Haryana State)

  • द ट्रिब्यून-प्रसिद्ध समाजसेवी सरदार दयाल सिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर से ‘द ट्रिब्यून’ नामक अंग्रेजी समाचार पत्र का प्रकाशन आरंभ किया। विभाजन के उपरान्त लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार-पत्र अब चण्डीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। ‘द टिव्यन’ के सहयोगी प्रकाशन के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘दैनिक ट्रिब्यून’ तथा ‘पंजाबी ट्रिब्यून’ का प्रकाशन आरंभ हुआ। हरिभमि-हरिभमि समूह 5 सितंबर, 1996 को अस्तित्व में आया।
  • हरिभूमि समाचार-पत्र एक साप्ताहिक-पत्र के रूप में आरंभ हुआ था। नवंबर 1997 से यह साप्ताहिक समाचार-पत्र दैनिक समाचार-पत्र के रूप में प्रकाशित किया जाने लगा। उस समय इस समाचार पत्र को ‘हरिभमि रोहतक’ के नाम से जाना जाता था। परन्तु, इस संस्करण में पूरे हरियाणा की खबरें संकलित होती थीं। 1998 में दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए हरिभूमि के दिल्ली संस्करण की शुरुआत हुई थी। इसके उपरांत वर्ष 2001 में छत्तीसगढ़ में हरिभूमि के बिलासपुर संस्करण की शुरुआत हुई।

हरियाणा प्रदेश की साहित्य अकादमी , पंचकूला(Sahitya Academy of Haryana Pradesh, Panchkula)

हरियाणा की साहित्यिक परंपरा भी उतनी ही प्राचीन है जितनी हिंदुस्तान में आर्य सभ्यता। प्रदेश की साहित्यिक परंपरा पौराणिक सरस्वती नदी के तट पर वेदों की रचना से आरंभ होकर महर्षि वेद व्यास द्वारा महाभारत की रचना तथा श्रीकृष्ण द्वारा गीता के उपदेश से होती हुई कवि सरदास मार्कण्डेय, पं. लख्मीचन्द, हाली पानीपती, संतोख सिंह, बाबा फरीद, उदयभानु हंस के दिखाए मार्ग से यहाँ तक पहुँची है।

प्रदेश में उच्च साहित्यिक प्रतिमान स्थापित करने, विभिन्न भाषाआ का साहित्यिक गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने हरियाणा की सांस्कृतिक व साहित्यिक विरासत में शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 25 जुलाई, 1971 को हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा साहिता अकादमी का गठन किया गया। इस अकादमी का प्रशासनिक नियंत्रण शिक्षा विभाग से सूचना, जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग को स्थानान्तरित हो जाने के उपरान्त 26 अगस्त, 2011 को हरियाणा साहित्य अकादमी का पुनर्गठन किया गया।

हरियाणा साहित्य अकादमी के अध्यक्ष हरियाणा के मुख्यमत्री तथा दावारष्ठ उपाध्यक्ष-राज्य के सूचना, जनसंपर्क और सांस्कृतिक कार्य मंत्री तथा राज्य के शिक्षा मंत्री होते हैं। इसके अलावा इस अकादमी में कार्यकारी उपाध्यक्ष, निदेशक तथा उपाध्यक्ष भी होते हैं।

हरियाणा प्रदेश की साहित्य अकादमी  के कार्य(Works of Sahitya Akademi of Haryana Pradesh)\

  • हिन्दी तथा हरियाणवी को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न भाषाओं व उनके साहित्य को बढ़ावा देने हेतु साहित्यकारी के मध्य पारस्परिक सहयोग को प्रोत्साहित करना।
  • भारतीय भाषाओं तथा साहित्य, इतिहास और संस्कृति में हरियाणा के योगदान पर शोधकार्य को बढ़ावा देना।
  • ऐतिहासिक, कलात्मक व साहित्यिक पाण्डुलिपियों का संरक्षण तथा उनका प्रकाशन।
  • उच्च साहित्यिक स्तर की रचनाओं का दूसरी भाषाओं में अनुवाद।
  • साहित्यिक सम्मेलन, गोष्ठियाँ तथा पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित करना या प्रायोजित करवाना।
  • उल्लेखनीय योगदान के लिए साहित्यकारों का सम्मान करना तथा श्रेष्ठ साहित्यिक कृतियों के लिए पुरस्कार देना।
  • लोक साहित्य के संरक्षण हेतु प्रयास करना तथा लोक साहित्य में शोध को प्रोत्साहित करना।

हरियाणा प्रदेश की साहित्य अकादमी द्वारा साहित्यकारों को दिए जाने वाले प्रमुख सम्मान(The major honors given by the Sahitya Akademi of Haryana Pradesh to litterateurs)

हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा प्रदेश के साहित्यकारों को अलंकृत करने के लिए प्रतिवर्ष साहित्यकार सम्मान योजना कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत विभिन्न विधाओं के लिए साहित्यकारों को निम्नांकित सम्मान दिए जाते हैं

हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष दिए जाने वाले साहित्य सम्मान

  • पुरस्कार – आजीवन साहित्य साधना सम्मान

पुरस्कार राशि-  5 लाख रुपये

पात्रता  –  राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी/हरियाणवी साहित्य में अतुल्य योगदान हेतु प्रदत्त। सम्मानित विद्वान का हरियाणा का अधिवासी होना आवश्यक नहीं है।

  • पुरस्कार – पं. माधवप्रसाद मिश्र सम्मान

  हिन्दी/हरियाणवी साहित्य में विशेष योगदान

          बहुचर्चित, प्रशंसित एवं विभिन्न संस्थाओं से पुरस्कृत साहित्यकारों हेतु

          जन्म से हरियाणवी हों अथवा 25 वर्ष से हरियाणा में रहकर साहित्य सृजन  कर रहे हों।

  • पुरस्कार –       महाकवि सूरदास सम्मान (हिन्दी/हरियाणवी)

पुरस्कार राशि- 1.5 लाख रुपये

पात्रता  –    हिन्दी एवं हरियाणवी भाषा में उल्लेखनीय योगदान हो।

                           लेखक की कम से कम सात पुस्तकें प्रकाशित हों तथा कम से कम एक पुस्तक साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हो

       हरियाणा का अधिवासी हो

  • पुरस्कार –       बाबू बालमुकुन्द गुप्त सम्मान (हिन्दी साहित्य)

पुरस्कार राशि-  4. 1 लाख रुपये

पात्रता –

हरियाणा के अधिवासी हिन्दी साहित्यकार जिनकी कम से कम एक पुस्तक साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हो।

लेखक की कम से कम पांच पुस्तक प्रकाशित हों

  • पुरस्कार –      लाला देशबंधु गुप्त सम्मान

पुरस्कार राशि-   1 लाख रुपये

पात्रता –

हरियाणा के अधिवासी साहित्यकार जिनका साहित्यिक पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान हो।

संपादक या उप-संपादक जिनकी कम से कम दो पुस्तकें प्रकाशित हों

  • पुरस्कार –      पं. लखमीचन्द सम्मान (हरियाणवी भाषा, कला, संस्कृति,लोक साहित्य)

पुरस्कार राशि-  1 लाख रुपये

पात्रता – 

ऐसे साहित्यकार जिनका हरियाणा की भाषा, कला, संस्कृति तथा लोक साहित्य में उल्लेखनीय योगदान हो।

साहित्यकार भारत के किसी भी भाग के अधिवासी हो सकते हैं

लेखक की कम से कम 5 पुस्तकें प्रकाशित हों तथा 1 पुस्तक साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हो।

  • पुरस्कार –       जनकवि मेहर सिंह सम्मान (हरियाणवी कला, संस्कृति,इतिहास व लोक साहित्य)

पुरस्कार राशि-  1 लाख रुपये

पात्रता – 

हरियाणा की कला, संस्कृति, इतिहास व लोक साहित्य तथा हरियाणवी भाषा में विशेष योगदान हो।

लेखक की कम से कम पांच पुस्तकें प्रकाशित हों।

लेखक हरियाणा के किसी भी भू-भाग के अधिवासी हों।

  • पुरस्कार –      हरियाणा गौरव सम्मान

पुरस्कार राशि-  1 लाख रुपये

पात्रता – 

हरियाणा में जन्मे साहित्यकार जो हरियाणा से बाहर रहकर साहित्य के क्षेत्र में हरियाणा को गौरवान्वित कर रहे हों।

लेखक की कम से कम पांच पुस्तकें प्रकाशित हों।

  • पुरस्कार –     आदित्य-अल्हड़ हास्य सम्मान

पुरस्कार राशि-  1 लाख रुपये

पात्रता – 

ऐसे साहित्यकार जिनका राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी/हरियाणवी हास्य तथा व्यंग्य के क्षेत्र में श्रेष्ठ योगदान हो।

लेखक की कम से कम पांच मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हों

  • पुरस्कार –      श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान

पुरस्कार राशि-  1 लाख रुपये

पात्रता – 

हरियाणा अधिवासी महिला रचनाकार जिनका हिन्दी/हरियाणवी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान हो

 

  • साहित्यकारों के चयन के लिए दो स्तरीय प्रणाली अपनाई जाती है। प्रथम स्तर पर सम्मान काल सराय प्रणाली अपनाई जाती है। प्रथम स्तर पर सम्मान के लिए प्राप्त आवेदनों को अकादमी द्वारा गठित तीन गैर-सरकारी सदस्यों (विषय विशेषज्ञ) की एक समिति के समक्ष रखा जाता है।  यह समिति प्रत्येक सम्मान के लिए तीन-तीन नामों का पैनल तैयार करती है। इस पैनल में से प्रत्येक सम्मान हेत साहित्यकारों का अन्तिम चयन एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा किय जाता है।

हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा संचालित प्रमुख योजनाएँ(Major schemes run by Haryana Sahitya Akademi)

  • श्रेष्ठ कृति पुरस्कार योजना/हिन्दी, हरियाणवी तथा अंग्रेजी भाषा-हिंदी, हरियाणवी तथा अंग्रेजी भाषा-अकादमी द्वारा हिन्दी/अंग्रेजी/हरियाणवी में प्रति वर्ष सद्यः प्रकाशित रचनाओं के लिए पुस्तक पुरस्कार योजना कार्यान्वित की जाती है। इस प्रतियोगिता में अपने वर्ग के अन्तर्गत सर्वाधिक अक प्राप्त करने वाली पस्तक को रु. 21.000/- की राशि वाला श्रेष्ठ कति परस्कार प्रदान किया जाता है।
  • पुस्तक प्रकाशनार्थ प्रोत्साहन योजना-हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा हिंदी एवं हरियाणवी में लिखित अप्रकाशित पुस्तको के प्रकाशन हेतु प्रतिवर्ष ‘आर्थिक सहयोग प्रोत्साहन योजना कार्यान्वित की जाती है। इस योजना के अन्तर्गत प्रकाशन योग्य पाई जान वाली पाण्डुलिपियों को 10,000/- की अनुदान राशि प्रकाशनार्थ प्रदान की जाती है।
  • हिन्दी कहानी प्रतियोगिता योजना-वार्षिक आधार पर आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता के अन्तर्गत प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली रचनाओं को क्रमशः रु. 5000/- रु. 4000/- रु. 3000/- की पुरस्कार राशि दी जाती है। पुरस्कृत रचना अकादमी की पत्रिका ‘हरिगंधा’ में प्रकाशित की जाती है।

हरियाणा प्रदेश की साहित्य अकादमी द्वारा कार्यान्वित अन्य योजनाएँ(Other schemes implemented by Sahitya Akademi of Haryana Pradesh)

  • पाठक पुरस्कार योजना
  • विद्यालय स्तर पर नवोदित लेखन प्रतियोगिता।
  • साहित्यिक उत्सवों के आयोजन हेतु सहायतानुदान योजना।
  • प्रदेश की साहित्यिक, स्तरीय लघु-पत्रिकाओं हेतु अनुदान योजना।
  • महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं हेतु नवोदित लेखन प्रतियोगिता।

हरियाणा प्रदेश की साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका-‘हरिगंधा'(Literary magazine ‘Harigandha’ published by Sahitya Akademi of Haryana Pradesh)

हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा हिन्दी भाषा में मासिक साहित्यिक पत्रिका ‘हरिगंधा’ का नियमित प्रकाशन किया जाता है। इस साहित्यिक पत्रिका में सृजनात्मक तथा समीक्षात्मक दोनों प्रकार की रचनाएँ प्रकाशित की जाती हैं। पत्रिका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने के लिए लेखक हरियाणा का अधिवासी होना आवश्यक नहीं है।

हरियाणा प्रदेश में पंजाबी साहित्य अकादमी(Sahitya Academy in Haryana Pradesh Punjabi)

हरियाणा में पजाबी भाषा लोगों का एक बड़ा भारा सख्या है। उत्तरा हरियाणा क अबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल यमनाना

जावा भाषा हिन्दी के समान हा लाकाप्रय ह। हारयाणा म पजाबी भाषा क उत्थान तथा पजाबी साहित्य के पोसा पजाबी साहित्य अकादमी का गठन किया गया है। इस अकादमी का मुख्यालय पंचकूला में है। हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी की स्थापना के उद्देश्य-पजाबी साहित्य अकादमी प्रदेश में पंजाबी साहित्य का  थान तथा साहित्यकारों के संरक्षण हेतु मील का पत्थर सिद्ध हुई है।

हरियाणा प्रदेश पंजाबी में साहित्य अकादमी प्रमुख उद्देश्य(Sahitya Akademi in Haryana Pradesh Punjabi main objectives)

  • पंजाबी भाषा एवं इसके साहित्य का उत्थान तथा प्रचार-प्रसार।
  • प्रदेश में पंजाबी लोक साहित्य का संरक्षण एवं उत्थान।
  • प्रदेश में पंजाबी से संबद्ध साहित्यकारों एव लेखका का रचनाओ तथा साहित्य में उनके योगदान को प्रकाशित करता करवाना।
  • पंजाबी भाषा तथा पंजाबी लोक साहित्य से संबंधित उत्सवों का आयोजन करना।
  • पंजाबी साहित्य से संबंधित संगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा सेमिनार का आयोजन करना।
  • प्रदेश में पंजाबी भाषा के प्राचीन साहित्य का संरक्षण तथा प्रचार करना।

हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी द्वारा प्रदत्त पुरस्कार तथा सम्मान(Awards and honors conferred by Haryana Punjabi Sahitya Akademi)

प्रदेश में पंजाबी साहित्य के उत्थान तथा साहित्यकारा क सम्मान का सरकारों के सम्मान हेतु हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी द्वारा प्रदत्त प्रमुख साहित्य सम्मान यहां सूचीबद्ध किए गए हैं।

  • पुरस्कार/सम्मान                           पुरस्कार राशि
  • हरियाणा पंजाबी गौरव सम्मान         2,50,000/
  • भाई संतोख सिंह सम्मान                  1,25,000/
  • बाबा शेख फरीद पुरस्कार                1,11,000/
  • संत तरन सिंह वहिमी पुरस्कार         1,00,000/
  • कवि हरभजन सिंह रैनू पुरस्कार         51,000/
  • रागी/डाढ़ी/लोक गायक पुरस्कार       51,000/
  • पत्रकारिता पुरस्कार                            51,000/

हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘शब्द बूंद'(Magazine ‘Shabd Drop’ published by Haryana Punjabi Sahitya Akademi)

पंजाबी साहित्य के उत्थान हेतु हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी द्वारा मासिक साहित्यिक पत्रिका ‘शब्द बूंद’ का प्रकाशन किया जाता है। पंजाबी भाषा में प्रकाशित होने वाली यह साहित्यिक पत्रिका युवा लेखक-लेखिकाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करती है। इस पत्रिका में 6 रचनाएँ ‘बाल कहानी’ होती हैं ताकि, बाल लेखक-लेखिकाओं की रचनाओं को भी प्रोत्साहन दिया जा सके।

हरियाणा प्रदेश में उर्दू साहित्य(Urdu literature in Haryana state)

अकादमी प्रदेश में उर्दू भाषा तथा साहित्य के उत्थान के उद्देश्य से 22 दिसंबर, 1985 को हरियाणा उर्दू अकादमी’ की स्थापना की गई। पिछले 3 दशक में उर्दू भाषा के संरक्षण के लिए इस अकादमी ने निरंतर प्रयास किए हैं।

हरियाणा उर्दू अकादमी की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य(The main objectives of the establishment of Haryana Urdu Academy)

  • हरियाणा प्रदेश में उर्दू भाषा का प्रसा र तथा प्रचार।
  • उर्दू भाषा सीखने के इच्छुक लोगों के लिए प्रदेश में उर्दू केन्द्रों की स्थापना करना।
  • प्रदेश में उर्दू लोक साहित्य का उत्थान।
  • प्रदेश से जुड़े उर्दू लेखकों तथा साहित्यकारों की रचनाओं और साहित्य में उनके योगदान को प्रकाशित करवाना
  • वृद्ध उर्दू साहित्यकारों के कल्याण हेतु विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • उर्दू भाषा तथा लोक साहित्य से संबंधित उत्सवों का आयोजन करना।
  • मुशायरों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा सेमिनार का आयोजन करना।
  • प्रदेश में उर्दू के प्राचीन साहित्य का संरक्षण तथा प्रचार करना।

हरियाणा उर्दू साहित्य अकादमी की योजनाएँ तथा उपलब्धियाँ(Schemes and achievements of Haryana Urdu Sahitya Akademi)

  • पुस्तक प्रकाशन हेतु आर्थिक सहायता-उर्दू साहित्यकारों के सहायतार्थ चुनिंदा पाण्डुलिपियों के प्रकाशन हेत हरियाणा उर्द साहित्य अकादमी द्वारा रु. 10,000/- तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
  • साहित्यिक उत्सवों के आयोजन हेतु वित्तीय सहायता-इस योजना के अन्तर्गत हरियाणा उर्दू साहित्य अकादमी द्वारा प्रदेश में उर्द भाषा से जुड़े साहित्यिक तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन हेतु अधिकतम रु. 7,000/- तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।

हरियाणा उर्दू साहित्य अकादमी द्वारा प्रदत्त पुरस्कार(Award  given by Haryana state Urdu Sahitya Akademi)

  • राष्ट्रीय हाली सम्मान-राष्ट्रीय हाली सम्मान हरियाणा उर्दू साहित्य अकादमी द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह परस्कार राष्ट्रीय स्तर पर उर्दू भाषा तथा साहित्य में उत्कृष्ट योगदान देने वाले उर्दू साहित्यकारों को प्रदान किया जाता है। इस परस्कार के विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप रु. 1,00,000/- की राशि दी जाती है।
  •                                         पुरस्कार/सम्मान                        पुरस्कार राशि
  •                                      मुंशी गुमानी लाल सम्मान                  21,000/
  •                                कुंवर मोहिन्द्र सिंह बेदी सम्मान               21,000/
  •                                 सुरेन्द्र पंडित सोज सम्मान                     21,000/

हरियाणा उर्दू साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित पत्रिकाएँ(Journals published by Haryana Urdu Sahitya Akademi)

हरियाणा उर्दू अकादमी द्वारा दो त्रैमासिक पत्रिकाओं ‘जमना तट’ तथा ‘उर्दू दिशा’ का प्रकाशन किया जाता है।

  • जमना तट (पत्रिका)-जमना तट आधुनिक उर्दू साहित्य की पत्रिका है।
  • उर्दू दिशा(पात्रका)-यह त्रैमासिक पत्रिका देवनागरी लिपि में प्रकाशित होती है। यह पत्रिका गैर-उर्दुभाषी लोगों को उर्दू साहित्य से जोड़ने का हरियाणा उर्दू साहित्य अकादमी का अनूठा प्रयास है।

हरियाणा प्रदेश में संस्कृत साहित्य अकादमी(Sanskrit Sahitya Akademi in Haryana Pradesh)

हरियाणा प्रदेश में संस्कृत भाषा के विकास तथा संवर्द्धन हेत हरियाणा सरकार द्वारा 8 अगस्त, 2002 को हारयाणा सस्कृत का गठन किया गया था।

हरियाणा संस्कृत साहित्य अकादमी की स्थापना के उद्देश्य(Objectives of establishment of Haryana Sanskrit Sahitya Akademi)

  • संस्कृत भाषा एव उसके साहित्य के उत्थान, प्रचार-प्रसार हेतु अकादमी अनुदान प्रदान करना तथा हरियाणा राज्य के लोगों में, संस्कृत भाषा एवं उसके साहित्य को प्रोत्साहित करना।
  • संस्कृत साहित्य से संबंधित जीवनी, शब्द कोश, ज्ञानकोश, शब्दावलियों, साहित्यिक कृतियों तथा संस्कत साहित्य की पाण्डुलिपियों का संरक्षण करना।
  • साहित्यकारा के सहयोग से संस्कृत भाषा एवं साहित्य के विकास को बढावा देना तथा प्राचीन संस्कृत साहित्य को प्रोत्साहित करना।
  • संस्कृत भाषा, साहित्य, इतिहास, संस्कृति में हरियाणा के योगदान पर शोध कार्य को प्रोत्साहित करना एवं शोध पत्रिका का प्रकाशन।
  • संस्कृत भाषा और प्रख्यात संस्कृत साहित्यकारों से संबंधित विशेष कार्यक्रम, साहित्यिक सम्मेलन, गोष्ठियाँ तथा प्रदर्शनी आयोजित करना।
  • श्रेष्ठ साहित्यकारों एवं संस्कृत भाषा की विशिष्ट पुस्तकों के लिए पुरस्कार प्रदान करना।

हरियाणा संस्कृत साहित्य अकादमी द्वारा प्रदत्त विभिन्न पुरस्कार तथा सम्मान(Various awards and honors conferred by Haryana Sanskrit Sahitya Akademi)

हरियाणा संस्कृत साहित्य अकादमी द्वारा प्रदत्त साहित्यिक सम्मान

  • साहित्यिक सम्मान                      पुरस्कार राशि                                    पात्रता
  • हरियाणा संस्कृत गौरव सम्मान        1,50,000/                        साहित्यकार के रूप में राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय पहचान हो।

      संस्कृत साहित्य में उल्लेखनीय योगदान

  • महर्षि वाल्मीकि सम्मान               1,00,000/                    साहित्यकार द्वारा संस्कृत भाषा एवं साहित्य की सभी विधाओं पर मौलिक

लेखन/शोध कार्य में उल्लेखनीय योगदान दिया गया हो।

  • महर्षि वेदव्यास सम्मान               1,00,000/            विद्वान द्वारा संस्कृत काव्य लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया गया हो।
  • महाकवि बाणभट्ट सम्मान           51,000/-              साहित्यकार द्वारा संस्कृत गद्य लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया गया हो।

आचार्य सम्मान

  • आचार्य सम्मान                                पुरस्कार राशि                                       पात्रता
  • गरु विरजानन्द आचार्य सम्मान         51,000/-                                संस्कृत व्याकरण शिक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए।
  • विद्यामार्तण्ड पं. सीताराम शास्त्री      51,000/-                                संस्कृत साहित्य शिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए।                 आचार्य सम्मान
  • युधिष्ठिर मीमांसक आचार्य  सम्मान                     51,000/-                              वेद, ज्योतिष या कर्मकाण्ड के क्षेत्र में शिक्षण के लिए                                                                                                                                उल्लेखनीय  सम्मान  योगदान
  • स्वामीधर्मदेव संस्कत समाराधक सम्मान-यह सम्मान हरियाणा अधिवासी संस्कृत पाठशालाओं/गुरुकुलों को संचालित करने वाली या संचालकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार के विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप 51,000/- की राशि प्रदान की जाती है।संस्कृत परस्कार योजना-हरियाणा संस्कृत अकादमी द्वारा संस्कृत पुरस्कार योजना के अन्तर्गत-गद्य-विधा, पद्य-विधा, नाटक, काय तथा अनवाद आदि विधाओं के क्षेत्र में लिखित पुस्तकों के लिए 31,000/- की राशि पुरस्कार स्वरूप दी जाती है।

हरियाणा संस्कृत साहित्य अकादमी द्वारा संचालित प्रमुख योजनाएं(Major schemes run by Haryana Sanskrit Sahitya Akademi)

  • पुस्तक प्रकाशनार्थ सहायतानुदान योजना।
  • लघु संस्कृत कथा/संस्कृत नाटक प्रतियोगिताओं का आयोजन।
  • शास्त्री/आचार्य छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना।
  • संस्कृत पत्रिकाओं हेतु अनुदान योजना।
  • अभावग्रस्त लेखकों को वित्तीय सहायता योजना।
  • साहित्यिक उत्सवों के आयोजन हेतु सहायता अनुदान।

हरियाणा संस्कृत अकादमी द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका(Monthly magazine published by Haryana Sanskrit Academy)

  • ‘हरिप्रभा’-हरियाणा संस्कत अकादमी द्वारा मासिक साहित्यिक पत्रिका ‘हरिप्रभा’ का प्रकाशन किया जाता है। इस पात्रका में सृजनात्मक एवं समीक्षात्मक साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित की जाती हैं।

हरियाणा प्रदेश की ग्रन्थ अकादमी, पंचकूला(Granth Academy of Haryana Pradesh, Panchkula)

हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाने की दिशा में पहल करते हए भारत सरकार द्वारा वैज्ञानिक तथा तकनाका शब्दावली आयोग की देखरेख में 1969 में सभी विश्वविद्यालय स्तरीय मानक ग्रन्थ निर्माण हेत पाठय-पस्तक प्रकाशन बोर्ड/विश्वविद्यालीय प्रकोष्ठ एवं हिन्दी ग्रन्थ अकादमियों की स्थापना का निर्णय लिया गया। पांच हिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी ग्रन्थ अकादमियों की स्थापना के अभियान के अन्तर्गत हरियाणा में भी 1970 में ‘हरियाणा हिन्दी ग्रन्थ अकादमी’ की स्थापना की गई। अपनी स्थापना के साथ ही हरियाणा ग्रन्थ अकादमी द्वारा विशेषज्ञों के सहयोग से मानविकी तथा विज्ञान संकायों के लगभग सभी विषयों में ग्रन्थ निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हुई। इस अकादमी का मुख्यालय पंचकूला में है।

वर्ष 1979 में हरियाणा सरकार द्वारा भाषा विभाग के स्थान पर हरियाणा साहित्य अकादमी की स्थापना की गई तथा ग्रन्थ अकादमी का इसमें विलय करते हुए अकादमी में स्वतंत्र रूप से ग्रन्थ प्रभाग स्थापित किया गया ताकि ग्रन्थ निर्माण का कार्य बाधित ना हो।

ग्रन्थ अकादमी के महत्त्व के दृष्टिगत हरियाणा सरकार द्वारा 1 सितंबर, 2011 को स्वतंत्र रूप से हरियाणा ग्रन्थ अकादमी का पुनर्गठन किया गया है ताकि विश्वविद्यालय स्तरीय ग्रन्थ निर्माण का कार्य प्राथमिकता से किया जा सके। हरियाणा ग्रन्थ अकादमा द्वारा विज्ञान एव मानविकी संकायों के 23 विषयों की अभी तक 213 पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं, जिनमें से 202 मौलिक ग्रन्थ हैं तथा 61 अन्य भाषाओं के ग्रन्थों का अनुवाद हैं।

हरियाणा ग्रन्थ अकादमी द्वारा त्रैमासिक पत्रिका ‘सप्तसिंध’ तथा मासिक पत्रिका ‘कथा समय’ का प्रकाशन किया जाता है। हरियाणवी संस्कृति के संरक्षण हेतु हरियाणा ग्रन्थ अकादमी द्वारा पं. लखमीचंद ग्रन्थावली’, ‘पं. मांगेराम ग्रन्थावली’ तथा ‘बाजेभगत ग्रन्थावली’ का भी प्रकाशन किया गया है।

हरियाणा प्रदेश का इतिहास एवं संस्कृति अकादमी(Academy of History and Culture of Haryana State)

हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी मूलत: जुलाई 2006 में हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा) के अन्तर्गत हरियाणा इतिहास, संस्कृति एवं सामाजिक विकास केन्द्र के रूप में अस्तित्व में आई थी। चार वर्ष उपरान्त 27 जुलाई, 2010 को हरियाणा सरकार द्वारा इस केन्द्र का पुनर्गठन करते हुए हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी का गठन किया गया। 7 जून, 2013 को हरियाणा सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करते हुए इस अकादमी को वैधानिक स्वायत्तता प्रदान की गई। इस अकादमी के संस्थापक निदेशक प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. के.सी. यादव रहे हैं। स्थापना के समय हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी का मुख्यालय गुरुग्राम में था जिसे, जुलाई 2016 में गुलजारी लाल नंदा केन्द्र, कुरुक्षेत्र में स्थानान्तरित कर दिया गया।

हरियाणा प्रदेश का इतिहास एवं संस्कृति अकादमी की स्थापना के उद्देश्य(Objectives of establishment of Haryana State’s History and Culture Academy)

  • हरियाणा के इतिहास, संस्कृति, आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन पर शोध को बढावा देना।
  • राज्य में विभिन्न कालखण्ड तथा सभ्यताओं से संबंधित ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक सामग्री एकत्र करना तथा उसका अध्ययन करना।
  • इतिहास एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में अध्ययन तथा अनुसंधान को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु राज्य में पुस्तकालयों की स्थापना करना तथा विशेष व्याख्यान, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं का आयोजन करना।

हरियाणा प्रदेश की अकादमी की संरचना(Structure of Academy of Haryana Pradesh)

प्रदेश के मख्यमंत्री इस अकादमी के पदेन अध्यक्ष हैं। प्रदेश के शिक्षा मंत्री इस अकादमी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा राज्य के मय सचिव हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी के उपाध्यक्ष होते हैं।

इनके अलावा हरियाणा सरकार के सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग, शिक्षा विभाग, पुरालेख विभाग तथा परातत्व विभाग के प्रधान सचिव और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र; महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक तथा चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के कुलपति इस अकादमी के सदस्य बनाए गए हैं। अकादमी के निदेशक तथा अधिकतम दस सदस्य राज्य सरकार की अनुशंसा के आधार पर महामहीम राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।

हरियाणा प्रदेश की माटी कला बोर्ड(Mati Arts Board of Haryana Pradesh)

प्रदेश में परंपरागत हस्तशिल्प, मिट्टी के बर्तन तथा मिट्टी से बनी वस्तुओं, शिल्पकलाओं से जुड़े कलाकारों के पोत्यात ला सरकार द्वारा दिसम्बर 2010 में हरियाणा माटी कला बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की गई। प्रारंभ में दस साल काल दो वर्ष निर्धारित किया गया था। यह बोर्ड मिट्टी से जुड़ी विभिन्न शिल्पकलाओं के प्रोत्साहन हेत कार्य करता

वर्ष 2016 में हरियाणा माटी कला बोर्ड का पुनर्गठन किया गया। नवगठित बोर्ड में बोर्ड के अध्यक्ष सहित कल साय न है। इस बोर्ड में-एक अध्यक्ष, दो अधिकारिक सदस्य तथा चार गैर-सरकारी सदस्य होते हैं। बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी सदस्य सचिव होता है। हरियाणा माटी कला बोर्ड का मुख्यालय पंचकूला में है।

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