हरियाणा के रत्न

हरियाणा को यों ही देवभूमि नहीं कहा गया है। हिमालय से आकर मैदानी क्षेत्रों में आर्य सभ्यता का प्रथम ठिकाना हरियाणा को ही बताया जाता है। यहां पर भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए विश्व को ‘कर्म’ का महत्व बताया था। इसी क्षेत्र में महर्षि वेदव्यास ने महाभारत जैसे महाग्रन्थ की रचना की थी। इसी भूमि पर हर्षवर्धन की राजधानी थी। यहीं पर बाणभट्ट ने ‘हर्षचरित’ की रचना का था।

इसी धरती पर पृथ्वीराज चौहान ने पराक्रम दिखाया था। इसी धरती पर भारत की विदेशी पराधीनता की शुरूआत हुई। हरियाणा की धरती पर पलवल में गांधी जी ने भारत में अपनी प्रथम गिरफ्तारी दी। लाला लाजपतराय, चौ. छोटूराम, सेठ छाजूराम, पं. नेकीराम, प. भगवत दयाल शर्मा, राम बहादुर मुरलीधर, पं. श्रीराम शर्मा जैसे स्वतंत्रता के सिपाहियों ने इसी धरती से अंग्रेजों के विरुद्ध स्वाधीनता का जग लड़ा।

हरियाणा के विकास के लिए लोहपुरुष बंसीलाल की दूरगामी नीतियों, चौ. देवीलाल के न्याययुद्ध तथा हरियाणा की जनता के अथक परिश्रम का ही परिणाम है कि हरियाणा में भारत की केवल 2% जनसंख्या होने के बावजूद आज यह प्रदेश भारत के विकास का प्रमुख केन्द्र बनकर उभरा है।

इस लेख मे हरियाणा की भूमि को अपने श्रम तथा रक्त से सींचने वाले हरियाणा के कुछ प्रमुख महापुरुषों का परिचय दिया गया है।