हरियाणवी रंगमंच तथा फिल्में

हरियाणवी फिल्में (Haryanvi Movies)

हरियाणा में हिन्दी फिल्में बड़े चाव से देखी जाती हैं। इसके बावजद प्रदेश में हरियाणवी फिल्मों का इतिहास चार दशक से भी अधिक पुराना है। हारयाणवा भाषा में बनी पहली फिल्म-‘हरफल सिंह जाट जलाणी’ थी। 1970 में बनी इस फिल्म का निर्देशन आनंद कुमार ने किया

सत, 1914 म ‘बारा-शेरा’ तथा ‘वीर घटोत्कच’ नामक दो फिल्में बनीं। बीरा-शेरा का निर्देशन अनप सिंह ने किया था।

राना का हरियाणवी बोली की पहली व्यवसायिक रूप से सफल फिल्म माना जाता है। 1982 में बनी इस फिल्म का निर्देशन अरविंद स्वामी ने किया था। फिल्म के कलाकारों में सुमित्रा हुड्डा, शशि रंजन तथा भाल सिंह प्रमुख थे।

1984 में बनी हरियाणवी फिल्म ‘चन्द्रावल’ ने सफलता के झंडे गाडे। चन्द्रावल को हरियाणवी फिल्म जगत की प्रथम सुपरहिट फिल्म माना जाता है। फिल्म के निर्देशक जयंत प्रभाकर थे। फिल्म में मुख्य भूमिकाएँ-उषा शर्मा, जगत जाखड़, नसीब सिंह कुण्डु तथा दरियाव सिंह मलिक द्वारा निभाइ गइ था। इस फिल्म ने फरीदाबाद में रजत जयंती मनाई। फिल्म की निर्माता उषा शर्मा थी तथा लेखक थे-देवी शंकर प्रभाकर। इसी वष (1984) भाभा का आशीर्वाद’ नामक एक अन्य फिल्म भी रिलीज हुई। प्रभाकर फिल्म्स के बैनर तले 1985 में ‘छैल गैल्यां जांगी’ तथा लाडा वसता’ नामक दो फिल्में बनी। ‘छैल गैल्यां जांगी’ में मुख्य भूमिका भाल सिंह तथा ‘लाडो बसंती’ में मुख्य भूमिकाएँ-अनूप लाठर

आर उषा शमा द्वारा निभाई गई थी। ये दोनों ही फिल्में सफल रहीं। इन फिल्मों की सफलता ने हरियाणवी सिनेमा जगत को एक नई दिशा दी।

कुछ अन्य प्रमुख हरियाणवी फिल्मों (Other major Haryanvi films)

  • निर्माण वर्ष                    फिल्में
  • 1986                 ‘म्हारी धरती म्हारी माँ’, ‘फूल बदन’
  • 1987                 ‘गुलाबो’, ‘छोरा जाट का’, ‘छोरा हरियाणे का’, ‘झनकदार कंगना’
  • 1988                 बैरी (भाल सिंह, शशि रंजन)
  • 1991                 ‘जाटणी’, ‘फूल बदन’, ‘म्हारा पीहर सांसरा’, ‘मुकलावा’, ‘लंबरदार’, ‘फागण आया रे’, ‘के सुपने का जिक्र’
  • 1993                             ‘जाट’
  • 2000                  ‘लाडो’ (आशुतोष राणा, राजेन्द्र गुप्ता, अरूण बाली)
  • 2001                 ‘चांद चकोरी’, ‘चन्द्रो’
  • 2004                 ‘धाकड़ छोरा’
  • 2011                   ‘मुठभेड़-ए प्लानड एनकाउंटर’
  • 2012                     ‘चन्द्रावल-ए’
  • 2014                  ‘माटी करे पुकार’ ‘कुनबा’
  • 2015                   ‘पगड़ी-द ऑनर’

1984 में बनी ‘चन्द्रावल’ के 16 वर्ष बाद सन् 2000 में आई फिल्म ‘लाडो’ ने बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की प्रशंसा बटोरी। राष्टीय स्तर पर रिलीज की गई लाडो फिल्म के निर्देशक अश्विनी चौधरी को इस फिल्म के लिए वर्ष 2000 के लिए दिए जाने वाले राष्ट्रीय फिल्म परस्कारों में ‘इन्दिरा गाँधी अवार्ड फॉर बेस्ट फर्स्ट फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2015 में बनी हरियाणवी फिल्म ‘पगड़ी : द ऑनर’ को 2015 में ‘बेस्ट फीचर फिल्म इन हरियाणवी’ का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया। इसी फिल्म के लिए बलजिन्द्र कौर को सर्वश्रेष्ठ सह-कलाकार’ का पुरस्कार भी दिया गया।

हरियाणवी फिल्मों में भाल सिंह, जगत सिंह जाखड़ तथा उषा शर्मा का योगदान कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। श्री जगत सिंह जाखड को हरियाणवी फिल्मों का सुपर स्टार माना जा सकता है। उषा शर्मा जी ने हरियाणवी फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय से हरियाणवी महिला के संघर्ष को एक नई अभिव्यक्ति दी। अरविंद स्वामी तथा जयंत प्रभाकर को सर्वाधिक सफल हरियाणवी फिल्म निर्देशक माना जाता है। देवीशंकर प्रभाकर को सर्वाधिक हरियाणवी फिल्में बनाने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने ‘चन्द्रावल’ सहित कई फिल्मों की पटकथा लिखी तथा इनके लिए कई हरियाणवी गाने भी लिखे।

हरियाणा के प्रसिद्ध लोक-कलाकार(Famous Folk Artists of Haryana)

हरियाणा के प्रसिद्ध लोक-कलाकार ने  बाध्यताओं और प्रशिक्षण तथा संसाधनों की कमी के बावजूद हरियाणा की माटी से अनेकों ऐसे सशक्त लोक-कलाकार निकले जिन्होंने हरियाणा की सतरंगी संस्कृति का प्रचार देश-विदेश में किया है।

इनमें से कुछ लोक-कलाकारों को यहां सचीबद्ध किया गया है।

  • लोक कलाकार                     क्षेत्र/विधा                                                  विशेष
  •  पं. हरदेराम                 हरियाणवी संगीत नियोजक एवं गायक        इनका संबंध आकाशवाणी दिल्ली से था|
  • डॉ. सुधीर शर्मा                            रंगकर्मी                                      डॉ. सुधीर शर्मा का संबंध रोहतक जिले से था। वह वर्षों तक                                                                                                                    हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षक रहे हैं।
  • दुलीराम                       रंगकर्मी तथा आकाशवाणी कलाकार          इनका संबंध झज्जर जिले के भापड़ौदा गाँव से है।
  • डॉ. सुरेश शर्मा               रंगकर्मी, नाटक कलाकार                       डॉ. सुरेश शर्मा का संबंध पानीपत जिले से है।
  •  महेश वशिष्ठ                                  रंगकर्मी                                  इनका संबंध गुरुग्राम जिले से है।
  • रघुबीर मथाना                             कवि एवं रंगकर्मी                       रघुबीर मथाना संबंध कुरुक्षेत्र जिले के मथाना गाँव से है।
  • रणबीर दहिया                            गायक तथा रंगकर्मी                    हरियाणवी फिल्मों तथा दूरदर्शन के कलाकार रणबीर दहिया का                                                                                                                    संबंध  सोनीपत जिले से है।
  • ईश्वर शर्मा                               गायक तथा रंगमंच कलाकार       ईश्वर शर्मा का संबंध करनाल जिले से है।
  • महावीर गुड्डू                              नायक, हास्य आभनेता,           महावीर गडड एक बेजोड कलाकार रहे हैं। इनका संबंध जींद जिले                                                      तथा फिल्म कलाकार                के गांगोली गाँव से है। महावीर गुड्डू उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं                                                                                                        जिन्होंने  हरियाणवी रंगमंच को एक नई दिशा दी है।
  • जगबीर राठी                            हास्य कवि, गायक, रंगकर्मी,       प्रसिद्ध हास्य कवि तथा रंगकर्मी जगबीर राठी रोहतक के महर्षि                                                                  अभिनेता                            दयानंद विश्वविद्यालय में युवा कल्याण विभाग के निदेशक हैं। राठी                                                                                                        जी हरियाणा सांस्कृतिक अकादमी के निदेशक रह चुके हैं। इनका                                                                                                                         जन्म स्थान जीन्द जिले में है।
  • नरेन्द्र बल्हारा              रंगमंच कलाकार, अभिनेता, आकाशवाणी        स्वर्गीय नरेन्द्र बल्हारा का जन्म स्थान रोहतक जिले के बहु                                                         तथा रंगमंच कलाकार                                        अकबरपुर    गाँव के है। हैं
  • राजबाला फौगाट              रंगमंच, आकाशवाणी तथा दूरदर्शन की      राजबाला फौगाट प्रदेश के प्रमुख रंगमंच कलाकारों में से एक हैं।                                          गायिका एवं लोकनृत्य कलाकार                 इन्होंने   हरियाणवी संस्कृति के प्रसार में उल्लेखनीय योगदान                                                                                                                                   दिया है।
  • राजेन्द्र सिंह खरकिया            लोक कलाकार, रागणी गायक               भिवानी जिले के खरक कलां गाँव में जन्मे राजेन्द्र सिंह वर्तमान                                                                                                                 रागणी गायकों में बेहद प्रतिभावान माने जाते हैं। इन्होंने                                                                                                                          हरियाणवी तथा राजस्थानी में अनेकों रागणी और गीत गाए हैं।
  • बाजे भगत                               रंगकर्मी, रागणीगायक तथा सांगी         रागणी गायक तथा रंगकर्मी (सांगी) कवि बाजे भगत 1898 में                                                                                                                वर्तमानसोनीपत जिले के सिसाना गाँव में पैदा हुए थे। उन्होंने                                                                                                                        15-20 सांग रचे तथा अनेकों रागणियों की रचना की।

हरियाणा के प्रसिद्ध लोक-कलाकार शहीद मेहर सिंह (दहिया)[Famous folk artist of Haryana, Shaheed Mehar Singh (Dahiya)]

रागणी गायक तथा कवि

शहीद (कवि) मेहर सिंह का जन्म 15 फरवरी, 1918 को वर्तमान  सोनीपत जिले के खरखौदा उपमण्डल के गाँव बरोणा में हुआ था। वह बचपन से ही रागणी गायन में रुचि रखते थे तथा जन्मजात कवि थे। वीर मेहर सिंह 1937 में सेना में भर्ती हो गए परन्तु, अपने भीतर के कलाकार को कभी मरने नहीं दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नेताजी सुभाष के आह्वान पर जाट मेहर सिंह आजाद हिन्द फौज को समर्पित हो गए तथा 1945 में मातृभूमि पर जीवन न्योछावर कर दिया। उनके पैतृक गाँव बरोणा में उनका स्मारक बनाया गया है। बरोणा में 15 फरवरी को हर वर्ष उनकी याद में रागणी गायन का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

हरियाणा के प्रसिद्ध लोक-कलाकार महाशय दयाचंद मायना(Famous folk artist of Haryana, Mahasya Dayachand Mayna)

रागणी गायक, कवि एवं रंगकर्मी

हरियाणवी कवि एवं रागणी गायक दयाचंद मायना का जन्म 1913 में| रोहतक के मायना गाँव में हुआ था। वाल्मीकि समुदाय से संबंध रखने वाले महाशय दयाचंद मायना जी ने नेताजी सुभाष के ऊपर सांग लिखा तथा अनेकों रागणियों की रचना की। उन्हें हरियाणा का ‘जॉन मिल्टन’ कहा जाता है। दयाचंद मायना को हरियाणवी का ‘राष्ट्रीय कवि’ माना जाता है। सोनीपत जीले के सिलाना गांव के निवासी गायक छाजूलाल सिलाना इनके शिष्य थे।

दूरदर्शन, फिल्म जगत व मीडिया से जुड़े हरियाणवी(Haryanvi associated with Doordarshan, film world and media)

हरियाणा के कलाकारों का हमेशा से ही फिल्म जगत तथा मीडिया जगत में सशक्त योगदान रहा है। हरियाणा की सितारे-रणदीप हुड्डा, जयदीप अहलावत, परिणति चोपड़ा, मल्लिका सहरावत, मोहित अहलावत आदि अनेक कलाकारों ने प्रदेश का नाम भारत ही नहीं पूरी दुनिया में चमकाया है।

 

 

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