वंचित बालकों की शिक्षा

Education of underprivileged children

वंचित बालक प्रारम्भ में शिक्षा में उतनी अच्छी उपलब्धि नहीं दिखा सकते, जितनी ऐसे बालक दिखाते हैं जो वंचित समुदाय से नहीं आते हैं। सामाजिक, आर्थिक व शैक्षिक रूप से वंचित बालक के लिए आवश्यक है कि अच्छी शिक्षा की व्यवस्था की जाए।

इसके लिए निम्न कदम उठाए जाने चाहिए

  • सामाजिक रूप से वंचित बालक को ऐसे विद्यालयों में प्रवेश दिया जाए जहाँ विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध हों और जो उनके शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक व सामाजिक विकास के लिए उपयुक्त हो।
  • सृजनशीलता को प्रोत्साहित किया जाए।
  • शिक्षण संस्था का वातावरण प्रेरणादायक होना चाहिए।
  • घर के खराब वातावरण की क्षतिपूर्ति विद्यालय में स्वस्थ तथा विविध प्रकार की सहगामी क्रियाओं के द्वारा की जाए। ऐसी पठन सामग्री उपलब्ध कराई जाए जो एकता व समन्वय की भावना जागृत करे।
  • व्यावसायिक शिक्षा का आयोजन किया जाए।
  • हीनता की भावना रोकने के लिए जातिगत आरक्षण के बजाय वर्गगत सुविधाएँ दी जाएँ तथा बच्चों में स्वतन्त्र निर्णय लेने की प्रवृत्ति डाली जाए।
  • कक्षा शिक्षण में शिक्षक उनकी तरफ विशेष ध्यान दें व इस ओर से सावधान रहें कि उनके अनुभव को ध्यान में रखकर ही वह अपने विषय की व्याख्या कर रहे हैं।
  • वंचित बालकों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक शैक्षिक योजना चलाई जानी चाहिए।
  • इसमें गरीबी रेखा से नीचे निवास करने वाले बालकों के लिए एक शिक्षा योजना तैयार की जाए। |
  • ऐसे बालकों को निःशुल्क शिक्षा, आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था, छात्रवृत्ति व आर्थिक सहायता, दोपहर का भोजन व नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें, ड्रेस व अन्य सामग्री दी जाए।
  • इसमें वंचित वर्ग में जाति व धर्म के बजाय आर्थिक स्तर को प्रमुखता मिलनी चाहिए।
  • पिछड़े आदिवासी व साधनहीन क्षेत्रों में अलग से विद्यालयों की स्थापना की जाए जिनमें वंचित बालकों को प्रवेश मिल सके। वंचित बालकों के शिक्षक को भावनात्मक रूप से प्रशिक्षित करना चाहिए ताकि वे ऐसे बालकों के साथ अपने को जोड़ सकें व उनको दयनीय न समझें।

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