प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा

Education of talented children

प्रतिभाशाली बालकों के लिए विशेष शिक्षा की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे बालकों को शिक्षित करने के लिए अध्यापकों का भी विशेष रूप से प्रशिक्षित होना अनिवार्य है।

हैविगहस्ट्र के अनुसार, “प्रतिभाशाली बालकों के लिए शिक्षा का सफल कार्यक्रम वही हो सकता है, जिसका उद्देश्य उनकी विभिन्न योग्यताओं का विकास करना हो।” प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा व्यवस्था निम्न प्रकार होनी चाहिए

 पाठ्यक्रम की समृद्धि (Prosperity of course)

प्रतिभाशाली बालक पाठ्यक्रम को समझने में सामान्य बालकों से कम समय लेते हैं। यह बचा हुआ समय उन्हें किसी और कार्य में व्यस्त करके उपयोग किया जा सकता है।

बुरी सामाजिक आदतों को रोकना (Stop bad social habits)

यदि प्रतिभाशाली बालकों की सृजनात्मक शक्ति का उचित प्रयोग नहीं किया जाता तो वे समाज विरोधी गतिविधियों में सम्मिलित हो सकते हैं। अत: अध्यापक को चाहिए कि उनकी शिक्षा इस प्रकार की होनी चाहिए जिससे वह सामाजिक बुराइयों से दूर रह सकें।

सर्वांगीण विकास पर बल (Emphasis on all-round development)

प्रतिभाशाली बालक की शिक्षा उसके व्यक्तित्व के सभी पक्षों के विकास पर केन्द्रित होनी चाहिए, न कि उसे किताबी कीड़ा बनाने के लिए। ऐसे बालकों के केवल बौद्धिक विकास या शैक्षणिक विकास पर ही अधिक बल नहीं दिया जाना चाहिए। प्रतिभाशाली बालक के सर्वांगीण विकास के लिए अध्यापक . को अत्यधिक परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। अत: इस कार्य के लिए उसे कक्षा और स्कूल में अधिक सक्रिय रहना चाहिए।

विशेष स्कूल और कक्षाएँ (Special Schools and Classes)

प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा के लिए विशेष स्कलों की व्यवस्था की जा सकती है। इन स्कूलों में ऐसे बालक की विशेषताओं के अनुसार उन्हें विकसित करने की पर्याप्त सुविधाएँ प्रदान की जानी चाहिए, लेकिन ऐसा सुझाव वास्तव में सम्भव नहीं। स्कूलों में इतने विद्यार्थी प्रतिभाशाली नहीं होते कि उनके लिए अलग स्कूल बनाया जाए। इसके साथ ही इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में अहम् की भावना का विकास हो जाता है। ये विद्यार्थी दूसरे बालकों को तुच्छ समझने लगते हैं। इन कठिनाइयों के अतिरिक्त आर्थिक कठिनाइयाँ भी अलग स्कूल खोलने में बाधा उत्पन्न करती हैं। अत: लोकतान्त्रिक दृष्टि से अलग स्कूल वास्तविक जीवन में सम्भव नहीं हो सकते।

घर के लिए विशेष कार्य (Special work for home)

प्रतिभाशाली बालकों को घर के लिए विशेष कार्य दिया जाना चाहिए ताकि वे अपनी प्रतिभा का उचित प्रयोग कर सकें। इससे उन्हें मानसिक रूप से सन्तोष भी मिलेगा और अपनी प्रतिभा के उपयोग के अवसर भी प्राप्त होंगे।

पुस्तकालय सुविधाएँ (Library facilities)

प्रतिभाशाली बालकों में ज्ञान के लिए जिज्ञासा सामान्य बालकों की तुलना में अधिक होती है, उन्हें कक्षा की पुस्तकों के अतिरिक्त और भी उच्च स्तर की पुस्तकें पढ़ने में अधिक आनन्द आता है। अत: उनकी इस रुचि को पूरा करने के लिए पुस्तकालय-सुविधाएँ अति आवश्यक हैं।

प्रतिभाशाली बालकों के शिक्षकों के गुण (Qualities of teachers of talented children)

प्रतिभाशाली बालकों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति बड़ी सावधानी से करनी चाहिए। चुने हुए शिक्षकों को विशेष शिक्षा की विधियों एवं तकनीकों में प्रशिक्षित होना चाहिए अथवा चुनाव के पश्चात् उन्हें प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। सर्वोत्तम शिक्षक के द्वारा ही प्रतिभाशाली बालकों की प्रतिभा को निखारा जा सकता है।

‘अमेरिकन एजूकेशनल पॉलिसी कमीशन’ ने प्रतिभाशाली बालकों के शिक्षकों की विशेषताओं की निम्नलिखित सूची को प्रस्तुत किया है

  • उच्चकोटि की बुद्धि होनी चाहिए।
  • समृद्ध ज्ञान एवं सूचना से युक्त होने चाहिए।
  • बहुमुखी रुचियाँ होनी चाहिए।
  • खोजी प्रवृत्ति के होने चाहिए।
  • बालकों को उत्साहित एवं प्रेरित करने की क्षमता होनी चाहिए।
  • विनम्र स्वभाव होना चाहिए।
  • व्यक्तिगत एवं सामाजिक दायित्व का बोध होना चाहिए।
  • ईर्ष्यामुक्त स्वभाव होना चाहिए।
  • आलोचना के प्रति अधिक संवेदनशील न होना।

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