हरियाणा राज्य का भौगोलिक परिचय

हड़प्पा काल से लेकर वर्तमान तक भारत का यह क्षेत्र जो वर्तमान में ‘हरियाणा’ के नाम से प्रसिद्ध है, अपनी विशिष्ट सभ्यता और संस्कृति के कारण दुनिया भर के आकर्षण का केन्द्र रहा है। वर्तमान हरियाणा राज्य का क्षेत्र 1858 में अंग्रेजों द्वारा पंजाब में सम्मिलित कर दिया गया था। 1857 के संघर्ष में हरियाणा की जनता की सक्रिय भागीदारी का दण्ड इस क्षेत्र को आजादी तक लगातार भुगतना पड़ा। 1948 में मास्टर तारा चन्द द्वारा अलग ‘पंजाबी सूबे’ की माँग उठाए जाने के बाद से हरियाणा के अलग प्रदेश के रूप में गठन की माँग ने जोर पकड़ा। लगभग 17 वर्ष तक चले इस संघर्ष और जनादोलन के पश्चात् 23 सितंबर, 1965 को भारत सरकार ने पंजाब राज्य के पुनर्गठन के लिए सरदार हुक्म सिंह के नेतृत्व में एक संसदीय समिति के गठन की घोषणा की। इस कमेटी द्वारा पंजाब राज्य के पुनर्गठन

की अनुशंसा किए जाने के पश्चात् 23 अप्रैल, 1966 को भारत सरकार ने पंजाब के पुनर्गठन और पंजाब-हरियाणा राज्यों के सीमा निर्धारण के उद्देश्य से ‘शाह आयोग का गठन किया जिसके अध्यक्ष जस्टिस जे०सी० शाह थे। 31 मई, 1966 को ‘शाह आयोग’ द्वारा अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंप दी गई। इस आयोग की अनुशंसा के आधार पर संसद ने 18 सितंबर, 1965 में पंजाब  राज्य पुनर्गठन विधेयक, 1966 पास कर दिया। 1 नवबर, 1966 को 17वें राज्य के रूप में हमारा हरियाणा अस्तित्व में आया।

हरियाणा की भौगोलिक स्थिति (Geographical location of Haryana)

हरियाणा प्रदेश उत्तर-पश्चिमी भारत में पंजाब के मैदान के दक्षिणी भाग में स्थित है। इस राज्य का अक्षांशीय विस्तार 27°39′ उत्तरी अक्षांश से 30°55′ उत्तरी अक्षांश तक है तथा देशान्तरीय विस्तार 74°28′ से 77°36′ पूर्वी देशान्तर तक। हरियाणा का कुल क्षेत्रफल 44,212 वर्ग कि०मी० है जो भारतीय गणतंत्र के कुल क्षेत्रफल का लगभग 1.34% हिस्सा है। प्रदेश के उत्तर-पश्चिम में पंजाब तथा चंडीगढ; उत्तर-पूर्व में हिमाचल प्रदेश स्थित है। हरियाणा के पूर्व में उत्तर प्रदेश, पश्चिम तथा दक्षिण में राजस्थान की सीमाएँ लगती हैं।

अब सवाल यह उठता है कि हरियाणा में कुल कितने जिले हैं? तो हम आपको बता दें हरियाणा में वर्तमान में 22 जिले हैं । क्षेत्रफल की दृष्टि से सिरसा (4277 वर्ग कि०मी०) सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला जिला है तथा फरीदाबाद (741 वर्ग कि०मी०) सबसे कम क्षेत्रफल वाला जिला है। दादरी राज्य का सबसे नया जिला है जिसे 2016 में जिले का दर्जा मिला। दादरी के जिला बनने से पूर्व भिवानी जिला हरियाणा का सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला जिला था।

हरियाणा की भू-गर्भिक संरचना (Geological Structure of Haryana)

हरियाणा का 93.76% भाग समतल और तरंगित मैदान है। जो घग्घर और यमुना नदियों के मध्य स्थित है। इसका लगभग 68.21% क्षेत्र एक समतल मैदान है और 22.55% भाग एक तरंगति मैदान के रूप में विस्तृत है। राज्य के उत्तरी भाग का ढलान सामान्यतः उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है। मैदान की समुद्र तल से ऊँचाई सामान्यत: 200 से 300 मी० है। इसके उत्तर-पूर्वी भाग में शिवालिक श्रेणियाँ तथा दक्षिणी भाग में अरावली पर्वत श्रृंखला की अवशिष्ट पहाड़ियाँ विस्तृत हैं।

राज्य की भू-गर्भिक संरचना प्रारंभ से ही अस्थाई रही है और इसमें निरंतर परिवर्तन होता रहा है। हालाँकि ‘आजोइक काल’ और ‘पेलेजोइक काल’ के दौरान हरियाणा की भू-गर्भिक संरचना में किसी उल्लेखनीय परिवर्तन के प्रमाण नहीं मिलते परन्तु ‘मेसोजोइक काल’ में हरियाणा की भू-गर्भिक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए। कर्नल एम० एल० भार्गव के अनुसार हरियाणा के दक्षिणी भाग को समुद्र छूता था। ये समुद्र पश्चिम में सारस्वत और पूर्व में अखावत थे। इस काल में उत्तर भारत के बाकि क्षेत्रों के साथ-साथ यह क्षेत्र भी ऊपर उभर आया। दिल्ली की नज़फगढ झील और राजस्थान में स्थित सांभर झील क्रमशः इन्हीं दोनों समुद्रों की निशानियाँ हैं। ___ भौगोलिक दृष्टिकोण से ‘केनेजोइक काल’ हरियाणा के लिए बड़ा महत्वपूर्ण रहा। इसी काल में इस क्षेत्र में पहाड-टीले और नदी-नाले अस्तित्व में आए। राज्य में जलवायु का निर्धारण काल भी यही माना जाता है। हालाँकि उस काल में जलवायु वर्तमान से काफी अलग थी। उस समय इस क्षेत्र में गर्मी कम थी तथा ग्रीष्मकाल की अवधि भी कम थी।

हरियाणा का भू-आकृतिक परिदृश्य (Geographic landscape of Haryana)

बेशक हरियाणा की गिनती देश के छोटे राज्यों में होती है। परन्तु, इसके बावजूद भी 44,212 वर्ग कि०मी० में फैला यह प्रदेश भ-आकतिक रूप से विविधताओं से भरा क्षेत्र है। प्रदेश का लगभग 93.76% भाग एक समतल तथा तरंगित मैदान है जिसका निर्माण हिमालय से निकलने वाली नदियों की निक्षेपण क्रिया से हुआ है। इस मैदान को ‘घग्घर-यमुना का मैदान’ के नाम से भी जाना जाता है।

राज्य के लगभग 3.09% भाग पर अरावली की अवशिष्ट पहाड़ियों का विस्तार है। महेन्द्रगढ़, रेवाड़ी, गुडगांव, भिवानी. दादरी, पलवल और फरीदाबाद जिलों में फैला यह क्षेत्र पहाड़ी तथा चट्टानी है। इसी प्रकार हरियाणा के उत्तरी तथा उत्तर-पूर्वी भाग में भी पहाडी क्षेत्र का विस्तार है। राज्य के लगभग 1.67% भाग पर शिवालिक श्रृंखला का एक विस्तृत ‘गिरिपाद मैदान’ के रूप में विस्तार है। यह श्रंखला पंचकला. अम्बाला और यमुनानगर जिलों में विस्तृत है। राज्य के लगभग 0.56% भाग पर शिवालिक की पहाडियाँ विस्तत हैं। हरियाणा के क्षेत्र को भौगोलिक दृष्टि से निम्नांकित आठ श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है.

शिवालिक की पहाड़ियां

शिवालिक (The Shiwaliks)-हरियाणा के तीन उत्तर-पूर्वी जिलों-पंचकुला, अंबाला और यमुनानगर में शिवालिक पहाड़ियों का विस्तार है| यह पहाड़ियां हिमालय पर्वत कर्म की सबसे आधुनिक रचना है जिनका निर्माण उत्तर अभी नूतनकाल में हिमालय के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित संकरी खाडी के तल के हिमालयी नदियों के निक्षेपण  से हुए उठान से हुआ था।

ऊँचाई के आधार पर शिवालिक की श्रेणियों का वर्गीकरण इस प्रकार किया गया है:

(i) उच्च शिवालिक श्रेणियाँ

इनकी औसत ऊँचाई 600 मी०से अधिक है। हरियाणा की सबसे ऊँची पहाड़ियाँ ‘मोरनी हिल्स’ इसी श्रृंखला का भाग हैं। मारना पहाड़िया की सबसे ऊँची चोटी ‘करोह (Karoh)’ है। इस की समुद्रतल से ऊँचाई लगभग 1,514 मी० है। यह पंचकुला जिले में स्थित है तथा पंचकुला जिला मुख्यालय से मोरनी हिल्स हैं। इसकी दूरी लगभग 30 कि०मी० है। ‘करोह’ न केवल मोरनी पहाड़ियों की सबसे

ऊँची चोटी है बल्कि यह हरियाणा की भी सबसे ऊँची चोटी है।

(ii) निम्न शिवालिक श्रेणियाँ

इस पर्वत श्रृंखला में पहाड़ियों की औसत ऊँचाई 400-600 मी० है। इनकी रचना रेत, बजरी तथा – ‘संगुटिकाइम (Couglomerates)’ से हुई है।

गिरिपाद मैदान (Piedmont Plains)

शिवालिक पहाड़ियों तथा ‘ यमुना-घग्घर मैदान’ के मध्य स्थित यह ‘संक्रमण क्षेत्र (Iransitional zone)’ एक 25 कि०मी० चौड़ी पट्टी के रूप में यमुना नदी से आरंभ होकर यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला जिलों से होता हआ घग्घर नदी तक विस्तत है। अपेक्षाकत कम उपजाऊ इस मैदान का ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम का आर हा इस गिरिपाद मैदान की समद्र तल से औसत ऊँचाई लगभग 300-375 मी० है। इसे स्थानीय भाषा में ‘घर (ghar)’ कहा जाता है। इस क्षत्र का प्रमुख नदिया घग्घर और मारकण्डा हैं। इस क्षेत्र में अनेक छोटे-छोटे बरसाती नाले भी पाए जाते हैं। इन बरसाती नदी-नालों से हुए भूमि कटान के कारण इस मैदान में अनेक छोटे-बड़े गड्ढे बन गए हैं जिन्हें पहाड़ी भाषा में ‘चो (Cho)’ कहा जाता है।

जलोढ़ मैदान (Alluvial Plains)

उत्तर में शिवालिक के गिरिपाद मैदान से दक्षिण में अरावली तक, यमुना व घग्घर नदियों क मध्य, अत्यत मन्द ढाल का यह मैदान अंबाला, यमुनानगर, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत, रोहतक जीन्द, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, गुड़गाँव (गुरुग्राम) तथा फरीदाबाद जिलों में विस्तृत है। इस जलोढ़ मैदान को स्थानीय भाषा में बांगर (Banger) कहते हैं। इस क्षेत्र में मारकण्डा, सरस्वती तथा चोटांग नदियाँ प्रवाहित होती हैं। समुद्र तल से इस मैदान की औसत ऊँचाई 220-280 मी० के बीच है। यह एक अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र है जो प्रदेश को गेहूँ तथा धान का समृद्ध क्षेत्र बनाता है।

बाढ़ का मैदान (Flood Plains)

ऐसे मैदान हरियाणा के पूर्वी तथा उत्तर-पश्चिमी भाग में मिलते हैं। उत्तर-पश्चिमी हरियाणा में घग्घर तथा मारकण्डा नदियों से इस मैदान का निर्माण हुआ है। इन्हें स्थानीय भाषा में क्रमश: ‘नैली (Naili)’ तथा ‘बेट (Bet)’ कहा जाता है। पूर्वी हरियाणा में इस मैदान का निर्माण यमुना और उसकी सहायक नदियों से हुआ है जो प्रदेश में यमुनानगर से लेकर फरीदाबाद तक प्रवाहित होती है तथा हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा का निर्धारण करती है। यह एक तरंगित मैदान है, जिसमें अन्तर्ग्रन्थित घाटी मार्ग पाए जाते हैं।

बालू के टिब्बे युक्त मैदान (Plain with sand dunes)

बालू का यह मैदान हरियाणा व राजस्थान की सीमा के साथ-साथ पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम हरियाणा के हिसार, भिवानी, महेन्द्रगढ़, रेवाड़ी तथा झज्जर (कुछ क्षेत्र) जिले में फैला हुआ है। राजस्थान से होकर आने वाली गर्म शुष्क पवनों द्वारा कच्छ की ओर से लाई गई बालू के निक्षेप से इन टिब्बों का निर्माण हआ है। सामान्यतः इन टिब्बों की ऊँचाई 3 से 15 मी० तक होती है। जैसी कि बालू की प्रकृति होती है, ये टीले वायु प्रवाह की दिशा में लगातार खिसकते रहते हैं। इस मैदान में पाया जाने वाला भूमिगत जल खारा है। पूर्व में यह संपूर्ण मैदान एक अनुपजाऊ क्षेत्र था परन्त ‘टपकन सिंचाई’ की तकनीक से इस क्षेत्र में भी बाजरा, चना, गेहूँ तथा दलहन की कृषि संभव हो पाई है। बाल के टिब्बों के मध्य निम्न स्थलों को ‘ताल’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु में इनमें जलभराव हो जाने के कारण अस्थाई झील बन जाती हैं जिन्हें ‘ठांठ’ या ‘बावड़ी’ कहते हैं।

अरावली की पहाड़ियों का शुष्क पथरीला मैदान (Rocky terrain of Arawali)

अरावली श्रृंखला विश्व की प्राचीनतम श्रृंखलाओं में से एक है। ये पहाड़ियाँ आज अवशिष्ट रूप में बची हैं। यहाँ पिंड-विच्छेदन (Block-disintegration) के रूप में सूर्यातप द्वारा यान्त्रिक अपरदन निरंतर सक्रिय है। हरियाणा के दक्षिणी भाग में अरावली श्रृंखला की अवशिष्ट पहाड़ियों का विस्तार मात्र है जो राज्य के महेन्द्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी, दादरी, गुडगाँव (गुरुग्राम), पलवल तथा फरीदाबाद जिलों में विस्तृत है। वायु अपरदन के कारण इन पहाड़ियों में नग्न, कठोर और गोलाकार चटटानें पाई जाती हैं। अरावली की श्रृंखला के अवशिष्ट से बना यह क्षेत्र ऊबड़-खाबड़ है। समुद्र तल से इसकी ऊँचाई 225-500 मी० के बीच है। प्रदेश में इन पहाड़ियों का शीर्षतम भाग नारनौल के दक्षिण-पश्चिम में कुलताजपुर ग्राम के निकट स्थित ‘ढोसी की पहाडियाँ हैं जिनकी ऊँचाई 625 मी० है। ढोसी को महर्षि च्यवन की तपोभूमि बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि च्यवनप्रास की खोज यहाँ हुई थी। अरावली की दसरी भुजा ‘दिल्ली रिज’ के रूप में दिल्ली के धौला कुआँ से करोलबाग क्षेत्र से होती हुई दिल्ली विश्वविद्यालय तक फैली है।

तरंगित बालू का मैदान (The Undulating Sand Plain)

दक्षिणी हरियाणा के महेन्द्रगढ़, रेवाड़ी तथा गुड़गाँव (गरुग्राम) में अरावली की चट्टानों के साथ-साथ बालू का यह क्षेत्र वायु की निक्षेप क्रिया से बना है। यह एक तरंगित मैदान है।

अनकाई दलदल (The Ankai Swamps)

हरियाणा के किस भाग में दलदली मिट्टी पाई जाती है?

राज्य के पश्चिम में सिरसा जिले के दक्षिणी भाग में अनकाई दलदल  का एक छोटा सा क्षेत्र मिलता है। हरियाणा के सिरसा जिले में दलदली मिट्टी पाई जाती है| प्रदेश में यह क्षेत्र सबसे कम ऊँचाई का क्षेत्र (समुद्रतल से ऊँचाई 200 मी०) है। धरातल के मन्द ढाल के जलप्रवाह में बाधा उत्पन्न होने से इस क्षेत्र में दलदल बनी हुई है।

हरियाणा भूगोल के महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points of Haryana Geography)

  • समुद्रतल से दूरी होने के कारण प्रदेश की जलवायु महाद्वीपीय प्रकार की है।
  • 1948 में मास्टर ताराचन्द ने अलग पंजाबी सूबे की माँग की।
  • भारत सरकार ने 23 सितंबर, 1965 को पंजाब राज्य के पुनर्गठन के लिए सरदार हुक्म सिंह के नेतृत्व में एक संसदीय समीति का गठन किया।
  • 23 अप्रैल, 1966 को भारत सरकार ने पंजाब के पुनर्गठन और पंजाब-हरियाणा राज्यों के सीमा निर्धारण के लिए जस्टिस जे०सी० शाह की अध्यक्षता में ‘शाह आयोग’ का गठन किया।
  • 31 मई, 1966 को ‘शाह आयोग’ ने हरियाणा के गठन के लिए अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
  • भारतीय संसद ने 18 सितंबर, 1966 को पंजाब राज्य पुनर्गठन विधेयक, 1966 पास किया।
  • 1 नवबर, 1966 को पंजाब के विभाजन के बाद हरियाणा देश का 17वाँ राज्य बना।
  •  हरियाणा एक भू-आवेष्ठित (Land-Locked) राज्य है।
  • हरियाणा का अक्षांशीय विस्तार 27°39′ उत्तरी अक्षांश से 30°55′ उत्तरी अक्षांश तक है।
  • हरियाणा का देशान्तरीय विस्तार 74°28′ से 77°36′ पूर्वी देशान्तर के मध्य है।
  • हरियाणा प्रदेश का कुल क्षेत्रफल 44,212 वर्ग कि०मी० है।
  • हरियाणा का क्षेत्रफल भारतीय गणतंत्र के कुल क्षेत्रफल का लगभग34% भाग है।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से हरियाणा देश का 21वाँ राज्य है।
  • हरियाणा की सीमाएँ देश के चार राज्यों-पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान और दो केन्द्रशासित प्रदेशों चण्डीगढ़ और दिल्ली के साथ लगती है।
  • यमुना नदी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच हरियाणा की पूर्वी सीमा का निर्धारण करती है।
  • वर्तमान में हरियाणा में कुल 22 जिले हैं।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से सिरसा हरियाणा  का सबसे बड़ा जिला है जिसका कुल क्षेत्रफल 4277 वर्ग कि०मी० है।
  • फरीदाबाद हरियाणा का सबसे छोटा (741 वर्ग कि०मी०) जिला है।
  • हरियाणा का76% भाग एक समतल और तरंगित मैदान है जो घग्घर और यमुना नदियों के मध्य स्थित है।
  • इस मैदान की समुद्र तल से ऊँचाई 200 से 300 मी० के बीच है।
  • हरियाणा के उत्तर-पूर्वी भाग में शिवालिक श्रेणियाँ तथा दक्षिणी भाग में अरावली की अवशिष्ट पहाडियाँ विस्तत हैं।
  • हरियाणा की भू-गर्भिक संरचना में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन ‘मेसोजोइक काल’ में आए।
  • केनेजोइक काल में हरियाणा में पहाड़-टीले और नदी-नाले अस्तित्व में आए। प्रदेश में जलवाय का निर्धारण काल भी यही माना जाता है।
  • हरियाणा के09% भाग पर अरावली की अवशिष्ट पहाड़ियों का विस्तार है।
  • डा० जसबीर सिंह ने प्रदेश को भौगोलिक दृष्टि से आठ भागों में बाँटा है।
  • हरियाणा के तीन उत्तर-पूर्वी जिलों; पंचकुला, अंबाला और यमुनानगर में शिवालिक पहाडियों का विस्तार है।
  • मोरनी पहाड़ियाँ (Morni Hills) पंचकुला जिले में स्थित हैं।
  • मोरनी पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी ‘करोह’ है जिसकी समुद्र तल से ऊँचाई लगभग 1514 मी० है। यह हरियाणा की सबसे ऊँची चोटी है।
  • गिरिपाद मैदान एक 25 कि०मी० चौड़ी पट्टी के रूप में यमुनानगर, अंबाला और पंचकुला जिलों में फैला हुआ है।
  • शिवालिक के गिरिपाद मैदान को स्थानीय भाषा में ‘घर’ (ghar) कहा जाता है।
  • बरसाती नदी-नालों के कारण हुए भूमि कटान के कारण अंबाला, यमुनानगर और पंचकला जिलों में विस्तृत शिवालिक गिरिपाद मैदान में छोटे-बड़े गड्ढ़े बन गए हैं जिन्हें पहाड़ी भाषा में ‘चो’ (Cho) कहते हैं। पदेश में शिवालिक के गिरिपाद मैदान से अरावली तक, यमुना व घग्घर नदियों के मध्य अत्यंत मंद दाल का जलोढ़ मा विस्तत है जिसे स्थानीय भाषा में ‘बांगर’ कहा जाता है।
  • उत्तर-पश्चिमी हरियाणा में घग्घर तथा मारकण्डा नदियों से बाढ़ के तरंगित मैदान का निर्माण हुआ है जिसे स्थानीय भाषा में क्रमशः ‘नैली’ (Naili) तथा बेट (Bet) कहा जाता है।
  • दक्षिणी हरियाणा में बालू के टिब्बों के मध्य निम्न स्थलों को स्थानीय भाषा में ‘ताल’ कहते हैं।
  • वर्षा ऋतु में इन ‘ताल’ में जलभराव हो जाने के कारण अस्थाई झील बन जाती है जिन्हें ‘ठांठ’ या ‘बावड़ी’ कहा जाता है।
  • हरियाणा के दक्षिणी क्षेत्र में महेन्द्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी, गुड़गाँव (गुरुग्राम) मेवात, पलवल तथा फरीदाबाद जिलों में अरावली श्रृंखला की अवशिष्ट पहाड़ियों का विस्तार है।
  • हरियाणा में अरावली का शीर्षतम भाग नारनौल के दक्षिण-पश्चिम में कलताजपर ग्राम के निकट स्थित ‘ढोसी की पहाडिया’ हैं जिनकी समुद्र तल से ऊंचाई 625 मी० है।
  • अरावली श्रृंखला की दूसरी भुजा ‘दिल्ली रिज’ के रूप में दिल्ली के धौला कुआँ से दिल्ली विश्वविद्यालय तक विस्तृत है।
  • हरियाणा में सबसे कम ऊंचाई का क्षेत्र प्रान्त के पश्चिमी क्षेत्र में सिरसा जिले के दक्षिणी भाग में पाए जाने वाले अनकाई दलदल  हैं।
  • अनकाई दलदल के क्षेत्र की समुद्र तल से ऊँचाई लगभग 200 मी० है।

हरियाणा भूगोल पर आधारित कुछ परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न

(Some exam useful important questions based on Haryana Geography)

प्रश्न 1. यमुना नदी हरियाणा में कहां से प्रवेश करती है?

(Where does Yamuna river enter Haryana?)

उत्तर – यमुनानगर (Yamunanagar)

प्रश्न 2. 1948 में किसके द्वारा अलग पंजाबी राज्य की मांग की गई? (Who demanded a separate Punjabi state in 1948?)

उत्तर – मास्टर तारा चन्द (Master Tara Chand)

प्रश्न 3. हरियाणा राज्य का गठन कब हुआ? (When was the state of Haryana formed?)

उत्तर – 1 नवंबर 1966 (The state of Haryana was formed on 1st November 1966)

प्रश्न 4.  क्षेत्रफल की दृष्टि से हरियाणा का सबसे बड़ा जिला कौन सा है? (Which is the largest district of Haryana in terms of area?)

उत्तर – सिरसा – 4277 वर्ग कि०मी०  (Sirsa is the largest district of Haryana in terms of area, which is spread over 741 square kilometers.)

प्रश्न 5. क्षेत्रफल की दृष्टि से हरियाणा का सबसे छोटा जिला कौन सा है? (Which is the smallest district of Haryana in terms of area?)

उत्तर –  फरीदाबाद – 741 वर्ग कि०मी० (Faridabad is the smallest district of Haryana in terms of area.)

प्रश्न 6. वर्तमान में हरियाणा राज्य में कुल जिलों की संख्या कितनी है? (What is the total number of districts in the state of Haryana at present?)

उत्तर – हरियाणा में 22 जिले हैं (There are currently 22 districts in Haryana.)

प्रश्न 7. हरियाणा के उत्तर पूर्वी भाग में कौन सी पर्वत श्रेणी है?

उत्तर – शिवालिक श्रेणियाँ (Shivalik ranges in its north-eastern part)

प्रश्न 8. हरियाणा के दक्षिणी भाग में कौन सी पर्वत श्रंखला है? (Which mountain range is there in the southern part of Haryana?)

उत्तर – अरावली पर्वत श्रृंखला (The Aravalli mountain ranges are in the southern part of Haryana.)

प्रश्न 9. हरियाणा राज्य का कुल क्षेत्रफल कितना है? (What is the total area of the state of Haryana?)

उत्तर – 44,212 वर्ग कि०मी० (The area of the state of Haryana is 44,212 square kilometers.)

प्रश्न 10. हरियाणा की सबसे ऊंची चोटी का नाम क्या है? (?)

उत्तर – हरियाणा की सबसे ऊंची चोटी करोह है (The highest peak of Haryana is Kroh.)

 

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