हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक सुषमा तथा साँस्कृतिक धरोहर को हिम के आँचल में समेट-सहेज कर विकसित करने वाला प्रदेश है हिमाचल प्रदेश। इसके उत्तर में धरा का नन्दन कानन जम्मू-कश्मीर है तो पश्चिम व दक्षिण में पंजाबहरियाणा हैं। पूर्व में कैलास (कैलाश) को मुकुट रूप में धारण किये त्रिविष्टप (तिब्बत) तथा देवभूमि उत्तराखण्ड विद्यमान हिमाचल प्रदेश अकूत वन सम्पदा से भरपूर है। इसका 37 प्रतिशत क्षेत्र बहुमूल्य लकड़ी व जड़ी बूटियाँ प्रदान करने वाले वनों से आच्छादित है। यहाँ गेहूँ, चावल, मक्का की खेती होती है। सेब, खूबानी, लीची और आलू-बुखारा के बागान यहाँ की अधिसंख्या को आर्थिक दृष्टि से समुन्नत करने में सक्षम हैं। सेंधा नमक, स्लेट, डोलमाइट, चूना-पत्थर, खड़िया इत्यादि खनिज औद्योगीकरण के कार्य को आगे बढा रहे हैं।

चिंतपर्णी, ज्वालामुखी, नैनादेवी, ब्रजेश्वरी देवी (नगरकोट, कांगडा) इत्यादि शक्तिपीठ न केवल हिमाचल प्रदेश वरन् सम्पूर्ण भारतवर्ष में आध्यात्मिक दृष्टि से श्रद्धा के केन्द्र हैं। कुल्लू का दशहरा, किन्नौर-भरमौर घाटी के लोकगीत व नृत्य इस प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।

हिमाचल ही वह पवित्रभूमि है जहाँ हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर प्रलयकाल के उपरान्त आदि पुरुष मनु ने आधुनिक सृष्टि की रचना की। व्यास नदी के किनारे मनाली के निकट विद्यमान मनुमन्दिर आज भी उनकी स्मृति जगा रहा है। ‘रिवालसर’ में सनातन, बौद्ध और सिक्ख मतावलम्बियों के देवालयों से सुशोभित समन्वित दृश्य आह्लादकारी हैं। ‘मणिकर्ण’ में गरम जल स्रोतों के पास शिव मन्दिर और गुरुद्वारे की उपस्थिति मणिकांचन संयोग कही जा सकती है। शिमला इस प्रदेश की राजधानी है।

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