हसन खाँ मेवाती

इब्राहिम लोदी के शासन काल में वह लोदियों के अधीन मेवात के सरदार थे। 1526 ई. में पानीपत की पहली लड़ाई में हार के बाद दिल्ली पर लोदियों की सत्ता का अंत हो गया। परन्तु, मेवात में हसन खां मेवाती के नेतृत्व में जनता ने बाबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और विद्रोह कर दिया। 1527 ई. में खानवा में बाबर की सेनाओं से युद्ध करते हुए हसन खाँ मेवाती वीरगति को प्राप्त हुए और मेवात पर बाबर का अधिकार हो गया। वह अपने समय का सबसे पराक्रमी शासक था। उसके राज्य में वर्तमान मेवात का क्षेत्र, नारनौल तथा कानोंड का कुछ भाग और अलवर का क्षेत्र सम्मिलित था।

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