हरियाणा की जलवायु एवं वर्षा

हरियाणा एक भू-आवेष्ठित (Land locked) राज्य है। समुद्र तल से दूरी होने के कारण प्रदेश की जलवायु महाद्वीपीय प्रकार की है| यद्यपि यह एक मानसूनी प्रदेश है, परंतु समुद्र तल से दूरी अधिक होने के कारण वार्षिक तापांतर अधिक रहता है और वर्षा भी कम होती है| राज्य के उत्तर पूर्वी भाग का हिमाचल के  साथ सटा होने के कारण तथा इस क्षेत्र में शिवालिक शंखला के विस्तार के कारण राज्य के उत्तरी भाग में उपाष्ण आद जलवायु (शुष्क शीत ऋतु) मिलती है|  दक्षिणी हरियाणा का क्षेत्र राजस्थान से सटा होने के कारण प्रदेश के इस भाग में शुष्क जलवायु मिलती है। इस प्रकार हम राज्य की जलवायु को मुख्य रूप से दो वर्गों में विभाजित कर सकते हैं:

उपोष्ण स्टेपी जलवायु (Hot Semi-arid Climate)

राज्य में अधिकांश क्षेत्रों में उपोष्ण स्टेपी जलवायु मिलती है। मध्य मार्च से जन के अन्त तक ग्रीष्मकाल चलता है। जून के अन्त तक आते-आते तापमान 45°-46° तक हो जाता है। शीतकाल अक्तूबर से मार्च तक चलता है। बीच का समय वर्षा काल है। राज्य में वर्षा का वार्षिक औसत 30 से०मी० से 110 से०मी० तक रहता है। यद्यपि राज्य में वर्षा बंगाल की खाड़ी से आने वाली दक्षिणी-पूर्वी मानसून से होती है परन्तु हरियाणा इसका बहुत अधिक लाभ नहीं ले पाता। वर्षा के अभाव के कारण ही राज्य में ग्रीष्मकाल में तापमान ऊँचा रहता है तथा वाष्पीकरण की अधिकता बनी रहती है।

आर्द्र उपोष्ण (शुष्क शीत ऋतु) जलवायु (Humid Sub-tropical Climate)

हरियाणा में इस प्रकार की जलवायु शिवालिक शृंखला के दक्षिणवर्ती 72 कि०मी० चौडी मैदानी पट्टी में पाई जाती है। सर्दियों का औसत तापमान 18°C से नीचे रहता है। जनवरी में तापमान 39-4° तक नीचे आ जाता है। उत्तरी शिवालिक क्षेत्र में तो शीतकाल में । रात्री का तापमान हिमांक बिन्दु तक आ जाता है। संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि राज्य की जलवायु पर शिवालिक की पर्वतीय जलवाय का भी प्रभाव है तथा दक्षिणी भाग में। राजस्थान की अर्द्ध-मरुस्थलीय जलवायु भी राज्य को प्रभावित करती है। प्रदेश की जलवाय गंगा के मैदान की आई जलवायु तथा राजस्थान की अर्द्धमरुस्थलीय जलवायु के बीच की मानी जा सकती है। प्रदेश में स्पष्टत: तीन ऋतुएँ पाई जाती है|

  • ग्रीष्म ऋतु (The Summers)

    प्रदेश में ग्रीष्म काल लंबा रहता है जो मध्य मार्च से प्रारंभ होकर जून के अन्त तक चलता है। ग्रीष्म ऋतु के दौरान राज्य का औसत तापमान 35° से० के लगभग रहता है। मध्य मार्च में तापमान बढ़ते-बढ़ते जून के मध्य तक 45°-46° से० तक पहुँच जाता है। प्रदेश के दक्षिणी व दक्षिण-पश्चिमी जिलों में राजस्थान से आने वाली गर्म व शुष्क हवाएं चलती हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘लू’ (Loo) कहा जाता है।

  • शीत ऋतु (The Winters)

    समुद्र तल से दूरी अधिक होने के कारण राज्य में वार्षिक तापान्तर अधिक रहता है। प्रदेश में शीतकाल मध्य सितंबर से मार्च तक माना जाता है। शीतकाल में राज्य का औसत तापमान 12° से० तक रहता है। सितंबर से तापमान घटते-घटते जनवरी तक 2°-3° से० तक आ जाता है। हिसार के कुछ क्षेत्रों तथा शिवालिक की तलहटी के कुछ क्षेत्रों में जनवरी माह में रात्री का तापमान शून्य तक गिर जाता है। शीतकाल में फारस की खाड़ी से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण शेष उत्तर भारत की तरह हरियाणा में बर्फीली हवाएं चलती हैं तथा बेहद हल्की वर्षा भी होती है जो रबी की फसल के लिए वरदान मानी जाती है।

  • वर्षा ऋतु  (The Raining) 

    आइए जानते हैं, हरियाणा में मानसून का आगमन कब होता है? हरियाणा एक मानसूनी प्रदेश है। प्रदेश में सामान्यतः जून के अन्तिम सप्ताह में मानसून का आगमन होता है। राज्य में वर्षा ऋतु का समय सामान्यतः जुलाई से प्रारंभ होकर मध्य सितंबर तक चलता है। प्रदेश में वर्षा मुख्यत: बंगाल की खाडी से आने वाले दक्षिण-पूर्वी मानसून से होती है। राज्य की भौगोलिक स्थिति के कारण दक्षिण-पश्चिमी मानसन हरियाणा में अधिक वर्षा नहीं कर पाता। प्रदेश में वर्षा का वार्षिक औसत 30 से०मी० से 110 से०मी० के मध्य रहता है। बंगाल की खाड़ी में उठने वाली मानसून बंगाल, बिहार से होती हुई पर्वतीय क्षेत्रों से होते हए मध्य जलाई तक प्रदेश के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित यमुनानगर जिले में दस्तक देती है। ये मानसून पवनें हरियाणा के उत्तरी जिलों यमनानगर, अंबाला तथा पंचकला जिलों में शिवालिक श्रृंखला के साथ-साथ विस्तार ले लेती है। लगभग इसी समय अरब सागर से उठने वाली दक्षिण-पश्चिमी मानसून की काठियावाड शाखा गुजरात तथा राजस्थान से होकर हरियाणा में पहुँच जाती है। मानसून की ये दोनों शाखाएँ पंजाब के पटियाला जिले तथ हरियाणा के जीन्द और कैथल जिलों के उत्तरी भाग में आकर मिलती हैं तथा प्रदेश में वर्षा करती हैं। परंतु  हरियाणा अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण मानसून का अधिक लाभ नहीं ले पाता।

परीक्षा हेतु हरियाणा की जलवायु पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • समुद्रतल से दूरी होने के कारण हरियाणा प्रदेश की जलवायु महाद्वीपीय प्रकार की है।
  • महाद्वीपीय जलवायु होने के कारण प्रदेश में वार्षिक तापान्तर अधिक रहता है और वर्षा भी कम होती है।
  • प्रदेश का उत्तर-पूर्वी भाग हिमाचल से सटा हुआ है जिसके कारण राज्य के उत्तरी भाग में उपोष्ण आर्द्र जलवायु (शुष्क-शीतऋतु) मिलती है।
  • प्रदेश का दक्षिणी भाग राजस्थान से सटा होने के कारण दक्षिणी हरियाणा में शुष्क जलवायु मिलती है।
  • हरियाणा के अधिकांश क्षेत्रों में उपोष्ण स्टेपी जलवायु मिलती है।
  • हरियाणा का वार्षिक औसत 30 से०मी० से 110 से०मी० तक रहता है।
  • प्रदेश में शिवालिक श्रृंखला के दक्षिणवर्ती क्षेत्रों में आर्द्र उपोष्ण (शुष्क-शीत ऋतु) जलवायु मिलती है।
  • हरियाणा के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी जिलों में राजस्थान से आने वाली गर्म व शुष्क पवन चलती हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में (Loo) लू कहते हैं।
  • राजस्थान के साथ लगते हरियाणा के दक्षिण-पश्चिमी जिलों में 30 से०मी० से भी कम वर्षा होती है।
  • शिवालिक क्षेत्र में 110 से०मी० तक वर्षा होती है।
  • प्रदेश में वर्षा का समय सामान्यतः जुलाई से सितंबर के मध्य तक रहता है। शीतकाल में फारस की खाड़ी से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्तर भारत में हल्की वर्षा होती है। प्रदेश के पश्चिमी भाग में इस शीतकालीन वर्षा का अधिक प्रभाव नहीं रहता। यह वर्षा रबी की फसल के लिए वरदान मानी जाती है।
  • हरियाणा के उत्तर-पूर्वी भाग में सर्वाधिक वर्षा होती है।
  • हरियाणा के दक्षिण-पश्चिमी भाग में सबसे कम वर्षा होती है।
  • कुछ छोटी पहाड़ियों से घिरा होने के कारण प्रदेश के यमुनानगर जिले में औसत रूप से सर्वाधिक वर्षा होती है।

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