हरियाणवी भाषा एवं हरियाणवी साहित्य

हरियाणा की धरती साहित्यिक दृष्टि से चिरकाल से ही संपन्न रही है। अनेक वैदिक ऋचाओं तथा दार्शनिक ग्रन्थों की रचना इस धरती पर हुई है। भगवान कृष्ण ने यहाँ गीता का उपदेश दिया और महाकवि सरदास ने कृष्ण भक्ति पर आधारित काव्य ग्रन्थों की रचना का। रलावला क रचयिता सम्राट हर्षवर्धन तथा ‘कादंबरी’ के सजक बाणभटट हरियाणा की धरती के ही सपत थे। हरियाणा के साहित्य का प. माधव प्रसाद मिश्र, बाबू बालमुकुन्द गुप्त, पुष्पदंत तथा पंडित लखमीचंद जैसे महान् रचनाकारों ने अपनी लेखनी से सींचा है

आधनिक काल में आचार्य भगवान देव, सत्यदेव वशिष्ठ, विद्याधर शास्त्री, उदभान ‘हंस’. जयनारायण कौशिक, डॉ. शशि भूषण सिहल आदि साहित्यकारों ने इस धरती की शान को चार चांद लगाए हैं।

हरियाणा में संस्कृत साहित्य(Sanskrit literature in Haryana)

  • कवि मयूर भट्ट-महाकवि मयूर भट्ट, कादंबरी के रचयिता बाणभट्ट के समकालीन तथा उनके संबंधी थे। उन्होंने दो ग्रन्थों-‘मयूराष्टक’ तथा ‘सूर्य शतक’ की रचना की। थानेसर निवासी कवि मयूरभट्ट महाराजा हर्षवर्धन के दरबार में पण्डित थ।
  • पं. विद्याधर गौड़-पं. विद्याधर गौड़ का जन्म जीन्द जिले के सिरसा खेड़ी गाँव में हुआ था। अध्ययन के लिए प. विद्याधर जीन्द से बनारस चले गए। इन्होंने वहीं पर अध्ययन किया तथा बाद में अध्यापन से जुड़ गए। पं. विद्याधर गौड़ संस्कृत के अग्रणी विद्वानों में गिने जाते हैं। इन्होंने कात्यायन श्रोतसूत्र की वृत्ति लिखी है। इनके पुत्र श्री बेणी राम गौड़ तथा श्री दौलत राम गोड़ भी संस्कृत के प्रखर विद्वान थे।
  • पं. शिवनारायण शास्त्री-पं. शिवनारायण शास्त्री जी का जन्म सन् 1885 में जीन्द जिले के गतौली गाँव में हुआ था। इनक पिता पं. अमीलाल तथा माता शारदा देवी थे। ये किशारावस्था से ही अध्ययन के लिए काशी चले गए। पं. शिवनारायण शास्त्री ‘सांख्यदर्शन’ में विशेष अभिरुचि रखते थे। लगभग 50 वर्ष संस्कृत शिक्षण के उपरान्त ये ‘खेमराज श्री कृष्णदास प्रेस मुंबई’ से जुड़ गए। इन्होंने ‘न्यायसिद्धान्त मुक्तावली’ की व्याख्या लिखी। शास्त्री जी ने सांख्य ग्रन्थ ‘सांख्यतत्वप्रबोधिनी’ पर टीका लिखी। इन्होंने ‘पुष्पिका’ के नाम से टीका भी लिखी।

हरियाणा में संस्कृत साहित्य के आचार्य विद्यानिधि शास्त्री(Acharya Vidyanidhi Shastri of Sanskrit literature in Haryana)

आचार्य विद्यानिधि शास्त्री का जन्म 18 सितंबर, 1911 को पानीपत जिले के लोहारी गाँव में हुआ था। आचार्य जी की शिक्षा-दीक्षा गुरुकुल भैंसवाल कलां में हुई थी। आचार्य विद्यानिधि जी वेद तथा व्याकरण के अद्भुत विद्वान थे। आचार्य जी ने बचपन में ही यजुर्वेद तथा अष्टध्यायी कण्ठस्थ कर ली थी। पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर के शास्त्री तथा विश्वेश्वरानंद वैदिक शोध संस्थान होशियारपुर में विशिष्ट शोध के उपरान्त इन्होंने गुरुकुल भैंसवाल कलां में वेद तथा व्याकरण के क्षेत्र में अध्यापन किया। इसके अलावा आचार्य जी ने गुरुकुल झज्जर, गुरुकुल मटिण्डु, गुरुकुल कुरुक्षेत्र, आर्य हाई स्कूल पानीपत तथा डी.ए.वी. कॉलेज लाहौर में भी अध्यापन किया। आचार्य जी की कृत्तियों में व्यवहारभानु, दयानन्द चंद्रोदयम्, श्री गांधी चरितामृतम्, भक्त फूलसिंहचरितम् तथा इन्दिरा कीर्तिशतकम् आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्होंने सामवेद का हिन्दी पद्यानुवाद भी किया था।

  • पं. सत्यदेव वशिष्ठ-पं. सत्यदेव वशिष्ठ जी का जन्म 24 अगस्त, 1912 को जालंधर जिले के माहल-महिला गाँव में पं. अनंत राम के घर हआ। वशिष्ठ जी ने 1922 में स्वामी विरजानंद जी के आश्रम में प्रवेश ले लिया तथा पं. ब्रह्मदत्त जिज्ञासु से अष्टध्यायी, महाभाष्य तथा निरुक्त आदि का अध्ययन किया। इन्होंने वैद्यचूडामणि श्री नाथूराम मौद्गल्य से आयुर्वेद का तथा तिलकराज से नाडी-विज्ञान का विशेष ज्ञान प्राप्त किया। इनकी काव्यकृति ‘सत्याग्रह नीति काव्यम्’ है। इसके अलावा नाडीतत्वदर्शनम, विष्णुसहस्रनाम तथा सत्यभाष्यम् आदि उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।
  • पं. छज्जूराम विद्यासागर-पं. छज्जूराम शास्त्री संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे। इनका जन्म सन् 1894 में जीन्द जिले के रिटौली ग्राम में पं. मोक्षराज के घर हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा इनके चाचा पं. शिवदत्त के सानिध्य में हुई। थानेसर निवासी पं. गरुडध्वज ने भी इन्हें दीक्षा दी थी। इनकी रचनाओं में कुरुक्षेत्राष्टकम्, दुर्गाभ्युदयानाम् नाटकम्, सुलतान चरित्रम्, शिवकथामृतम् आदि प्रमुख हैं।

हरियाणा में संस्कृत साहित्य के माधवाचार्य(Madhwacharya of Sanskrit literature in Haryana)

श्री माधवाचार्य शास्त्री जी का जन्म सन् 1897 में कैथल जिले के कौल गांव में हुआ था। इन्होंने दिल्ली के श्रीरामानुज संस्कृत विद्यालय में पढ़ाई करके पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर से शास्त्री की परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 1993 में उन्होंने संस्कत विद्यालय बहावलपुर के प्राचार्य के पद पर कार्य किया। माधवाचार्य जी ने अनेक देशों की यात्रा की तथा विदेशों में संस्कत विद्यालयों की स्थापना में विशेष योगदान दिया। शास्त्री जी के प्रयासों से “हितवादी वृद्धि’ तथा ‘सनातन धर्म-शास्त्रार्थपंचक’ आदि पत्रिकाओं का प्रकाशन भी हआ। माधवाचार्य जी की रचनाओं में ‘टुडेस्मृति’ तथा ‘कबीरचरित्रम्’ आदि प्रमुख हैं। पं. शिवराम शास्त्री-पं. शिवराम शास्त्री जी का जन्म चरखी-दादरी जिले के बेरला गाँव में

  • पं. शिवदत्त तथा धापों देवी के घर हुआ था। इन्होंने भिवानी, लाहौर, काशी आदि अनेक नगरों में शास्त्रों का अध्ययन किया। शिवराम जी एक प्रकाण्ड विद्वान थे। इन्होंने नारनौंद, जींद, सूरजगढ आदि अनेकों संस्कृत पाठशालाओं में अध्यापन किया। इनकी प्रथम काव्यकति हरियाणा वैभवम है। इसके अतिरिक्त इनके द्वारा रचित दो महाकाव्यों-‘गांधीचरितम्’ तथा ‘नेहरूवंशमहाकाव्यम्’ का अभी तक प्रकाशन नहीं हो पाया है।

 

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