जॉर्ज टॉमस

1756 ई. में आयरलैंड में जन्मे जॉर्ज टॉमस वीरता, कूटनीति, महत्वाकांक्षा और मौकापरस्ती का बेजोड संगम थे। वह 26 वर्ष की उम्र में 1782 ई. में एक नाविक के रूप में भारत आया तथा हैदराबाद के निज़ाम के यहाँ तोपची बन गया। 1787 ई. में वह दिल्ली आ गया तथा थोड़े ही समय मे बेगम सामरू का खासम-खास बन गया। बेगम सामरू ने अपनी दत्तक पुत्री का विवाह जॉर्ज टॉमस से कर दिया तथा उसे टप्पल की अपनी जागीर का प्रशासक बना दिया। यहाँ से वह मराठों की सेवा में चला गया। समय के साथ उसने हांसी को अपनी रियासत बना लिया और हांसी के दुर्ग में अपनी राजधानी स्थापित कर ली। थोड़े ही समय में गुड़गाँव, रोहतक, सोनीपत, हिसार तथा भिवानी जिलों का एक बड़ा भू-भाग उसने अपने राज्य में मिला लिया। नवंबर, 1798 ई. में जॉर्ज टॉमस ने जीन्द रियासत पर हमला किया और जीन्द नरेश को हथियार डालने पर मजबूर कर दिया। फरवरी, 1799 को जॉर्ज टॉमस को जीन्द छोड़ना पड़ा। 1801 ई. में फ्रैंच जनरल पैरों ने मराठों और सिखों के साथ एक संघ बनाकर जॉर्ज टॉमस पर हमला कर दिया। सिखों, मराठों तथा फ्रेंच सेनाओं की सम्मिलित शक्ति ने जार्ज टॉमस को 23 दिसंबर, 1801 ई. को फ्रेंच जनरल बोगेन के समक्ष आत्मसमर्पण करने को मजबूर कर दिया। जनवरी, 1802 के आरंभ में वह अनूप शहर चला गया। 22 अगस्त, 1802 को बहरामपुर में उसकी मृत्यु

हो गई।

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