बालकों के असफलता सम्बन्धी कारक

Failure factors for children

पढ़ाई के दौरान बालक विद्यालय स्तर पर कैसे एवं क्यों असफल हो जाते हैं, यह आरम्भ से ही अनुसन्धान (Research) का विषय रहा है। शिक्षार्थियों की असफलता के पीछे कोई एक कारण, नहीं अपितु कारणों की श्रृंखला उत्तरदायी है, जो इस प्रकार

विद्यालय का परिवेश (School environment)

  • विद्यालय का परिवेश काफी हद तक विद्यार्थियों की सफलता एवं असफलता को प्रभावित करता है।
  • विद्यालय का वातावरण बाल-केन्द्रित होना चाहिए तथा विद्यालय की सभी व्यवस्था के केन्द्र में बालकों को होना चाहिए साथ ही विद्यालय का वातावरण जनतान्त्रिक आदर्शों, मौलिकता, स्वतन्त्र चिन्तन तथा सृजन पर आधारित होना चाहिए।

 पारिवारिक माहौल (Family atmosphere)

  •  बालकों की असफलता के लिए पारिवारिक माहौल भी जिम्मेदार होता है। अगर माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक न हों तो वे विलम्ब से पढ़ना प्रारम्भ करते हैं।
  • माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्यों के जागरूक नहीं रहने के कारण बच्चों की सफलता की दर काफी हद तक प्रभावित होती है, क्योंकि परिवार को शिक्षा की प्रथम पाठशाला माना गया है।

अभ्यास का अभाव (Lack of practice)

  •  बच्चे पढ़ाई के दौरान अपने पाठ्यक्रम का उचित तरीके से अभ्यास नहीं करते हैं, इसके परिणामस्वरूप वे सीखे हुए विषयों को भूलने लगते हैं।
  • अभ्यास की कमी के कारण जब बालकों की उपलब्धियों का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर होता है, तो वे असफल हो जाते हैं।

अभिरुचि एवं जिज्ञासा की कमी (Lack of interest and curiosity)

  • विद्यालय स्तर पर अध्ययन के दौरान प्राय: यह देखा जाता है कि बालकों में पढ़ाई के प्रति अभिरुचि एवं जिज्ञासा का अभाव दिखता है।
  • जिसके कारण बच्चे पढ़ाई के प्रति संवेदनशील नहीं हो पाते तथा जब उनकी उपलब्धियों का मूल्यांकन होता है, तो वे पिछड़ जाते हैं तथा असफल हो जाते हैं।

स्वास्थ्य (Health)

  •  पठन-पाठन के लिए बालकों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहना अतिआवश्यक है।
  • स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण बालक पढ़ाई पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं।

कक्षा वर्ग का वातावरण (Classroom environment)

  •  विद्यालय स्तर पर अध्ययन के दौरान कक्षा का माहौल प्रतिस्पर्धात्मक (competitive) एवं अनुशासनात्मक होना चाहिए।
  • यह तभी सम्भव होगा, जब शिक्षक एवं शिक्षार्थी दोनों अपने-अपने कार्यों के प्रति जवाबदेह हों। कक्षा का अनुपयुक्त परिवेश भी बालकों के कमजोर प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार होता है।

शिक्षण विधियाँ एवं युक्तियाँ (Teaching methods and tips)

  • छात्रों के प्रदर्शन एवं उपलब्धियों पर उचित शिक्षण विधि एवं युक्ति का गहरा प्रभाव पड़ता है।
  • अध्यापक यदि अध्यापन (teaching) के दौरान नवीन तरीकों का प्रयोग करते हैं तो बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरुक होंगे।
  • यदि पढ़ाने की परम्परागत विधि अर्थात् ‘रटंत प्रणाली’ पर शिक्षक जोर देंगे तो इसका नकारात्मक प्रभाव बालकों के परीक्षा परिणाम पर पड़ेगा।

प्रेरणा एवं मार्ग दर्शन का अभाव (Lack of motivation and guidance)

  •  यदि बालकों को पढ़ाई के दौरान उचित प्रेरणा एवं मार्गदर्शन मिलता रहे तो वे कभी असफल नहीं होंगे।
  • बालकों को क्या पढ़ना चाहिए? कैसे पढ़ना चाहिए? । पढ़ने की वैज्ञानिक शैली क्या हो, यह काफी हद तक प्रेरणा एवं मार्गदर्शन पर निर्भर करता है।
  • प्रेरणा बालकों में पढ़ाई के प्रति जोश उत्पन्न करती है। इनके अभाव के कारण बच्चे असफल हो सकते हैं।

विद्यालय से भाग जाना (Run away from school)

  • कुछ बच्चे विद्यालय स्तर पर प्रदर्शन में इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि जब विद्यालय में पढ़ाई होती है, तो वे पढ़ने के भय से विद्यालय से भाग जाते हैं तथा विषय-वस्तु के अध्ययन से वंचित हो जाते हैं।
  • इसके परिणामस्वरूप उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर नकारात्मक असर पड़ता है।

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