लैंगिक भेदभाव उत्पन्न करने वाले कारक

Factors causing gender discrimination

बालिकाओं की शिक्षा को न केवल परिवार के सुधार के लिए, बल्कि समुदाय और समाज के सुधार के लिए भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। लैंगिक भेदभाव उत्पन्न करने वाले कुछ प्रमुख कारक निम्नवत् हैं

परिवार की निर्धनता(Family poverty)

परिवार की निर्धनता लैंगिक भेदभाव उत्पन्न करने वाला एक प्रमुख कारण है। परिवार की दयनीय आर्थिक स्थितियाँ बहुत-से माता-पिता को बेटी को विद्यालय भेजने से रोकती हैं। निर्धनता में रह रहे परिवारों में शिक्षा का खर्च उठाने का सामर्थ्य नहीं होता है। एक निर्धन परिवार शायद विद्यालय की पोशाकों, आपूर्तियों और शिक्षा सम्बन्धी खर्चों को पूरा न कर पाए। शिक्षा पर सम्भावित खर्च भी निर्धन परिवारों के लिए विचाराधीन विषय है। यदि बालिकाओं को विद्यालय भेजा जाता है, तो जो बालिकाएँ परिवार की आय की पूर्ति करने के लिए काम करती हैं, अभिभावकों को उस आय से वंचित रहना पड़ता है।

स्त्रियों का निम्न स्तर(Low level of women)

भारत में स्त्रियों का निम्न स्तर बालिकाओं के नामांकन और उन्हें विद्यालय भेजने में बाधा डालने वाला एक बड़ा कारक है, क्योंकि अधिकांश समाज पुरुष-प्रधान है और बालिकाओं की शिक्षा के प्रति माता-पिता की अभिवृत्ति बालिकाओं की शिक्षा को प्रभावित करने वाले निर्णयों में बहुत महत्त्वपूर्ण होती है।

माता-पिता की निरक्षरता(Illiteracy of parents)

हमारे देश में अधिकांश माता-पिता अशिक्षित हैं। वे बालिकाओं की शिक्षा का महत्त्व नहीं समझते हैं। अत: अपनी बेटियों को विद्यालय भेजने के प्रति उनका झुकाव नहीं होता है।

सामाजिक-धार्मिक कारक(Socio-religious factors)

सामाजिक-धार्मिक पहलू को भी प्रभावी पाया गया है। अधिकांश माता-पिता अपनी बेटियों को सह-शिक्षात्मक संस्थानों में भेजने के विषय पर संकोच करते हैं। वे बालिकाओं को विद्यालय भेजने के प्रति इसलिए भी चौकस रहते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है कि समाज के स्वीकृत रीति-रिवाजों और मानकों से उनका अलगाव हो जाएगा।

बालिकाओं के जल्दी विवाह का रिवाज(The custom of early marriage of girls)

बालिकाओं के विद्यालय में नामांकन की दर में कमी का एक कारण बालिकाओं के जल्दी विवाह का होना भी है। उनके परिवार वालों का विचार होता है कि उनकी शिक्षा पर खर्च करने से परिवार को कोई लाभ नहीं होगा।

महिला अध्यापिकाओं की कमी(Shortage of female teachers)

अधिकांश महिला अध्यापिकाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में जाना पसन्द नहीं करती हैं। बहुत-से माता-पिता अपनी बेटियों को उन विद्यालयों में भेजना नहीं चाहते हैं जहाँ पुरुष अध्यापक पढ़ाते हैं। अत: ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत-सी बालिकाएँ शिक्षा से वंचित रह जाती हैं।

 सामाजिक समस्या(social problem)

लैंगिक विषमता हमारे देश में एक सामाजिक समस्या है, एक आदर्श महिला तथा पुरुष की पहचान के प्रतिमान भिन्न हैं। पुत्री को जन्म से ही हेय दृष्टि से देखना, दहेज प्रथा, अशिक्षा आदि के कारण लैंगिक विषमता बनी हुई है।

मनोवैज्ञानिक समस्या(Psychological problem)

महिलाएँ मनोवैज्ञानिक रूप से भी इस विषमता की जिम्मेदार हैं। पूर्वाग्रहों से ग्रसित होने के कारण प्रायः स्त्री ही स्त्री के विकास में बाधा उत्पन्न कर देती है। प्रौढ़ शिक्षा द्वारा इस दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

पूर्वाग्रह और रूढ़िवाद के कारण लैंगिक भेदभाव (Gender discrimination due to prejudice and stereotypes)

  • सामान्यत: पूर्वाग्रह एवं रूढिबद्धता के कारण लैंगिक भेदभाव दिखाई पड़ता है।
  • जब किसी व्यक्ति, जाति, वर्ग या वस्तु के बारे में कोई ऐसी धारणा बन जाती है, जो वास्तविकता से परे हो, उन्हें रूढिबद्ध धारणाएँ कहते हैं। उदाहरणस्वरूप भारत में अधिकतर घरों में लड़कियाँ घरेलू कार्य करती हैं।
  • इसी के आधार पर कोई व्यक्ति सभी लड़कियों से यही अपेक्षा करे कि लड़कियाँ केवल घर का कार्य करने के लिए ही बनी हैं, तो इस प्रकार की धारणा को रूढिबद्ध धारणा कहा जाता है।
  • यदि कोई शिक्षक विद्यालय में आए अतिथि की खान-पान सम्बन्धी सेवा के लिए विद्यालय की लड़कियों को ही नियुक्त करना चाहता है, तो यह उस शिक्षक की रूढिबद्ध धारणा को दर्शाता है।

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